मेनोपॉज के बाद कीजिए ये 3 योगासन, हमेशा रहेंगी फिट

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 28, 2018
Quick Bites

  • माहवारी बंद होने के बाद का समय औरतों के लिए बड़ा कठिन होता है।
  • इन योगासनों को हर महिला को मेनोपॉज के बाद करना चाहिए।
  • मालासन हिप जोड़ों में लचीलापन बनाये रखने में मदद करता है।

मेनोपॉज यानि माहवारी बंद होने के बाद का समय औरतों के लिए बड़ा कठिन होता है। इस समय शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं और शरीर की फिटनेस प्रभावित होती है। इसकी कारण से मोटापा, दिल की बीमारियां, हड्डियों की कमजोरी, थायरॉइड, डायबिटीज और कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आमतौर पर महिलाओं में ये स्टेज 40-45 साल के बाद आती है। जीवन में अचानक आए इस बदलाव को कुछ महिलाएं सहजता से नहीं स्वीकार कर पाती हैं। ऐसे में योगासन आपकी मदद कर सकते हैं। मेनोपॉज के बाद आप ऐसे कई योगासन कर सकती हैं, जिनसे आपको माहवारी रुकने के बाद होने वाली इन सामान्य बीमारियों से बचाव भी रहेगा और आपकी फिटनेस भी बहुत अच्छी रहेगी। आइये आपको बताते हैं कुछ बेहतरीन योगासन, जो हर महिला को मेनोपॉज के बाद करने चाहिए।

धनुरासन

धनुरासन को करना बेहद आसान है। इसे करने से आप मोटापे, डायबिटीज, कमर दर्द, स्लीप डिस्क, कब्ज, अस्थमा, थायरॉइड और अन्य कई समस्याओं से बची रहेंगी। इसे करना भी बहुत आसान है। यह आसन पेट की चर्बी काटने में काफी कारगर है। इससे आपके शरीर में लचीलापन भी आता है।

करने की विधि- उल्टा लेटकर व अपने दोनों पैरों को मोड़कर हाथ से पकड़ें और नीचे व ऊपर से खुद को स्ट्रेच करें। इसी अवस्था में 30-60 सेकंड तक रुकें और नीचे आ जाएं व दोहराएं। इस आसान के नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है।

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मालासन

मालासन हिप जोड़ों में लचीलापन बनाये रखने में मदद करता है। यह लचीलापन हम सभी को जन्‍म के समय मिलता है, लेकिन उम्र के साथ इसमें कमी आने लगती है। हिप जोड़ों को भावनाओं के धारक के नाम से बुलाया जाता है। अगर हिप जोड़ लचीला और आसानी से मूव होता है, तो बजाय कि भावनाओं को शरीर के भीतर गैर-लाभकारी ऊर्जावान पैटर्न में बंद करने के, आप इनको जारी करने में सक्षम होते हैं। मालासन को करने से आपको पीठ दर्द से राहत मिलेगी, आपकी जांघों और पेट से चर्बी कम होगी।

करने की विधि- इसे करने के लिए घुटनों को मोड़कर अपने पैरों पर बैठ जाइये यानी कि अपने शरीर का सारा वजन टांगों और पैरों पर डालकर बैठ जाएं। आपके पैर सामने की तरफ नहीं, बल्कि दाएं पैर को दाहिनी ओर घुमा लें और बाएं पैर को बाईं तरफ। इस पोजिशन में बैठने के लिए हाथों को अपने सामने जमीन पर जमा लें। आपके दोनों हाथों में भी 2 फीट का गैप होना चाहिए।

शशांकासन

शशांकासन एड्रीनल ग्रंथी से हाने वाले स्राव को नियमित करता है। शशांकासन से हृदय रोग दूर होते हैं, फेफड़े, आंते, यकृत, अग्न्याशय भी स्वच्छ होते हैं। इस आसन की मदद से नसें, नाड़ी लचीली होकर अच्छी तरह काम करती हैं। गैस होना, भूख न लगना आदि के लिए शशांकासन फायदेमंद है। चूंकि शशांकासन से हमारे पेट के निचले भाग पर दबाव पड़ता है इसलिए इसे करने से कब्ज की शिकायत खत्म हो जाती है। यही नहीं शशांकासन की वजह से शरीर की अतिरिक्त चर्बी को भी घटाया जा सकता है।

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करने की विधि- नीचे दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाएं। दोनो पैरों को मोड़कर पीछे की ओर यानी नितम्ब (हिप्स) के नीचे रखें और एडि़यों पर बैठ जाएं। अब सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर करें। इसके बाद सांस को बाहर छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और हथेलियों को फर्श पर टिकाएं। अपने सिर को भी फर्श पर टिकाकर रखें। आसन की इस स्थिति में आने के बाद कुछ समय तक सांस रोककर रखें। फिर सांस लेते हुए शरीर में लचक लाते हुए पहले पेट को, फिर सीने को, फिर सिर को उठाकर सिर व हाथों को सामने की तरफ करके रखें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहें। सीधे होकर आराम करें। इसी क्रिया को 4 से 5 बार करें।

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