सरोगेसी की मदद से शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा के घर आई नन्ही परी, जानें कितने प्रकार की होती है सरोगेसी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 22, 2020

अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा (Shilpa Shetty Kundra)और उनके पति राज कुंद्रा (Raj Kundra) के घर एक नन्ही परी आई है । राज कुंद्रा ने इस खुशखबरी को अपने  इंस्टाग्राम पर शेयर की है। उन्होंने लिखा, "मैं यह व्यक्त नहीं कर सकता कि मैं अपने परिवार की सबसे नई सदस्य समीशा शेट्टी कुंद्रा के आने को लेकर कितना खुश हूं।'' शिल्पा और राज की बेटी समीशा शेट्टी कुंद्रा का जन्म 15 फरवरी को सरोगेसी के जरिए हुआ है। वहीं शिल्पा शेट्टी भी अपनी बेटी समिशा के आने से बेहद खुश हैं। उन्होंने भी अपने इंस्टा पर ये खबर शेयर की और अपनी नन्ही बेटी को 'जूनियर एसएसके' का टैग दिया।

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सूत्रों की मानें, तो उनकी बेटी का जन्म सरोगेसी (Surrogacy) के माध्यम से हुआ है। समिशा की तस्वीर साझा करते हुए शिल्पा ने लिखा, "समिशा शेट्टी कुंद्रा..जन्म- 15 फरवरी 2020..घर में जूनियर एसएसके का स्वागत है..संस्कृत में 'सा' का अर्थ 'पाना' होता है, और रूसी में 'मिशा' का अर्थ 'कोई भगवान जैसा' होता है..."

शिल्पा ने आगे लिखा, "आप इस नाम को हमारी देवी लक्ष्मी का नाम दे सकते हैं, जिसने हमारे परिवार को पूरा कर दिया।" शिल्पा और राज का एक बेटा भी है, जिसका नाम वियान राज कुंद्रा है। उसका जन्म मई 2012 में हुआ था। आइए जानते हैं क्या है सरोगेसी, जिसके तहत आज कई अभिनेता और अभिनेत्री बच्चे पैदा कर रहे हैं।

सरोगेसी आमतौर पर उन जोड़ों के लिए होती है, जिनके बच्चे नहीं हो रहे होते हैं। य‍ह प्रेग्नेंसी का एक ऐसा चिकित्‍सा विकल्‍प है, जिसके जरिए संतान सुख पाया जा सकता है। आमतौर पर सरोगेसी तब कराई जाती है जब किसी महिला को गर्भधारण में किसी तरह की परेशानी हो रही हो, गर्भाशय संक्रमण हो या फिर किसी अन्‍य कारण से वह गर्भ धारण करने में सक्षम न हो। माना जा रहा है 44 की उम्र में शिल्पा शेट्टी के लिए प्रेग्नेंसी मुमकिन नहीं हो पाती और उन्हें शुरू से हूी एक बेटी की चाहत रही है इसलिए उन्होंने सरोगेसी की मदद ली है।

 
 
 
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||Om Shri Ganeshaya Namah|| Our prayers have been answered with a miracle... With gratitude in our hearts, we are thrilled to announce the arrival of our little Angel, 🧿𝐒𝐚𝐦𝐢𝐬𝐡𝐚 𝐒𝐡𝐞𝐭𝐭𝐲 𝐊𝐮𝐧𝐝𝐫𝐚🧿 Born: February 15, 2020 Junior SSK in the house😇 ‘Sa’ in Sanskrit is “to have”, and ‘Misha’ in Russian stands for “someone like God”. You personify this name - our Goddess Laxmi, and complete our family. ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ⠀⠀⠀⠀⠀⠀ ~ Please bestow our angel with all your love and blessings🙏🏻❤ ~ Ecstatic parents: Raj and Shilpa Shetty Kundra Overjoyed brother: Viaan-Raj Kundra . . . . . . . . . #SamishaShettyKundra 🧿 #gratitude #blessed #MahaShivratri #daughter #family #love

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 इसे भी पढ़ें: शाहरूख, आमिर और तुषार जैसे सितारों ने अपनाई सरोगेसी, जानें क्या है

सरोगेसी के प्रकार (Types of Surrogacy)

ट्रेडिशनल या पारंपरिक सरोगेसी

ट्रेडिशनल सरोगेसी करने का तरीका बहुत ही सामान्‍य तरीका है। इसमें पुरुष के स्पर्म को किसी अन्‍य महिला जो कि सेरोगेसी के लिए तैयार हों के अंडाणुओं यानी एग्स के साथ फर्टिलाइज किया जाता है। एक पारंपरिक सरोगेसी में बच्चे की जैविक मां सरोगेट मदर होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह उसका अंडा था, जिसे पिता के शुक्राणु द्वारा निषेचित किया गया था। इसमें डोनर स्पर्म का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

जेस्टेशनल सरोगेसी 

ये ट्रेडिशनल सरोगेसी जैसा ही होता है पर इसमें सिर्फ पुरुष के शुक्राणु का इस्‍तेमाल नहीं होता है. इस प्रकार में पुरुष और स्‍त्र‍ी या पति-पत्नी के अंडाणु व शुक्राणुओं का मेल विधि से करवा कर दूसरी महिला के की बच्‍चेदानी में प्रत्‍यारोपित कर दिया जाता है। "इन विट्रो फर्टिलाइजेशन" (आईवीएफ) नामक एक तकनीक अब मां से अंडे इकट्ठा करना, उन्हें पिता से शुक्राणु के साथ फर्टिलाइज और भ्रूण को एक गर्भकालीन सरोगेट के गर्भाशय में रखना संभव बनाती है। सरोगेट मां का इसमें बच्चे के साथ कोई आनुवंशिक संबंध नहीं होता है क्योंकि यह उसका अंडा नहीं था जिसका उपयोग किया गया था। गर्भकालीन सरोगेट को "जन्म देने वाली मां" कहा जाता है। जैविक मां, हालांकि, अभी भी महिला है,जिसका एग फर्टिलाइजेशन में इस्तेमाल किया गया है।

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सरोगेसी का इस्तेमाल कौन कर सकता है?

अगर आप एक महिला हैं, तो आप कई कारणों से सरोगेसी का विचार कर सकती हैं:

  • -गर्भाशय के साथ चिकित्सा समस्याएं
  • - हिस्टेरेक्टॉमी के कारण आपके गर्भाशय को हटा दिया है
  • -ऐसी स्थितियां, जो आपके लिए गर्भावस्था को असंभव या जोखिम भरा बना देती हैं, जैसे कि गंभीर हृदय रोग
  • -आप सरोगेसी के बारे में सोचना चाह सकते हैं अगर आपने कोशिश की लेकिन विभिन्न प्रकार की सहायता-प्रजनन तकनीकों जैसे कि आईवीएफ के साथ गर्भवती नहीं हो सकीं।

समलैंगिक पुरुष और सरोगेसी

सरोगेट्स ने उन लोगों के लिए भी पेरेंटहुड को एक विकल्प बनाया है जो शायद अपनी उम्र या वैवाहिक स्थिति के कारण बच्चे को गोद लेने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।अगर समलैंगिक पुरुष एक ट्रेडिशनल सरोगेसी का उपयोग करने का निर्णय लेते हैं, तो उनमें से एक कृत्रिम शुक्राणु के माध्यम से सरोगेट के अंडे को निषेचित करने के लिए अपने शुक्राणु का उपयोग करता है। सरोगेट तब बच्चे को जन्म देती है। एक समलैंगिक दंपति एक एग डोनर भी चुन सकता है, उस दान किए गए अंडे को निषेचित करवा के गर्भकालीन सरोगेट में प्रत्यारोपित किया जाता है।

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