इन 7 तरीकों से करें रिश्‍तों को रिचार्ज, बढ़ जाएगी प्‍यार की वैलीडिटी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 23, 2018
Quick Bites

  • रिश्ते की मधुरता बरकरार रखने के लिए कुछ अतिरिक्त प्रयासों की ज़रूरत होती है।
  • मोबाइल रीचार्ज कराना नहीं भूलते, उसी तरह रिश्तों का भी ख्याल रखना ज़रूरी है।
  • यह सच है कि जीवन में व्यस्तता बढ़ती जा रही है

परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्त, परिचित और कलीग्स...नाम चाहे कुछ भी हो, हमारी जिंदगी के कैनवस को इंद्रधनुषी रंगों से सजाने में हर रिश्ते की खास भूमिका होती है। फिर भी हम इनकी अहमियत को पहचान नहीं पाते। इससे धीरे-धीरे अपनों के साथ दूरियां बढऩे लगती हैं। कई बार लोग किसी छोटी सी गलतफहमी की वजह से अपनों से नाराज़ होकर उनके साथ बातचीत बंद कर देते हैं। किसी भी रिश्ते को तोडऩा आसान है पर उसे बनाने के लिए बहुत धैर्य और मेहनत की ज़रूरत होती है। अपने रिश्तों को खुशनुमा बनाए रखने के लिए मोबाइल की तरह समय-समय पर उन्हें भी रीचार्ज करना बहुत ज़रूरी है। मनोवैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अशुम गुप्ता से बातचीत पर आधारित इस लेख को विस्‍तार से पढ़ें।

कम न हो टॉक टाइम

यह सच है कि जीवन में व्यस्तता बढ़ती जा रही है, ऐसे में लोगों के पास अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत के लिए समय नहीं होता। ऐसी संवादहीनता का रिश्तों और व्यक्ति की दिमागी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है। अकेलेपन की वजह से व्यक्ति डिप्रेशन, स्ट्रेस और एंग्ज़ायटी जैसी गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का शिकार हो जाता है। इसलिए थोड़ा ही सही पर अपने आसपास मौज़ूद लोगों के साथ बातचीत के लिए समय ज़रूर निकालें।

मेमरी कार्ड रहे ऐक्टिव

वैसे तो आजकल फेसबुक आपको सभी खास अवसरों की याद दिलाता रहता है। फिर भी कुछ लोग जन्मदिन, शादी की सालगिरह और त्योहार जैसे खास अवसरों पर अपनों को बधाई देना भूल जाते हैं। हो सकता है कि किसी करीबी व्यक्ति के साथ तालमेल इतना अच्छा हो कि बधाई न देने पर भी वह आपसे कोई शिकायत न करे। फिर भी जब आप उसे शुभकामनाएं देंगे तो निश्चित रूप से उसे बहुत अच्छा लगेगा। इसलिए अपने दिमाग के मेमरी डाटा को हमेशा अपडेट रखें। अगर व्यस्तता की वजह से आप कोई खास दिन भूल जाते हैं तो अपने मोबाइल में उसके लिए रिमाइंडर लगा लें। बावज़ूद इसके अगर किसी वजह से खास मौके पर आप उस व्यक्ति को फोन करना भूल गए हों तो एक-दो दिन बाद उससे बात कर लें।

मेसेजिंग हो सही

मोबाइल फोन के ज़रिये अमूमन दूसरों तक  वही मेसेज जाता है, जो हम कहना चाहते हैं लेकिन सामाजिक जीवन में हरदम ऐसा नहीं होता। कई बार व्यक्ति के हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज या किसी गलतफहमी की वजह से सामने वाले तक नकारात्मक संदेश चला जाता है, जिससे बेवजह संबंध खराब हो जाते हैं। इसलिए बिना सोचे-समझे कुछ भी बोलने की आदत से बचें। प्रोफेशनल लाइफ में बातचीत के दौरान शब्दों के चयन में सजगता बरतें। इससे अर्थ का अनर्थ हो सकता है। अगर कभी भूल से आपके मुंह से कोई गलत शब्द निकल जाए तो सॉरी बोलकर उसे उसी व$क्त सुधार लें।    

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नेटवर्क हो मज़बूत

जिस तरह ढंग से बातचीत के लिए मोबाइल के नेटवर्क का सही होना ज़रूरी है, उसी तरह जिंदगी की खुशहाली के लिए सामाजिक संबंधों का नेटवर्क भी मज़बूत होना चाहिए। कुछ रिश्ते जन्म के साथ हमें उपहार स्वरूप मिलते हैं, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन और करीबी रिश्तेदार शामिल होते हैं। इसके अलावा अन्य सामाजिक संबंधों को व्यक्ति अपने प्रयास से अर्जित करता है। ऐसे रिश्ते हर कदम पर व्यक्ति के लिए मददगार साबित होते हैं। इसलिए हमें अपने बच्चों की परवरिश इस ढंग से करनी चाहिए कि उनमें अच्छी सोशल स्किल्स डेवलप हों ताकि वे नए दोस्त बनाना, दूसरों की मदद करना और ज़रूरत पडऩे पर अजनबियों से भी बेझिझक बातचीत करना सीख सकें। इसी तरह आप भी अपने रिश्तों का नेटवर्क दुरुस्त रखें और उनका दायरा बढ़ाने की कोशिश करें।

शेयरिंग इज़ केयरिंग

युवाओं के बीच एंड्रॉयड फोन का शेयरइट ऐप बेहद पॉपुलर है। इसके ज़रिये वे अपने दोस्तों के साथ फिल्में और विडियोज़ शेयर करते हैं। जिस तरह आप डिजिटल वल्र्ड में शेयरिंग पसंद करते हैं, आपकी यह उदारता निजी जीवन में भी नज़र आनी चाहिए। हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहें, अपनों के साथ दिल की बातें शेयर करें। अगर कोई परिचित आपसे कुछ कहना चाहता है तो थोड़ा सा वक्त निकाल कर, उसकी बात ज़रूर सुनें। हो सकता है कि आपके दो मीठे बोल उसे उसकी समस्या से बाहर निकलने का रास्ता दिखा दें और वह डिप्रेशन का शिकार होने से बच जाए। 

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डाउनलोड करें अच्छाई

अगर गौर से देखा जाए तो डिजिटल और रीअल वल्र्ड में काफी समानताएं हैं। जिस तरह इंटरनेट के माध्यम से हम अपनी रुचि से जुड़ी हर तरह की जानकारियां डाउनलोड करते हैं, उसी तरह असली जिंदगी में भी हमारे आसपास कई ऐसे लोग मौज़ूद हैं, जिनसे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। इसलिए कुशल और अनुभवी लोगों को अपना रोल मॉडल मानते हुए हमें भी उनसे कुछ अच्छी बातें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। मिसाल के तौर पर आपने किसी दोस्त को देखकर यह निश्चय कर लिया कि अब मैं भी उसकी तरह नियमित मॉर्निंग वॉक और एक्सरसाइज़ करूंगा/करूंगी तो इससे न केवल आपकी सेहत संबंधी परेशानियां दूर होंगी बल्कि इसी बहाने आपको नए दोस्त बनाने का भी अवसर मिलेगा। फिर आप उन्हें भी अपनी ही तरह अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

डुअल सिम के फायदे

जिस तरह मोबाइल फोन में डुअल सिम का इस्तेमाल हमारे लिए फायदेमंद साबित होता है, उसी तरह अपनी जिंदगी में भी हर रिश्ते की मांग और ज़रूरतें अलग होती हैं। ऐसे में जयादा घालमेल से परेशानियां बढ़ सकती हैं। हालांकि व्यावहारिक रूप से निजी और प्रोफेशनल जीवन को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग करना असंभव है। फिर भी कोशिश यही होनी चाहिए कि कार्यस्थल पर निजी जीवन के बारे में ज्य़ादा बातचीत न की जाए और घर पर भी ऑफिस की परेशानियों की अनावश्यक चर्चा न हो।

प्रीपेड है सुरक्षित

मोबाइल की तरह हमें अपने सामाजिक संबंधों की भी कुछ कीमत चुकानी पड़ती है। वैसे तो यह व्यक्ति की इच्छा और ज़रूरतों पर निर्भर है कि वह प्रीपेड और पोस्टपेड में से किस प्लैन का चुनाव करता है, फिर भी प्रीपेड को जयादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने बजट को ध्यान में रखते हुए टॉक टाइम का रीचार्ज करवाता है। इसी तरह सामाजिक संबंधों के मामले में भी अगर व्यक्ति पहले से ही यह तय कर ले कि उसे किस रिश्तेदार या परिचित को कितना समय देना है, उपहार आदि के लेन-देन में खर्च की सीमा क्या होगी तो इससे वह तनावमुक्त रहेगा और उसके रिश्तों में भी मधुरता बनी रहेगी। ऐसी स्थिति में भावनाओं पर नियंत्रण बहुत ज़रूरी है।

अन्यथा अपनी क्षमता से अधिक समय या पैसे खर्च करने के बाद व्यक्ति अपने दोस्तों या रिश्तेदारों से भी ऐसी ही उम्मीद रखता है। अगर किसी वजह से दूसरा व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाता तो उसे निराशा होती है और अंतत: आपसी रिश्ते में भी कड़वाहट आ सकती है। व्यक्ति के लिए यह समझना बहुत ज़रूरी है कि वह किस हद तक दूसरों की मदद करने में समर्थ होगा। अगर पारिवारिक और सामाजिक जीवन में इन बातों का ध्यान रखा जाए तो रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी।

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