नौकासन करने से कम होती है पेट की चर्बी, जानें अभ्यास का तरीका और 6 अन्य फायदे

नौकासन या बोट पोज का अभ्यास पेट और साइड की चर्बी कम करने और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है, जानें इसके अभ्यास का तरीका।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Sep 15, 2021Updated at: Sep 15, 2021
नौकासन करने से कम होती है पेट की चर्बी, जानें अभ्यास का तरीका और 6 अन्य फायदे

आधुनिक जीवनशैली और खानपान की वजह से आज के समय में लोग तमाम बीमारियों से जूझ रहे हैं। पेट और पाचन से जुड़ी समस्याएं असंतुलित खानपान और जीवनशैली की वजह से तमाम लोगों में हो रही हैं। खानपान में गड़बड़ी की वजह से पेट और पाचन पर बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से आपको कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी और कामकाज के चक्कर में लोग सेहत पर ध्यान देना भूल जाते हैं। लेकिन आप इन समस्याओं को योग के अभ्यास से दूर कर सकते हैं। रोजाना योग का अभ्यास आपके शरीर को स्वस्थ और फिट रखने में बहुत फायदेमंद माना जाता है। योगासनों का सही ढंग से रोजाना अभ्यास करने से आपके शरीर से कई बीमारियां भी दूर होती हैं। योग में तमाम ऐसे आसन हैं जो अलग-अलग शारीरिक समस्याओं के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसा ही एक योगासन है नौकासन। नौकासन का अभ्यास शरीर के लिए कई मायनों में उपयोगी माना जाता है इसके अभ्यास से आपके पेट की चर्बी कम होती है और रीढ़ की हड्डी को भी मजबूती मिलती है। आइये विस्तार से जानते हैं नौकासन के बारे में।

क्या है नौकासन? (What is Naukasana or Boat Pose?)

नौकासन शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है। जिसमें नौका का मतलब है नाव और आसन का अर्थ है आसन या सीट। इस योगासन के अभ्यास में आपका शरीर नाव की मुद्रा में हो जाता है। यह आसन मध्यम श्रेणी का योगासन है जिसका अभ्यास प्राचीन काल से ही किया जा रहा है। पेट की चर्बी कम करने से लेकर रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने तक इस योगासन के अनेकों स्वास्थ्य लाभ हैं। रोजाना सही ढंग से नौकासन का अभ्यास करने से आपके फेफड़े मजबूत होते हैं और पेट के अंदर मौजूद अंगों को भी फायदा मिलता है। नौकासन के अभ्यास में आपका शरीर अंग्रेजी के अक्षर V की आकृति में आ जाता है। इसके अभ्यास से आपके लोअर बैक, पेट, कोर और बाइसेप्स और ट्राइसेप्स और पैर व टखनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नौकासन को अंग्रेजी में बोट पोज (Boat Pose) कहा जाता है। शुरुआत में इसका अभ्यास करने में थोड़ी कठिनाई हो सकती है लेकिन रोजाना प्रैक्टिस करने से आप आसानी से इसका अभ्यास कर सकते हैं।

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नौकासन का अभ्यास करने का तरीका (How To Do Naukasana or Boat Pose?)

नौकासन मध्यम श्रेणी का योगासन है जिसका अभ्यास शुरुआत में कठिन लग सकता है। लेकिन लगातार इसका अभ्यास करने से आप इस योगासन में महारथ हासिल कर सकते हैं। इस योगासन के अभ्यास में आपका शरीर नाव अथवा V की मुद्रा में होता है।  इस योगासन का अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और अगर आपको इसका अभ्यास करते समय कोई कठिनाई हो रही है तो अभ्यास को रोक देना चाहिए। नौकासन का अभ्यास बिना वार्मअप किये नहीं करना चाहिए। आप इन स्टेप्स को फॉलो कर नौकासन का अभ्यास कर सकते हैं। 

  • नौकासन का अभ्यास करने के लिए आप समतल जगह पर योगा मैट के सहारे बैठ जाएं। 
  • अब अपनी टांगो को सामने की तरफ फैलाएं। 
  • इसके बाद अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर हिप्स से थोड़ा पीछे जमीन पर रखें। 
  • अब अपने शरीर को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाने की कोशिश करें। 
  • इस दौरान ध्यान रहे आपकी रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी होनी चाहिए। 
  • अब धीरे-धीरे सांस को बाहर की तरफ छोड़ते हुए पैरों को जमीन से 45 डिग्री तक उठाएं। 
  • अब अपने शरीर को नाव की मुद्रा में लेने की कोशिश करते हुए हिप्स और नाभि को पास लेकर आएं। 
  • अब अपने बट और टेलबोन पर बैठें। 
  • इसके बाद अपने टखनों को उठाकर आंख के सीधाई में लेकर जाएं। 
  • सामान्य गति से सान लेते हुए नाव या V के आकर में लगभग 10 से 20 सेकंड तक रहें। 
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य मुद्रा में आएं। 

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नौकासन करने के फायदे (Boat Pose or Naukasana Benefits)

नौकासन के अभ्यास के कई वेरिएशन भी हैं जिनके अभ्यास से आपके शरीर को अलग-अलग फायदे मिलते हैं। शुरुआत में इसका अभ्यास सिर्फ एक ही तरह से किया जाता है लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे आप इसके अलग-अलग वेरिएशन को ट्राई कर सकते हैं। नौकासन एक इंटरमीडिएट लेवल का आसन है जिसका अभ्यास आप शुरुआत में भी कर सकते हैं। नौकासन का अभ्यास करने के प्रमुख फायदे इस प्रकार से हैं।

1. पेट और साइड की चर्बी कम करने में उपयोगी

नौकासन का रोजाना अभ्यास करने से आपके पेट और साइड की चर्बी कम होती है। आज के समस्या में असंतुलित आहार की वजह से तमाम लोग इस समस्या से ग्रसित हैं। नौकासन में आपके पेट और साइड की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं जिससे आपको वजन कम करने में भी फायदा मिलता है। रोजाना नौकासन का अभ्यास करके आप आसानी से पेट और साइड की चर्बी को कम कर सकते हैं।

2. हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

नौकासन का रोजाना अभ्यास आपकी हैमस्ट्रिंग की मांसपेशियों के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसके अभ्यास से आप हैमस्ट्रिंग क्रैम्प्स की समस्या में भी फायदा पा सकते हैं। नौकासन या बोट पोज का अभ्यास आपकी हैमस्ट्रिंग के साथ-साथ कूल्हों की मांसपेशियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।

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3. पेट की मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

नौकासन का अभ्यास पेट की मांसपेशियों को टोन करने और मजबूत बनाने का काम करता है। इसका नियमित रूप से अभ्यास करने से आपके पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके अभ्यास के दौरान आपके पेट की अंदरूनी मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है जिससे उनमें ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है। इस आसन का अभ्यास एब्स बनाने में भी बहुत उपयोगी होता है।

4. रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद

नौकासन या बोट पोज का अभ्यास रीढ़ की हड्डी के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसका अभ्यास करने से आपकी रीढ़ की हड्डियां मजबूत होती हैं और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कई समस्याओं में बहुत फायदा मिलता है। 

5. कमर और गर्दन दर्द में फायदेमंद

आज के समय में घंटों तक कुर्सी या सोफे पर बैठकर काम करने से लोगों का पोश्चर बिगड़ता जा रहा है। इसके अलावा घंटों मोबाइल में लगे रहने के कारण आपकी गर्दन का पोश्चर भी बिगड़ रहा है। इसकी वजह से आपको गर्दन दर्द और कमर में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इन समस्याओं में नौकासन का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है।

6. डायबिटीज की समस्या में बहुत उपयोगी

नौकासन या बोट पोज का अभ्यास डायबिटीज की समस्या में बहुत फायदेमंद माना जाता है। इसके नियमित रूप से अभ्यास से आपका ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है। शुगर के स्तर को बनाए रखने के अलावा इस आसन का अभ्यास करने से आपके शरीर का ब्लड फ्लो भी संतुलित रहता है।

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इसके अलावा नौकासन के अलग-अलग वेरिएशन का अभ्यास कई तरीकों से शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है। नौकासन का अभ्यास दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी और अस्थमा की समस्या में नहीं करना चाहिए। अगर आपको गंभीर रूप से सिरदर्द या माइग्रेन, लो ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आप इस आसन का अभ्यास न करें। इसके अलावा गर्भवस्था के दौरान भी इस योगासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए। हड्डियों से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में आप अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही इस योगासन का अभ्यास करें।

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