मच्छर के काटने से डेंगू, दिमागी बुखार और मलेरिया जैसे घातक रोग होते हैं। मलेरिया जुलाई से नवंबर के बीच फैलने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसका निदान सही ढंग से न किया जाए तो अकसर रोगी असमय ही मृत्यु का शिकार हो जाता है। मलेरिया के बारे में यदि हम सभी को सही जानकारी हो तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है।

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क्‍या आपको पता है मानसून और मलेरिया से जुड़ी ये 7 बातें

मच्छर के काटने से डेंगू, दिमागी बुखार और मलेरिया जैसे घातक रोग होते हैं। मलेरिया जुलाई से नवंबर के बीच फैलने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसका निदान सही ढंग से न किया जाए तो अकसर रोगी असमय ही मृत्यु का शिकार हो जाता ह

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Sep 12, 2018Updated at: Sep 11, 2019
क्‍या आपको पता है मानसून और मलेरिया से जुड़ी ये 7 बातें

हमें मौसम के अनुरुप ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। मौसम के अनुरुप ही खाने पीने की वस्तुओं का सेवन करना चाहिए। मच्छर एक ऐसा जीव है, जो यूं तो साल भर पाया जाता रहता है, लेकिन जुलाई से नवंबर माह तक यह जीव मनुष्य को डंक मारता रहता है। मच्छर के काटने से डेंगू, दिमागी बुखार और मलेरिया जैसे घातक रोग होते हैं। मलेरिया जुलाई से नवंबर के बीच फैलने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसका निदान सही ढंग से न किया जाए तो अकसर रोगी असमय ही मृत्यु का शिकार हो जाता है। मलेरिया के बारे में यदि हम सभी को सही जानकारी हो तो इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। 

 

मानसून और मलेरिया से जुड़ी बातें 

1: बरसात के मौसम में ही मलेरिया के वायरस फैलने लगते है। जिनका प्रभाव काफी हानिकारक होता है। मलेरिया में जान का जोखिम बहुत रहता है। मलेरिया के मच्छर का जानलेवा डंक बच्चों से लेकर बूढ़ों तक को नहीं छोड़ता। 

2: मौसम परिवर्तन के कुछ समय बाद ही जगह-जगह मच्छर पनपने लगते है और ये मच्छर सिर्फ रात के वक्त ही नहीं बल्कि दिन में भी परेशान करने लगते हैं। ऐसे में कई मच्छर ऐसे भी होते हैं जो मलेरिया वायरस फैलाते हैं। हालांकि मलेरिया अधिकतर गंदी रहने वाली जगहों और घनी आबादी वाले क्षेञों में ही फैलता है लेकिन ऐसा ही हो जरूरी नहीं।

3: सामान्यतः मलेरिया से ग्रसित होने वाले सभी लोगों को इससे खतरा होता है। खासतौर पर जबकी एनोफिलिस मच्छर प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम जीवाणु शरीर में फैलाता हैं। ये परजीवी न सिर्फ जानलेवा मलेरिया फैलाते है बल्कि कई घातक बीमारियों को भी जन्म देते हमें मलेरिया से बचने के लिए मच्छरों को मारने वाली दवाईयों का समय-समय पर छिड़काव करना चाहिए। अधिक से अधिक सफाई रखनी चाहिए। कहीं भी पानी लंबे समय तक इकट्ठा होने से रोकना चाहिए। कूलर, बर्तन, टायर इत्यादि में पानी भरा हुआ नहीं होना चाहिए।

4: मलेरिया में सबसे अधिक खतरा गर्भवती महिलाएं को होता है। गर्भवती महिलाओं में मलेरिया होने से उनके बच्चों का वजन आवश्यकता से कम हो जाता है साथ ही वे कई बीमारियों या फिर संक्रमण का भी शिकार हो सकते हैं। या फिर एनीमिया से ग्रस्त हो सकते है। ऐसे बच्चों की एक वर्ष तक मृत्यु की भी संभावना बन सकती है।

5: दरअसल मलेरिया और जलवायु परिवर्तन में सबसे बड़ा संबंध यही है कि जलवायु परिवर्तन के साथ ही मलेरिया बीमारी भी फैलने लगती है। हालांकि इसके फैलने का कारण मौसम बदलते ही पनपने वाले मच्छर है लेकिन ये मच्छर भी गर्मी और बरसात में ही अधिक पनपते है।

6: कुछ शोधों के मुताबिक तापमान में वृद्वि होते ही मलेरिया संक्रमण फैलना शुरू हो जाता है। यानी तापमान में वृद्धि और मलेरिया के बीच गहरा संबंध हैं। मलेरिया संक्रमण फैलाने वाले मच्छर पहाड़ी इलाकों में अधिक पनपते है। वहां की जलवायु में परिवर्तन होते ही मलेरिया भी फैलने लगता है।

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7: मलेरिया की रोकथाम के लिए रोजाना नालियों, गड्ढों व घरों की पानी की टंकियों आदि स्थानों जहां मच्छर प्रजनन कर सकते हैं, में साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

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