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पीरियड्स में ब्लड कम आने के हो सकते हैं ये 6 कारण,  डॉक्टर से जानें क्या ये गंभीर समस्या है

Low Blood Flow During Periods: पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम होना चिंता का विषय है। जानें इसके कारण-

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Apr 10, 2022Updated at: Apr 10, 2022
पीरियड्स में ब्लड कम आने के हो सकते हैं ये 6 कारण,  डॉक्टर से जानें क्या ये गंभीर समस्या है

पीरियड्स महिलाओं के जीवन होने वाला एक अनिवार्य चक्र है। भले ही पीरियड्स के दौरान लड़कियों, महिलाओं को कई दिक्कतों जैसे पेट दर्द, क्रैम्प्स, मूड स्विंग का सामना करना पड़ता है। लेकिन फिर भी वे हर महीने पीरियड्स आने का इंतजार करती हैं। क्योंकि पीरियड्स यानी मासिक धर्म के चक्र या ब्लड फ्लो में थोड़ी सी भी गड़बड़ी महिलाओं के खराब स्वास्थ्य का संकेत देता है। कुछ महिलाओं को देरी से पीरियड्स आते हैं, तो महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो काफी कम आता है, ऐसे में वे चिंतिंत हो जाती हैं। आज हम बात कर रहे हैं पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम ( low blood flow during periods in hindi) आने के कारणों के बारे में। मणिपाल अस्पताल, ओल्ड एयरपोर्ट रोड की सलाहकार-प्रसूति एवं स्त्री रोग डॉक्टर हेमानंदिनी जयरामन (Dr. Hemanandini Jayaraman, Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Manipal Hospital Old Airport Road) से विस्तार से जानें पीरियड्स में खून कम क्यों आता है? 

डॉक्टर हेमानंदिनी जयरामन बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो सामान्य तौर पर 3-5 दिन का होता है। अगर किसी को 7 दिन तक भी पीरियड्स चलते हैं, तो इस स्थिति को नॉर्मल माना जाता है। पीरियड्स के दौरान पहले और आखिरी के दिनों में ब्लड फ्लो कम होता है, बीच के दिनों में ब्लड फ्लो अधिक होता है। 

पीरियड्स में कम खून क्यों आता है? (Low Blood Flow During Periods causes)

1. कम उम्र में पीरियड्स शुरू होना

जिन लड़कियों को मासिक धर्म कम उम्र जैसे 9 या 10 साल में ही शुरू हो जाता है, तो उन्हें ब्लड फ्लो कम होता है। क्योंकि इस उम्र में हॉर्मोन्स कम बनते हैं, जिससे ब्लीडिंग कम होती है। छोटी उम्र की लड़कियों को ब्लीडिंग कम मात्रा में होती है या फिर सिर्फ स्पॉट्स दिखाई देते हैं। 

2. हॉर्मोन्स असंतुलन की समस्या (hormone disbalance symptoms)

आजकल लड़कियों में हॉर्मोन असंतुलन की समस्या काफी ज्यादा देखने को मिल रही है। इस वजह से लड़कियों को पीसीओडी का सामना करना पड़ता है। जिन लड़कियों को पीसीओडी है, उनमें पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम देखा जा सकता है। इस स्थिति में लड़कियों में हॉर्मोन्स कम बनते हैं। ब्लड फ्लो कम आना हॉर्मोन असंतुलन का एक लक्षण हो सकता है।

3. बर्थ कंट्रोल पिल्स लेना (birth control pills)

जो महिलाएं 30-40 की उम्र के बीच बर्थ कंट्रोल पिल्स लेती हैं, उनमें भी पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम देखा जा सकता है। इसमें लाइनिंग कम बनती है, ब्लड पतला बनता है, इसकी वजह से ब्लड फ्लो भी कम होता है। 

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4. डिपो-प्रोवेरा इंजेक्शन (depo provera injection uses)

डिपो-प्रोवेरा इंजेक्शन लेने के समय भी पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग काफी कम होती है। डिपो-प्रोवेरा इंजेक्शन का उपयोग गर्भधारण को रोकने के लिए किया जाता है। यह इंजेक्शन मासिक चक्र के दौरान अंडाशय से अंडे के विकास और रिलीज को रोकने में मदद करकता है। इससे गर्भावस्था को रोका जा सकता है। 

5. एंडोमेट्रिओसिस (endometriosis meaning in hindi)

एंडोमेट्रिओसिस एक बीमारी है, इसमें ओवरी में सिस्ट बनते हैं। सिस्ट के अंदर ब्लड जम जाता है। ओवरी के अंदर होने वाला यह सिस्ट भूरे रंग का होता है। इसलिए इसे चॉकलेट सिस्ट भी कहा जाता है। इसमें हॉर्मोन असंतुलित होते हैं, इसकी वजह से पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग कम मात्रा में होती है। 

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6. ट्यूबरक्लोसिस (uterus tuberculosis causes)

ट्यूबरक्लोसिस भारत में होनी वाली एक सामान्य समस्या है। यह फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन कुछ लड़कियों को यूटरस में भी ट्यूबरक्लोसिस हो सकता है। जब यूटरस में ट्यूबरक्लोसिस होता है, तो यह यूटरस की लाइनिंग को ही सबसे पहले प्रभावित करता है। इसके अलावा यह फैलोपियन ट्यूब को भी प्रभावित करता है। जब यूटरस की लाइनिंग पर ट्यूबरक्लोसिस बनता है, तो पीरियड्स के दौरान ब्लड फ्लो कम हो सकता है। इतना ही नहीं कुछ मामलों में इस स्थिति में ब्लड फ्लो पूरी तरह से बंद भी हो जाता है।

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