डिमेंशिया के इलाज में कम तीव्रता की अल्ट्रासाउंड तरंगें होगी मददगार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 09, 2018
Quick Bites

  • एलआईपीयूएस थेरेपी बिना घाव वाली फिजियोथेरेपी है।
  • इस तरह का उपचार मानव के लिए लाभदायी हो सकती है।
  • डिमेंशिया के इलाज में कम तीव्रता की अल्ट्रासाउंड तरंगें होगी मददगार।

कम तीव्रता की अल्ट्रासाउंड तरंगों से डिमेंशिया या अल्जाइमर के मरीजों के संज्ञानात्मक अक्षमता में सुधार हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कम तीव्रता वाले स्पंदित अल्ट्रासाउंड (एलआईपीयूएस) का चूहों के दिमाग पर इस्तेमाल करने से बिना दुष्प्रभाव के रक्त वाहिका निर्माण व तंत्रिका कोशिकाओं को पुनर्निर्माण में सुधार दिखाई दिया। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तरह का उपचार मानव के लिए लाभदायी हो सकती है। जापान के तोहोकू विश्वविद्यालय के हिरोआकी शिमोकावा ने कहा, "एलआईपीयूएस थेरेपी बिना घाव वाली फिजियोथेरेपी है। इसका इस्तेमाल ज्यादा जोखिम वाले बुजुर्ग मरीजों में बिना सर्जरी या एनेस्थेसिया के किया जा सकता है और इसका बार-बार इस्तेमाल हो सकता है।"

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शोधकर्ताओं के दल ने वेस्कुलर डिमेंशिया वाले चूहे पर एक के बाद एक दिनों दिनों तक इलाज किया। इससे पहले चूहे की एक सर्जिकल प्रक्रिया की गई थी, जिसमें दिमाग के रक्त की आपूर्ति को सीमित किया गया था। मानव में अल्जाइमर रोग की स्थितियों के साथ चूहे को 11 एलआईपीयूएस उपचार तीन महीने की अवधि के लिए दिया। इस शोध के परिणामों का प्रकाशन 'जर्नल ब्रेन स्टीमुलेशन' में किया गया है, जिसमें चूहों में संज्ञानात्मक अक्षमता में विशेष सुधार हुआ।

अल्जाइमर के लक्षण

  • नाम भूलना, चीजों को गुमा देना, अपने नियोजनों को भूलना, शब्दों को याद ना रख पाना, चीजों को सीखने में और उन्हें याद रखने में कठिनाई होना एक आम बात हो जाती है। तीव्र उन्माद के कारण आपकी पूरी दीर्घकालिक और अल्पकालिक स्मृति का नाश हो सकता है, अतः आप अपने प्रियजनों, रिश्तेदारों या दोस्तों को पहचानने में भी असमर्थ हो सकते हैं।
  • आप में तर्क करने की क्षमता नहीं रहती, आप विकल्पों के बीच निर्णय नहीं ले पाते। उदाहरण के लिए, अगर गर्मी का मौसम है, तो आरामदायक सूती कपड़ा पहनने का निर्णय लेने के बजाह आप सर्दियों वाला मोटा जैकेट पहन लेंगे।
  • शरीर पर नियंत्रण ना होने के कारण आप गिर सकते हैं तथा खाना पकाने में, ड्राइविंग करने में या घर के अन्य कामों को पूरा करने में भी आपको कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अगर उन्माद बहुत तीव्र हो जाए तो आप अपने रोज मरोज के काम जैसे नहाना, कपड़े पहनना, तैयार होना, खाना खाना, शौचालय जाने जैसे काम भी बिना किसी सहायता के नहीं कर पाएंगे।\
  • इस बीमारी के कारण अक्षरों और अंकों को पहचानना कठिन हो सकता है और हिसाब करने में मुश्किलें आ सकती हैं। आपको अपने व्यक्तिगत वित्तों को व्यवस्थित करने में भी मुश्किलें आएंगी।
  • आपको दिन, तारीख और समय भी याद नहीं रहता और परिचित लोगों को तथा स्थानों को पहचानने में भी असक्षम हो सकते हैं। आप अपने घर का पता भी भूल सकते हैं, आप कहा रहते हैं, या काम करते हैं, या फिर चलते चलते ही रास्ता भूल सकते हैं।

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