मथुरा में बढ़े बैक्टीरियल रोग 'लेप्टोस्पायरोसिस' के मामले, जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

लेप्टोस्पायरोसिस आम तौर पर बार‍िश में होने वाली बीमारी है जो बैक्‍टीर‍िया से फैलती है, आइए जानते हैं इससे जुड़ी जरूरी बातें

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: Sep 03, 2021Updated at: Sep 03, 2021
मथुरा में बढ़े बैक्टीरियल रोग 'लेप्टोस्पायरोसिस' के मामले, जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

कोव‍िड के अलावा मानसून सीजन आने से कई तरह की बीमार‍ियों का प्रकोप बढ़ जाता है, डेंगू, मलेर‍िया, वायरल फीवर के बाद अब लेप्टोस्पायरोसिस के केस बढ़ने लगे हैं। लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्शन है पर इसके मामले तेजी से बढ़ रहे है। यूपी के मथुरा शहर में डेंगू के कहर के बाद अब लेप्टोस्पायरोसिस के केस सामने आ रहे हैं। ये इंफेक्‍शन बार‍िश के पानी या जानवरों के यूर‍िन से इंसानों में फैलता है। डॉक्‍टरों के मुताबिक मानसून के मौसम में हमें इस बात का खास खयाल रखना है क‍ि कहीं भी बार‍िश का पानी इकट्ठा न हो, अगर आपके घर के बगीचे, आंगन या कहीं भी कोई बर्तन या गड्डा मौजूद है तो उसे भरने न दें। मथुरा के स्‍वास्‍थ्‍य व‍िभाग ने बीमारी से पीड़‍ित लोगों का इलाज शुरू कर द‍िया है। इस लेख में आगे हम लेप्‍टोस्‍पायरोस‍िस के लक्षण, इलाज और बचाव के तरीकों पर बात करेंगे। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की।

bacterial infection 

(image source:pinimg.com)

क्‍या है लेप्टोस्पायरोसिस? (What is Leptospirosis) 

लेप्टोस्पायरोसिस एक तरह का बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन है जो जानवरों के यूर‍िन से इंसानों में फैल सकता है, ज्‍यादातर ये बीमारी कुत्‍ते, चूहे या फॉर्म एन‍िमल्‍स से होती है। लेप्‍टोस्‍पायरोस‍िस के केस मानसून में बढ़ जाते हैं क्‍योंक‍ि इस दौरान बार‍िश का पानी पैर या बॉडी के अन्‍य ह‍िस्‍से में छूने का डर रहता है। ऐसा जरूरी नहीं है क‍ि जानवर में क‍िसी तरह का बैक्‍टीर‍िया हो तभी ये बीमारी होगी, अगर जानवर मे ऐसे लक्षण न हो तो भी व्‍यक्‍त‍ि संक्रामक हो सकता है। आपको इस बात का खास खयाल रखना है क‍ि बार‍िश के द‍िनों में पूरे कपड़े और खासकर जूते पहनकर ही घर से बाहर न‍िकलें। 

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किन लोगों को इस बीमारी का ज्‍यादा खतरा है? (Who all are at risk)

  • जो लोग खेतों में काम करते हैं या क‍िसान, ऐसे लोगों को इस बीमारी के होने का खतरा ज्‍यादा है। 
  • प्‍लंबर, खदानों में काम करने वाले लोग, मछुआरे, सीवर वर्कर्स को इस बीमारी का खतरा हो सकता है। 
  • जो लोग जंगल जैसे इलाके के आसपास रहते हैं उन्‍हें भी लेप्टोस्पायरोसिस ड‍िसीज हो सकती है। 
  • ज‍िन लोगों के घर में पेड़-पौधों की संख्‍या ज्‍यादा है उन्‍हें भी ये इंफेक्‍शन हो सकता है। 
  • जंगलों में काम करने वाले मजदूर या लोगों को ये इंफेक्‍शन जल्‍दी हो जाता है। 
  • ज‍िन लोगों के शरीर में घाव, चोट या खरोंच है उन्‍हें ये बैक्‍टीर‍िया जल्‍द बीमार कर सकता है। 
  • जानवरों का इलाज करने वाले डॉक्‍टर या वेटेनरी हॉस्‍प‍िटल में काम करने वाले लोगों को भी इस बीमारी का खतरा ज्‍यादा होता है। 

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण क्‍या हैं? (Symptoms of Leptospirosis)

headache symptoms

(image source:theconversation.com) 

  • लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों की बात करें तो जो व्‍यक्‍त‍ि इस बीमारी से पीड़ि‍त होता है उसमें न‍िम्‍न लक्षण देखने को मिलते हैं- 
  • लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़‍ित व्‍यक्‍ति को तेज बुखार आ सकता है, बुखार आने के साथ अन्‍य लक्षण भी शरीर में नजर आते हैं। 
  • इस बीमारी से पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि के स‍िर में तेज दर्द उठ सकता है। 
  • लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि को दस्‍त या लगातार उल्‍टी आने की समस्‍या हो सकती है। 
  • लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़ित व्‍यक्‍त‍ि के शरीर पर लाल चकत्‍ते बन सकते हैं। 
  • इस बीमारी से पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि की आंखे भी लाल हो सकती है या उसमें पीलि‍या जैसे लक्षण आ सकते हैं।  

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लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज (Treatment of Leptospirosis) 

लेप्टोस्पायरोसिस से जो व्‍यक्‍त‍ि संक्रमित होता है उसकी जांच करवाने पर खून और रीढ़ के हड्डी के द्रव में बैक्‍टीर‍िया नजर आता है। ये बैक्‍टीर‍िया क‍िडनी में चला जाता है इसल‍िए इस बीमारी से पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि को डॉक्‍टर ब्‍लड टेस्‍ट, क‍िडनी और लिवर फंक्‍शन टेस्‍ट, सीरम टेस्‍ट करवाने से सलाह दे सकते हैं। अगर बीमारी की पुष्‍ट‍ि होती है तो डॉक्‍टर एंटीबायोट‍िक दवाएं दे सकते हैं। गंभीर मरीजों को डॉक्‍टर नसों के जर‍िए भी दवा देते हैं। आपको इस बात का ध्‍यान रखना क‍ि लक्षण नजर आने पर तुरंत इलाज करवाएं नहीं तो स्‍थित‍ि गंभीर होने पर ब्‍लीड‍िंग, पीलि‍या, क‍िडनी से जुड़े रोग हो सकते हैं। इस बीमारी से खुद को बचाने का सबसे बेहतर इलाज है अपनी रोग प्रत‍िरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीके पर गौर करें। आपको हर द‍िन हल्‍दी वाला दूध, तुलसी, दालचीनी, काढ़ा और ऐसी चीजों का सेवन करें ज‍िससे इम्‍यून‍िटी बढ़े।  

लेप्टोस्पायरोसिस से कैसे बचें? (How to prevent Leptospirosis)

how to prevent leptospirosis 

(image source:freepik)

  • बार‍िश के द‍िनों में खुद को पानी में भ‍ीगने से बचाएं, कोश‍िश करें क‍ि दूष‍ित पानी से ज‍ितना दूर हो सके उतना दूर रहें। 
  • बार‍िश के पानी में न‍िकलना आपकी मजबूरी है तो बूट्स पहनकर जाएं ताक‍ि बार‍िश का पानी आपके पैरों में न छूए। 
  • इस बीमारी से बचने के ल‍िए आपको इस बात का ध्‍यान रखना है क‍ि ब‍िना चप्‍पल या जूते पहने बार‍िश के दिनों में इधर-उधर न घूमें।
  • अगर आपके घर में चूहे हैं तो दवा डालकर उन्‍हें उस जगह से हटाएं नहीं तो आपको कई तरह से इंफेक्‍शन हो सकता है। 
  • चूहे आपके खाने को भी दूष‍ित कर सकते हैं इसल‍िए आपको घर को साफ रखना चाह‍िए ताक‍ि घर में चूहे न बढ़ें। 
  • आपको घर में खाने की कोई भी चीज खुली नहीं छोड़नी चाह‍िए, इससे खाना दूष‍ित हो सकता है। 
  • अगर आप बाहर जा रहे हैं तो इस बात का खयाल रखें क‍ि खुले में बिक रहा जूस या खाने का सामान न खरीदें। 
  • पब्‍लिक टॉयलेट इस्‍तेमाल करते समय भी आपको इस बात का खास खयाल रखना है क‍ि वो साफ हों। 
  • गंदे टॉयलेट से भी आपको बैक्‍टीर‍ियल इंफेक्‍शन हो सकता है, पब्‍ल‍िक टॉयलेट से संक्रमण चार गुना तेजी से फैलता है। 

मानसून में इन बातों का ध्‍यान रखें

monsoon precautions 

(image source:lifealth)

  • मानसून के दौरान आपको एक बात का खास खयाल रखना है क‍ि ब‍िना जूते, चश्‍मा, मास्‍क, दस्‍ताने पहने घर से बाहर न न‍िकलें तभी इंफेक्‍शन से बचा जा सकता है।
  • अगर आपकी त्‍वचा पर क‍िसी भी तरह का घाव है तो उसे वॉटरप्रूफ ड्रेस‍िंग से बचाकर रखें और न‍ियम‍ित तौर पर उस जगह को साफ रखें।
  • आपको ऐसी क‍िसी भी जगह जाने से बचना है जहां पूल, तालाब या नद‍ी हो।
  • बार‍िश के पानी या दूष‍ित पानी में तैरने से भी आपको बचना चाह‍िए।
  • अगर आप क‍िसी खेत जैसे इलाके के आसपास रहते हैं तो बीमार जानवरों को छूने से बचें।
  • पीने के ल‍िए आपको साफ पानी का इस्‍तेमाल करना है। 

अगर आपको भी इस बीमारी के लक्षण नजर आ रहे हैं तो इंतजार न करें बल्‍क‍ि फौरन डॉक्‍टर को द‍िखाएं, लेप्टोस्पायरोसिस से पीड़‍ित व्‍यक्‍त‍ि का इलाज जल्‍द से जल्‍द होना जरूरी है। 

(main image source:istockphoto,amoryurgentcare)

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