कुर्मासन अभ्यास करें, कब्ज की समस्या दूर करें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 10, 2016
Quick Bites

  • अनियमित जीवनशैली से पाचन-तंत्र हुआ है कमजोर।
  • जिससे हो रही है कब्ज की समस्या पैदा।
  • इस कब्ज से निजात पाने के लिए करें कुर्मासन अभ्यास।
  • साइटिका और स्लिप डिस्क के मरीज ना करें ये अभ्यास।

अनियमित खानपान और जीवनशैली की सबसे अधिक मार पड़ी है पेट और पाचन तंत्र पर।
ठीक समय पर खाना नहीं।
खाने के बाद कोल्डड्रिंक पीना।
खाने में पिज्जा खाना... सुबह-सुबह उठकर कॉफी पीना...
ये सारी आदतें आपके पाचन तंत्र को कमजोर कर देती है जिससे खाना अच्छी तरह से पचता नहीं है और कब्ज की समस्या होती है। आज शहर की आधी आबादी कब्ज की समस्या से जूझ रही है, जिससे राहत पाने के लिए कई लोग कई हकीमों और बाबाओं के चुर्णों का सेवन कर रहे हैं।


अगर आप भी मन मसोस कर चुर्णों का सेवन कर रहे हैं तो ये कुर्मासन अभ्यास आपको इन चुर्णों और कब्ज से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है।

 

कब्ज के लिए कुर्मासन अभ्यास

अगर आप दस साल या दस दिन पुराने किसी भी तरह के गंभीर या हल्के कब्ज की समस्या से गुजर रहे हैं तो कुर्मासन का अभ्यास करिए। कब्ज से छुटकारा दिलाने में कुर्मासन काफी फायदेमंद साबित होता है।

क्यों है फायदेमंद

कुर्मासन अभ्यास से पूरे शरीर की स्ट्रेचिंग हो जाती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और पाचन-तंत्र मजबूत होता है और खाना अच्छी तरह पच जाता है।

 

अन्य फायदे

  • इस आसन से रीढ़ की हड्डी की अच्छी तरह से स्ट्रेचिंग हो जाती है जिससे अगर इंसान को पीठ व गले में दर्द की समस्या होती है तो छुटकारा मिलता है। इन सबके अलावा ये सिरदर्द के लक्षणों और दिमाग में हैप्पी हार्मोंस पैदा करने के कारण तनाव को भी कम करता है।
  • कुर्मासन करने से पेट के आसपास एकत्र हुई चर्बी भी कम होती है।

 

ऐसे करें कुर्मासन का अभ्यास

  • सबसे पहले जमीन पर अपने दोनों पैर आगे की तरफ फैलाकर बैठ जाएं। फिर अपनी दोनों हाथों की हथेलियों को अपने हिप्स के सामांनातर जमीन पर रखें।
  • फिर हल्का-हल्का दबाव डालकर अपनी जांघों को जमीन पर दबाइए और अपने पांव को मोड़ते हुए नीचे जमीन की तरफ झुकिए।
  • फिर धीरे-धीरे प्रयास कर अपनी छाती और गर्दन को ऊपर उठाएं।
  • इसी स्थिति में कुछ देर तक सांस रोक कर रहें और ध्यान लगाएं।
  • फिर धीरे-धीरे पहले वाली स्थिति में आएं।
  • इस आसन को चार से पांच बार करें।


नोट- शुरुआत में इस आसन का अभ्यास अपनी शरीर की क्षमता के अनुसार ही करें।

 


ये लोग इस आसन को ना करें

  • जिन लोगों को कटिस्नायुशूल या साइटिका (sciatica) और स्लिप डिस्क की समस्या है उन्हें ये आसन नहीं करना चाहिए।
  • हर्निया और क्रोनिक अर्थराइटिस ( chronic arthritis) के मरीजों को भी ये आसन करने से बचना चाहिए।

 

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