'बेहद' सीरियल की 'माया' की बीमारी आपको तो नहीं है? जानिए लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 07, 2016
Quick Bites

  • कई युवाओं में हो सकती है कलस्ट्रोफोबिया की समस्या।
  • घर से दूर शहर में अकेले रहने वालों को ज्यादा खतरा।
  • इस बीमारी में मरीज को कम जगह में दम घुटने का अहसास होता है।

सोनी चैनल पर पिछले महीने शुरू हुआ 'बेहद' सीरियल लोगों को काफी पसंद आ रहा है। इस सीरियल में जेनिफर विंगेट और कुशाल टंडन लीड रोल में हैं और उनका रोल दर्शकों को काफी पसंद भी आर रहा है। लेकिन इस सीरियल को आपको एक और वजह से देखना चाहिए और वह है...


कलस्ट्रोफोबिया के लिए...अच्छी स्टोरी और सुंदर एक्ट्रेस के अलावा इस सीरियल ने एक नई बीमारी को लोगों के सामने लाया है। कई बार ये बीमारी हममें से कई लोगों को होती है जिस पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो।


इस सीरियल में जेनिफर को कलस्ट्रोफोबिया से ग्रस्त दिखाया गया है जिसके बारे में तब पता चलता है जब अर्जून (कुशल टंडन), माया (जेनिफर विंगेट) को लिफ्ट में बंद कर देता है। जिसके बाद माया काफी डर जाती है और उसे काफी घबराहट होने लगती है। उसके बाद भले ही अर्जून लिफ्ट से दरवाजा हटाकर माया को अपनी बांहो में थाम लेता है लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हो जाती। बल्कि बात तो यहीं से शुरू होती है वो भी "क्लोज-टू-फोबिया" पर।

क्या है "कलस्ट्रोफोबिया"

"क्लोज-टू-फोबिया" या "कलस्ट्रोफोबिया" एक तरह से ऐंगजाइटी की समस्या है जिसमें इंसान को किसी बंद जगह में डर लगने लगता है और उसे घबराहट होने लगती है। ये बहुत छोटी जगह में बंद हो जाने और अकेले रहने पर होती है। जैसे की लिफ्ट, हवाई जहाज या किसी छोटे कमरे में बंद होने पर जिसमें खिड़कियां नहीं होतीं।  कभी-कभी ये समस्या इतनी अधिक हो जाती है कि मरीज ज्यादा टाइट कपड़े पहनने के बाद भी घबराहट महसूस करने लगता है।

लक्षण

  • काफी अधिक पसीना आना
  • हर्ट रेट बढ़ जाना
  • ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना
  • चक्कर आना
  • घबराहट होना
  • जल्दी-जल्दी सांस लेना
  • कंपकपाना
  • पैनिक अटैक
  • सिरदर्द
  • सेंसेशन
  • कभी-कभी छाती में भी दर्द होता है

 

छोटी जगहों के उदाहरण

  • लिफ्ट
  • चेंजिंग रुम
  • गुफा या टनल्स
  • बेसमेंट
  • छोटे कमरे
  • होटल के कमरे जिसमें खिड़कियां नहीं खुलती
  • पब्लिक टॉयलेट
  • हवाई जहाज
  • भीड़भाड़ वाली जगह
  • कार

अगर ये लक्षण आपको हैं तो आप भी शायद हैं "कलस्ट्रोफोबिया" से ग्रस्त

  • आज का अधिकतर युवा घर से दूर शहरों में छोटे-छोटे कमरों में अकेला रह रहा है। ऐसी स्थिति में अकेलापन और डर का शिकार कोई भी आसान से हो सकता है। जिस कारण "क्लोज-टू-फोबिया" के लक्षण युवाओं में अधिक देखने को मिलते हैं। तो अगर आप भी कभी इन नीचे दिए गए लक्षणों में से अपने में गौर करते हैं तो सतर्क हो जाएं।
  • जैसे ही "क्लोज-टू-फोबिया" से ग्रस्त मरीज किसी कमरे में घुसता है तो वो तुरंत बाहर जाने का या अपना मोबाइल चे करने लगता है। और जब सारे दरवाजे और खिड़कियां बंद हो जाते हैं तो वो घबराहट महसूस करने लगता है।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों या किसी पार्टी में, चाहे वो काफी बड़े एरिया में ही क्यों ना हो, भी वे दरवाजे के पास ही रहना पसंद करते हैं।
  • पीक टाइम पर ड्राइविंग करने से बचते हैं।
  • गंभीर मामलों में मरीज लिफ्ट के बजाय सीढ़ियां चढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं चाहे वे कितना ही थक जाएं। 

 

कारण

  • "कलस्ट्रोफोबिया" जैसी बीमारियां का एक कारण होता है - आपका अतीत या आपका डर।
  • ऐसा अतीत जिसने आपको बचपन में अंदर तक डरा दिया है। या ऐसी कोई दुर्घटना जिससे आप अंदर तक डर गए हैं और अब आपको खुद पर भरोसा नहीं रहा कि आप किसी भी तरह की अनचाही स्थिति का सामना कर सकते हैं।
  • इस बीमारी से युवाओं के ग्रस्त होने की आशंका इसलिए ज्यादा हो जाती है, खासकर लड़कियों की, क्योंकि वे शहरों में अकेले रहकर जॉब कर रहे हैं और उन्हें हमेशा सतर्क रहना पड़ता है कि कहीं कुछ हो ना जाए।

 

बचाव के दो तरीके

  • "कलस्ट्रोफोबिया क्वाश्चनेयर" - 1993 में इसको इस्तेमाल किया गया और 2001 तक ये "कलस्ट्रोफोबिया" के लक्षणों की पहचान करने वाला मुख्य इलाज बन गया। ये तरीका ये खोज करने में काफी मददगार है कि मरीज को घबराहट की समस्या है या किसी चीज से उसको डर है।
  • "कलस्ट्रोफोबिया स्केल" - 1979 में इस स्केल को बनाया गया था जिसमें 20 सवालों की एक सूची है। इन सवालों के जवाब के आधार पर मरीज की "कलस्ट्रोफोबिया-फोबिया" की जांच की जाती है।

 

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