Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या लंबे समय लो-कार्ब डाइट फॉलो करना सेहत के लिए सुरक्षित है?

लो-कार्ब डाइट में कार्ब्स की मात्रा कम होती है। लो-कार्ब डाइट प्रोटीन और फैट पर ज्‍यादा फाेकस करती है, लेक‍िन क्‍या इसे लंबे समय तक लेना सेहत के ल‍िए सुरक्ष‍ित है? एक्‍सपर्ट से जानें सही जवाब।

कई लोग वजन कम करने के ल‍िए लो-कार्ब डाइट का सेवन करते हैं क्‍योंक‍ि इस डाइट में कार्ब्स की मात्रा सीमि‍त होती है। वहीं कुछ लोग शुगर लेवल मैनेज करने के ल‍िए भी इस डाइट को चुनते हैं। ज्‍यादातर लो-कार्ब डाइट में प्रोटीन, हेल्‍दी फैट्स और स्‍टार्च रह‍ित सब्‍ज‍ियों पर फोकस किया जाता है। लो-कार्ब डाइट में 130 ग्राम तक कार्ब्स द‍िया जाता है और कुछ स्‍पेशल कंडीशन में मरीज की सेहत को मॉन‍िटर करते हुए डाइट एक्‍सपर्ट 50 से 60 ग्राम कार्ब डाइट भी देते हैं, लेक‍िन ऐसा केवल एक्‍सपर्ट की गाइंंडेंस के साथ क‍िया जाता है। लो-कार्ब डाइट फॉलो करने से पहले आपको यह जानना चाह‍िए क‍ि क्‍या यह लंबे समय तक लेने वाली एक सुरक्ष‍ित डाइट है? क्‍या लंबे समय पर कार्ब्स की कम मात्रा शरीर के ल‍िए फायदेमंद है? लंबे समय पर लो-कार्ब डाइट के असर को समझने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

लंबे समय तक नहीं लेना चाह‍िए लो-कार्ब डाइट

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Dietitian Smita Singh ने बताया क‍ि लंबे समय तक लो-कार्ब डाइट का सेवन नहींं करना चाह‍िए। लंबे समय तक कार्ब्स का सेवन न करने से या मात्रा कम करने से कमजोरी महसूस हो सकती है, कुछ पोषक तत्‍वों की कमी हो सकती है। कुछ लोग लो-कार्ब डाइट मेंं फैट का ज्‍यादा सेवन करने लगते हैं ज‍िससे बैड कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है और हार्ट पर इसका बुरा असर देखने को म‍िल सकता है। Smita Singh ने बताया क‍ि ICMR की गाइडलाइन्‍स के मुताब‍िक, हर डाइट में कम से कम 100 ग्राम कार्ब्स मौजूद होने चाह‍िए। हेल्‍दी कार्ब्स की बात करें, तो म‍िलेट्स को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएंं। इसके साथ ताजी सब्‍ज‍ियां और छ‍िलके समेत फलों का सेवन करें। इसमें कॉम्‍प्‍लेक्‍स कार्ब्स पर ज्‍यादा फोकस क‍िया जाता है और र‍िफाइंड शुगर और फूड्स का सेवन सीम‍ित करने की सलाह दी जाती है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

2022 में Diabetes, Obesity And Metabolism नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, लो-कार्ब डाइट कम समय में वेट लॉस के ल‍िए असरदार देखी गई, लेक‍िन स्‍टडी में लो-कार्ब डाइट का कोई लंबे समय में खास फायदा नहीं देखा गया। साथ ही स्‍टडी में बताया क‍ि लंबे समय तक लो-कार्ब डाइट का क‍िडनी पर असर से संबंध‍ित भी सीमि‍त जानकारी ही म‍िली। स्‍टडी के आधार पर यह कहा जा सकता है क‍ि लो-कार्ब डाइट को लंबे समय तक लेने के कोई खास फायदे नजर नहीं आए।

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लो-कार्ब डाइट लेते समय क‍ि‍न बातों का ख्‍याल रखें?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर आप लो-कार्ब डाइट लेते हैं, तो फैट और प्रोटीन के चुनाव पर गौर करें। लो-कार्ब डाइट लेने के दौरान सैचुरेटेड और ट्रांंस फैट वाली चीजों को कम खाएं। मीट या ज्‍यादा फैट वाले डेयरी प्रोडक्‍ट्स का सेवन कम करें। इन चीजों को खाने से कोलेस्‍ट्रॉल लेवल ज्‍यादा हो सकता है और हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

लंबे समय तक लो-कार्ब डाइट का सेवन करने से थकान, कमजोरी, पोषक तत्‍वों की कमी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। वेट लॉस के ल‍िए लो-कार्ब डाइट अच्‍छी है, लेक‍िन द‍िनभर में आपको क‍ितनी मात्रा में कार्ब्स लेना है? यह तय करने के ल‍िए एक्‍सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है। क‍िसी भी डाइट को फाॅलो करते समय ध्‍यान रखें क‍ि पूरे द‍िन में 100 ग्राम कार्ब्स शाम‍िल होने चाह‍िए।

FAQ

  • लो-कार्ब डाइट के फायदे क्‍या हैं?

    लो-कार्ब डाइट लेने से वजन कम करने में मदद म‍िलती है, शुगर लेवल कंट्रोल होता है, भूख भी कंट्रोल होती है। मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ के ल‍िए यह फायदेमंद मानी जाती है।
  • क‍िसे नहींं लेना चाह‍िए लो-कार्ब डाइट?

    क‍िडनी ड‍िजीज के मरीजों को लो-कार्ब डाइट न लेने की सलाह दी जाती है क्‍योंक‍ि इस डाइट में प्रोटीन की मात्रा ज्‍यादा होती है। प्रेग्नेंसी में भी डॉक्‍टर की सलाह के बगैर इस डाइट को नहीं लेना चाह‍िए।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 28, 2026 16:46 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 28, 2026 16:46 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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