जानिये क्या हैं सोरियाटिक अर्थराइटिस के लक्षण और कैसे करें इससे बचाव

सोरायसिस कई बार हड्डियों को प्रभावित करने लगता है। इसकी वजह से जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या हो जाती है। कुछ लोगों को सोरायटिक अर्थराइटिस में तेज दर्द होता है। सोरायटिक अर्थराइटिस पैरों व टखनों के जोड़ों और उनका सपोर्ट करने वाले ढांचे को भ

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Mar 23, 2018Updated at: Mar 23, 2018
जानिये क्या हैं सोरियाटिक अर्थराइटिस के लक्षण और कैसे करें इससे बचाव

सोरायसिस एक तरह का त्वचा रोग है जिसमें त्वचा पर मोटे लाल धब्बे हो जाते हैं जिनमें खुजली होती है। आमतौर पर सोरायसिस पैर, हथेली, घुटनों, पीठ, चेहरे और कोहनियों पर होता है और अन्य हिस्सों में भी इसके फैलने के आसार होते हैं। सोरायसिस यानि ये त्वचा रोग कई बार हड्डियों को भी प्रभावित करने लगता है। इसकी वजह से जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या हो जाती है। कुछ लोगों को सोरायटिक अर्थराइटिस में तेज दर्द होता है और कुछ लोगों को सामान्य दर्द होता है। सोरायटिक अर्थराइटिस पैरों व टखनों के जोड़ों और उनका सपोर्ट करने वाले ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है।

क्या है सोरायटिक अर्थराइटिस

सोरियाटिक अर्थराइटिस त्वचा और नाखून रोग होता है। इसमें लाल और परतदार चकत्ते नजर आते हैं। इस रोग के लक्षण रूमटॉइड गठिया के समान होते हैं। इसमें भी जोड़ो में सूजन हो जाती है। हालांकि सोरियाटिक गठिया रूमटॉइड गठिया की तुलना में जोड़ों को कम प्रभावित करती है। और टिपिकल रूमटॉइड गठिया एंटीबॉडी का उत्पादन भी नहीं करता। जब सोरायटिक अर्थराइटिस से होने वाली सूजन जोड़ों को सहारा देने वाली नसों को प्रभावित करती है, तो उस स्थिति को एंथेसोपैथी कहा जाता है। इस समस्या में पैरों का खयाल रखना आवश्यक हो जाता है। आमतौर पर सोरायटिक अर्थराइटिस 40-50 साल के बाद की माना जाता है मगर ये छोटे बच्चों को भी प्रभावित कर सकता है।

सोरायटिक अर्थराइटिस के लक्षण

  • हाथों की उंगलियों में सूजन की समस्या
  • पैरों की उंगलियों में सूजन
  • हाथ, पैर, घुटनों और एड़ियों में दर्द
  • निचली कमर का दर्द
  • हड्डियों में दर्द के साथ जलन महसूस होना
  • त्वचा रोग और त्वचा में धीरे-धीरे परिवर्तन
  • नाखूनों का पैटर्न बदलने लगना

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बच्चों में सोरायटिक अर्थराइटिस के लक्षण

  • पैर के पिछले हिस्से या एड़ी में दर्द की शिकायत।
  • नाखूनों के रंग में परिवर्तन या इनका त्वचा से अलग हो जाना।
  • रीढ़ की हड्डी और सेक्रोएलियक के जोड़ों की सूजन आना।
  • शरीर के एक या अधिक जोड़ों में दर्द, सूजन या जकड़न होना।
  • नितंबों में दर्द या जकड़न होना।
  • पीठ के निचले हिस्से में या गर्दन में दर्द होना।

जरूरी हैं ये सावधानियां

पैरों की इस समस्या में जरूरी है कि पैर पर किसी प्रकार का भार न पड़े। ऐसी किसी भी एक्सरसाइज से बचें, जिससे आपके पैर में दर्द या खिंचाव महसूस हो। खासतौर पर वेट लिफ्टिंग से तो दूरी ही बना लें। व्यायाम करते हुए जब आपके पैर दर्द होने लगें तो फौरन व्यायाम करना छोड़ दें। साइज से थोड़ा अधिक बड़ा जूता लें। ऐसा इसलिए ताकी सूजन होने पर भी आप जूते को आराम से पहन सकें। आपके जूते में आर्क और हील सपोर्ट होना बहुत जरूरी होता है।

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कैसे पाएं दर्द से राहत

सोराइटिक अर्थराइटिस के लिए स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज बहुत जरूरी होती है। इसके लिए, पीठ के बल लेट जाएं। पैरों को सीधा खोल लें। पैरों को बिना हिलाए, सिर्फ ऊपर की ओर उठाएं और फिर नीचे लाएं। कुछ देर में पैरों से गोला बनाएं। ये स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज रोज दिन में कम से कम एक बार जरूर करें। तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए तेल से पैरों की मसाज करें। मसाज करने से सर्कुलेशन बेहतर होता है और दर्द में राहत मिलती है। इसलिए अलावा, आप पैरों को गर्म पानी में डुबाकर भी रख सकते हैं, कुछ देर के लिए। ऐसा करने से भी दर्द कम हो जाता है और सूजन में भी कमी आती है।

क्या है इलाज

अगर आपको किसी तरह का त्वचा रोग है और उसी दौरान हड्डियों में दर्द की समस्या होती है तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। शुरुआती स्टेज में इस रोग को कुछ दवाओं द्वारा ठीक किया जा सकता है। देरी हो जाने पर इस रोग का कोई इलाज नहीं है और फिर हड्डियों का ऑपरेशन या घुटनों का रिप्लेसमेंट ही एक रास्ता बचता है। सोरायटिक अर्थराइटिस का पता लगाने के लिए चिकित्सक आपाक शारीरिक परीक्षण और इमेजिंग परीक्षण करते हैं। दवाओं से सूजन और दर्द में राहत मिल सकती है। बहुत कम स्थितियों में, आपको क्षतिग्रस्त जोड़ों को ठीक या रिप्लेस करवाने के लिए सर्जरी की जरुरत पड़ती है।

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