रोजे के दौरान मधुमेह-हाई बीपी के मरीज इन बातों का रखें ख्याल, नहीं तो हो सकती है परेशानी

रमजान का पाक महीने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार पकड़ रहा है और ऐसे में मधुमेह व हाई बीपी के मरीजों के लिए चिंता बढ़ना स्वभाविक है। इन बीमारियों से पीड़ित पुरुष व महिलाएं इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं कि वह ऐसा क्या करें कि उनकी धार्मिक निष्ठा भ

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: May 10, 2019
रोजे के दौरान मधुमेह-हाई बीपी के मरीज इन बातों का रखें ख्याल, नहीं तो हो सकती है परेशानी

रमजान का पाक महीने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार पकड़ रहा है और ऐसे में मधुमेह व हाई बीपी के मरीजों के लिए चिंता बढ़ना स्वभाविक है। इन बीमारियों से पीड़ित पुरुष व महिलाएं इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं कि वह ऐसा क्या करें कि उनकी धार्मिक निष्ठा भी बनी रहे और उनकी सेहत पर कोई प्रभाव न पड़े। दिल्ली स्थित सरोज अस्पताल की जनरल फिजीशियन निधि धवन का कहना है कि डायबिटिक लोगों को नियमित और समय पर भोजन लेने की सलाह दी जाती है इसिलए रोजा रखने से पहले उन्हें डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि इन बीमारियों से पीड़ित लोगों को रोजा रखने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

डॉ. निधि धवन ने बताया, ''रमजान में दो भोजन के बीच में 12-15 घंटे का अंतराल होता है, जो डायबिटिक लोगों के लिये एक समस्या हो सकती है, क्योंकि उन्हें नियमित और समय पर भोजन लेने की सलाह दी जाती है। जो लोग टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित हैं और अक्सर हाइपोग्लाोइसीमिया से पीड़ित रहते हैं, उन्हें रोजे रखने से अधिक खतरा होता है, लेकिन जो लोग टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित हैं उन्हें रोजे रखने पर ज्यादा परेशानी नहीं होती है। लेकिन उन्हें भी रोजा रखने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।''

  • डायबिटीज से पीड़ित लोगों को रमजान में लगातार अपने रक्त में शूगर के स्तर को मापते रहें इसके लिये एक ब्लड शूगर मीटर खरीदें। 
  • सेहरी और इफ्तार के समय अत्यधिक मात्रा में नहीं खाएं, इससे रक्त में शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
  • इतनी तेज गर्मी में शरर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। अपने शरीर को डिहाइड्रेट और डिहाइड्रेशन से बचना चाहिए। 

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रमजान के दौरान पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखने के सवाल पर डॉ. निधि ने कहा कि सुबह में खाई जाने वाली सहरी को कभी न छोड़े। सहरी खाने से आप पूरे दिन ऊर्जावान महसूस करेंगे। सहरी के समय अंडा, आटे की रोटी या परांठा, ताजे फल आदि का सेवन करें। रोजे में इफ्तार के दौरान खजूर खाना चाहिए। खजूर सेहत के लिए फायदेमंद होता है। खजूर में आयरन होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।

रोजा रखने से शरीर को होने वाले फायदे के बारे में उन्होंने कहा, ''हां तकनीकी रूप से अंतिम बार भोजन करने के आठ घंटे या उसके भी कुछ समय बाद तक आपका शरीर उपवास की दशा में नहीं आता है। यह आपकी आंत के भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने का समय है, इस अवधि के तुरंत बाद, हमारा शरीर लीवर में जमा ग्लूकोज और मांसपेशियों से ऊर्जा पाने लगता है। उपवास के दौरान या बाद में, ग्लूकोज के भंडार खत्म होने के बाद, शरीर के लिए ऊर्जा का अगला स्रोत वसा बन जाता है। जब शरीर से वसा कम होना शुरू होता है, तो इससे वजन घटता है, कोलेस्ट्रोल की मात्रा घटती है और यह डायबिटीज के जोखिम को भी कम करता है।''

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शरीर को ऊर्जा देने के लिए पर्याप्त भोजन के बारे में उन्होंने कुछ उपाय सुझाए

  • अपने शरीर को डिहाइड्रेट करने और डिहाइड्रेशन से बचने के लिये रोजा शूगर फ्री और कैफीन रहित ड्रिंक से खोलें। 
  • रमजान में मीठी चीजों का सेवन कम करें। 
  • अपने भोजन में फलों, सब्जियों, दालों और दही को शामिल करें। 
  • रोजा खोलने/इफ्तार के समय अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट का सेवन न करें। 
  • खाना खाने के तुरंत बाद ना सोएं, कम से कम दो घंटे बाद सोएं। 
  • रोजा रखने के सेहरी के समय भी पोषक भोजन का सेवन करें जिसमें साबुत अनाज की ब्रेड, साबुत अनाज, फलियां और दालें शामिल हों।
  •  डीप फ्राय भोजन जैसे पराठा, पूरी, समोसा, चिवड़ा और पकौड़े के सेवन से बचें।
  •  स्टार्च युक्त चीजें जैसे चावल और गेहूं की चपातियां खा सकते हैं।

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