Expert

छोटे बच्चे की मनोभावों को समझने के लिए माता-पिता को अपनाने चाहिए ये 6 तरीके

बच्चों के मनोविज्ञान को समझना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन कुछ तरीकों को अपनाकर आप आसानी से बच्चे की मनोदशा को समझ सकते हैं। 

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Nov 25, 2021 16:31 IST
छोटे बच्चे की मनोभावों को समझने के लिए माता-पिता को अपनाने चाहिए ये 6 तरीके

माता-पिता की इच्छा होती है कि वह अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए हर वो काम करते हैं, जिससे बच्चे को फायदा हो सकता है। ऐसे में वे शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ उनके व्यवहारिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास पर भी ध्यान देना शुरू कर देते हैं। बता दें कि बच्चों के मनोविज्ञान को समझना थोड़ा सा मुश्किल है। खासकर माता-पिता इमोशनल तरीके से बच्चों की केयर करते हैं। ऐसे में वे उनकी किसी भी परिस्थिति को स्वीकार नहीं कर पात हैं। लेकिन कुछ तरीकों को अपनाकर माता-पिता बच्चों के मनोविज्ञान को समझ सकते हैं। आज का हमारा लेख उन्हीं तरीकों पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि माता-पिता कैसे बच्चों के मनोवैज्ञानिक को समझ सकते हैं। इसके लिए हमने गेटवे ऑफ हीलिंग साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी (Dr. Chandni Tugnait, M.D (A.M.) Psychotherapist, Lifestyle Coach & Healer) से भी बात की है। पढ़ते हैं आगे...

1 - बच्चों को दें अपना समय

असर माता-पिता घर के या रोजमर्रा के कार्यों में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि अपने बच्चों के लिए भी समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में जरूरी है अपने बच्चे को समय देना। जब आप अपने बच्चे के साथ समय व्यतीत करेंगे तो इससे ना केवल आपको बच्चों की साइकोलॉजी समझ आएगी बल्कि आप वे भी आपके साथ घुलने-मिलने लगेंगे। इससे अलग बच्चे आपसे अपनी मनोस्थिति के बारे में भी बता पाएंगे।

2 - बच्चों की बात को ध्यान से सुनें 

माता-पिता की आदत होती है कि वे बच्चों की बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और अनसुना कर देते हैं। यह भी एक कारण होता है कि वे बच्चे की बच्चों की साइकोलॉजी से वंछित रह जाते हैं। ऐसा करना गलत है। जब भी बच्चों को कोई परेशानी होती है तो वे सबसे पहले माता-पिता के पास आते हैं। ऐसे में माता-पिता को अफने बच्चे की हर बात को सुनना चाहिए। ऐसा करने से आप बच्चों की मानसिक स्थिति व शारीरिक परेशानियों को समझ सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- किन बच्चों को पड़ती है स्पीच थेरेपी की जरूरत? एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे और घर पर कैसे दें स्पीच थेरेपी

3 - बच्चे से जुड़ी समस्या की जड़ ढूढें

माता-पिता बच्चे के गलत काम करने पर बिना सोचे समझे सजा दे देते हैं। ऐसा करना गलत है। बता दें कि बच्चा अगर कोई गलती करता है तो सबसे पहले ये जानें कि उसने ऐसा क्यों किया और इसके पीछे क्या कारण था। ऐसे में ना केवल आप जड़ ढूढ पाएंगे बल्कि बच्चों की सोच के बारे में पता चलेगा। जब आपको पता भी चले कि आपके बच्चे की गलती है तो ऐसे में उसे डांटने के बजाय या सजा देने के बजाय उससे समझाएं और प्यार दें। सजा देने से परिस्थिति खराब हो सकती है। 

4 - बच्चे के मानसिक विकास का आंकलन करें 

हम सभी जानते हैं कि जैसे हाथों की अंगुलियां एक दूसरे से अलग होती हैं वैसे ही हर बच्चा अपने आप में स्पेशल और अलग होता है। वहीं उनका दिमाग भी अलग-अलग तरीके से चलता है। चूंकि हर बच्चे के विकास की स्पीड भी अलग-अलग होती है ऐसे में बच्चों का मानसिक विकास की स्पीड का आंकलन करने के लिए उनके साथ ज्यादा स् ज्यादा समय निकालें। इससे अलग यदि आपको लगता है कि उसके लिखने, पढ़ने या याद करने की क्षमता और बच्चों से कम है तब भी आप धैर्य से काम लें और उसकी मनोविज्ञान के बारे में समझें।

5 - बच्चे के व्यवहार का अवलोकन

अगर आप अपने बच्चों की साइकोलॉजी को समझना या परखना चाहते हैं तो आप ना केवल अपने बच्चे के बिहेवियर पर ध्यान दें करें बल्कि घर के सभी लोगों से कहें कि वे भी बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें। इसके लिए आप अपने घर के बड़े या बच्चे के बड़े भाई बहन की मदद ले सकते हैं और इससे उनका आंकलन कर सकते हैं। ऐसा करने से आप आसानी से बच्चे की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझ सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- बच्चों को एक्टिव रखने के लिए माता-पिता अपनाएं ये 5 तरीके, दिनभर नहीं करेंगे तंग

6 - बच्चों पर दें अपना पूरा अटेंशन

बच्चे से केवल प्यार करना ही काफी नहीं है। बल्कि आप उसे अपना पूरा अटेंशन दें। इससे ना केवल आप अपने बच्चे की हरकतों पर नजर रख पाएंगे बल्कि उनके व्यवहार में आए बदलाव को भी समझ पाएंगे। इससे अलग यदि आपका बच्चा कोई गलत काम कर रहा है तो ऐसे में आप तुरंत उसे करेक्ट कर सकते हैं। 

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि माता-पिता आसान तरीकों को अपनाकर बच्चों के मनोविज्ञान को समझ सकते हैं हालांकि उन्हें बदलते भावनाओं को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि ये उनके विकास का ही हिस्सा है। लेकिन अगर बच्चों में नकारात्मक तरीकों से बदलाव हो रहा है तो ऐसे में तुरंत किसी एक्सपर्ट की मदद लेनी जरूरी है। हो सकता है कि बच्चा किसी मानसिक समस्या का शिकार हो गया हो।

इस लेख में फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

Disclaimer