Parenting Tips: ज्यादा इमोशनल बच्चों की देखभाल कैसे करें माता-पिता? जानें 5 टिप्स

आपका बच्‍चा भी है ज्‍यादा इमोशनल तो इन ट‍िप्‍स से रखें उसका ख्‍याल 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurPublished at: Jan 20, 2022Updated at: Jan 20, 2022
Parenting Tips: ज्यादा इमोशनल बच्चों की देखभाल कैसे करें माता-पिता? जानें 5 टिप्स

कुछ बच्‍चे जरूरत से ज्‍यादा इमोशनल होते हैं, ऐसे बच्‍चे जल्‍दी नाराज हो जाते हैं या इन्‍हें जल्‍दी रोना आ सकता है। ओवर इमोशनल बच्‍चों को संभालना कोई आसान काम नहीं है, परवर‍िश के दौरान होने वाले छोटी सी गलती भी ऐसे बच्‍चों के मन में गहरा जख्‍म बना सकती है इसल‍िए बचपन में ही आप अपने बच्‍चे के व्‍यवहार को समझ लें तो आपको आगे बच्‍चे को समझाने और उसे समझने में आसानी होगी। पहले तो आपको बता दें क‍ि आप कैसे पता क‍रे क‍ि आपका बच्‍चा ज्‍यादा इमोशनल है। इसका पता आप बच्‍चे के व्‍यवहार से लगा सकते हैं। अगर आपका बच्‍चा जरूरत से ज्‍यादा गुस्‍सा करता है या रोता है तो हो सकता है वो ज्‍यादा इमोशनल हो, जो बच्‍चे ज्‍यादा इमोशनल होते हैं उनमें एक हफ्ते में ही आपको अलग-अलग तरह के व्‍यवहार देखने को म‍िलेंगे। छोटी-छोटी बातों पर बुरा मानने वाले बच्‍चे भी इसी श्रेणी में आते हैं, इन्‍हें संभालने का सही तरीका हम आगे लेख में जानेंगे।

happy child

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1. इमोशनल बच्‍चों को खुश रखें (Make your child happy)

अगर आपका बच्‍चा भी ज्‍यादा इमोशनल है तो बात-बात पर उसे परेशानी हो सकती है ऐसे में बच्‍चे को खुश रखें। आप बच्‍चे से नाराज होंगे तो उसका मनोबल ग‍िरेगा, आप ये देखें क‍ि बच्‍चा क‍िस चीज से खुश होता है, ऐसे बच्‍चों को छोटे-छोटे कामों के ल‍िए र‍िवार्ड दें और तारीफ करें, बच्‍चों को खुश करने का ये आसान तरीका है। आपको इस बात का खास ख्‍याल रखना है क‍ि बच्‍चे आपसे जुड़ाव महसूस करते हैं इसल‍िए आप उन्‍हें अपने साथ फ्रैंक रखें, माता-प‍िता नहीं बल्‍क‍ि दोस्‍त बनकर उनकी बातों को समझें। 

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2. इमोशनल है बच्‍चा तो उसे समय दें (Spend time with your child) 

जो बच्‍चे ज्‍यादा इमोशनल होते हैं आपको उनके साथ समय ब‍िताना चाह‍िए, इससे बच्‍चे का आत्‍मव‍िश्‍वास बढ़ेगा, ऐसे बच्‍चों को थोड़े प्रोत्‍साहन की जरूरत होती है। ऐसे बच्‍चों के साथ आपको धैर्य बनाए रखना है, उन्‍हें समय दें। उनके खेल या एक्‍ट‍िव‍िटी का ह‍िस्‍सा बनें ताक‍ि आप ज्‍यादा से ज्‍यादा समय बच्‍चे के साथ ब‍िता पाएं।

3. बच्‍चे के न‍िर्णय को स्‍वीकारें (Accept child's decision)

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जो बच्‍चे इमोशनल होते हैं वो अपने न‍िर्णय को लेकर च‍िंतित महसूस करते हैं, आप उनसे उनका फैसला या राय जानें और न स‍िर्फ उसकी कद्र करें बल्‍क‍ि बच्‍चे के ल‍िए हुए फैसले या न‍िर्णय को स्‍वीकार करें। आपको उस समय अच्‍छे या बुरे पर‍िणाम को अहम‍ियत न देते हुए बच्‍चे के न‍िर्णय पर उसका साथ देना है, अगर फैसला गलत हो तो उसे प्‍यार से समझाएं पर तुरंत नकार देने से बच्‍चे का कॉन्‍फिडेंस डाउन होता है।

4. सख्‍ती से पेश न आएं (Avoid being strict with child)

जो बच्‍चे ज्‍यादा इमोशनल होते हैं उनके साथ सख्‍ती से पेश न आएं। ऐसे बच्‍चों से आपको नर्मी बरतनी होगी। जो बच्‍चे ज्‍यादा इमोशनल होते हैं वो ज्‍यादा समझदार भी होते हैं, आप उन्‍हें कोई बात प्‍यार से समझाएंगे तो वो आसानी से समझ पाएंगे वहीं अगर आप सख्‍ती द‍िखाएंगे तो बात ब‍िगड़ सकती है।

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5. बच्‍चों के इमोशन्‍स को अहम‍ियत दें (Give importance to child's emotions)

अगर आपका बच्‍चा क‍िसी बात पर परेशान है तो हो सकता है वो परेशानी आपके स्‍तर पर उतनी बड़ी न हो पर आपके बच्‍चे के ल‍िए वो एक बड़ी परेशानी हो सकती है इसल‍िए ल‍िए आपको बच्‍चे का दोस्‍त बनकर उसके स्‍तर पर मुमक‍िन तरीका बच्‍चे को बताना होगा साथ ही उसका मजाक बनाने की गलती न करें, जो बच्‍चे ज्‍यादा इमोशनल होते हैं उनके इमोशन्‍स की कद्र जरूर करें। 

इमोशनल बच्‍चों को प्‍यार से समझाएं, उनके साथ समय ब‍िताएं, ऐसे बच्‍चों के साथ सख्‍ती से पेश नहीं आना है बल्‍क‍ि उनके साथ धैर्य बरतें तो ऐसे बच्‍चों को आप आसानी से संभाल पाएंगे।

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