वृश्चिकासन करने के फायदे और तरीका

वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज के नियमित अभ्यास से हम अपने शरीर को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ और फिट रख सकते हैं।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 25, 2021Updated at: May 25, 2021
वृश्चिकासन करने के फायदे और तरीका

योगासनों का नियमित अभ्यास शरीर के साथ-साथ मानसिक चुनौतियों को भी कम करने में मददगार होता है। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य और फिट रहने के लिए योगासनों के नियमित अभ्यास को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिए। वृश्चिकासन (Vrischikasana) एक ऐसा योगासन है जिसके नियमित अभ्यास से आप पेट की समस्या से लेकर चेहरे की सुंदरता तक तमाम अनोखे लाभ पा सकते हैं। हालांकि इसका अभ्यास थोड़ा कठिन होता है लेकिन नियमित रूप से वृश्चिकासन का अभ्यास करने के बाद आपके लिए यह बेहद आसान भी हो सकता है। उन्नत अष्टांग मुद्रा में से एक वृश्चिकासन का अभ्यास कैसे करें? इसका अभ्यास करते वक्त क्या सावधानी बरतनी चाहिए और इसके नियमित अभ्यास से कौन से फायदे होते हैं? आइये जानते हैं इस सब बातों के बारे में।

वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज (Vrischikasana or The Scorpion Pose)

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अष्टांग योग की उन्नत मुद्रा में से एक वृश्चिकासन एक कठिन योगासन है, जिसके नियमित अभ्यास से शरीर को कई समस्याओं में फायदा मिलता है। वृश्चिकासन एक बैकबेंड और फोरआर्म बैलेंस पोज का कॉम्बिनेशन है और इस योग मुद्रा या आसन को आसानी से करने के लिए संतुलन, लचीलापन और हाथों की मजबूती जरूरी है। इस आसन में बिच्छू की मुद्रा में शरीर को ले जाना होता है और इसीलिए इसे वृश्चिकासन या द स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस आसन का अभ्यास सुबह के समय करना चाहिए। इसे सिर्फ खाली पेट ही किया जाना चाहिए और इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि इस आसन का अभ्यास करने और भोजन के बीच कम से कम लगभग 10 घंटे का गैप हो। यह आसन पेट के साथ-साथ नसों, अंतःस्रावी ग्रंथियों और बढ़ती उम्र में होने वाली दिक्कतों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। 

वृश्चिकासन का अभ्यास कैसे करें? (How to Do Vrischikasana)

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वृश्चिकासन अष्टांग योग का एक एडवांस पोज है इसलिए शुरुआत में इसका अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षक या योग एक्सपर्ट की जरूरत होती है। आप इन स्टेप्स को फॉलो कर इसका अभ्यास कर सकते हैं लेकिन अगर आप इसके अभ्यास में नए हैं तो योग प्रशिक्षक या एक्सपर्ट की सहायता जरूर लें।

1. जमीन पर योगा मैट या चटाई बिछाकर खड़े हों।

2. अपने हाथों और घुटनों को जमीन पर टिकाएं।

3. हाथों को कोहनी तक जमीन पर रखें और दाएं हाथ से बाएं हाथ की कोहनी और बाएं हाथ से दाहिने हाथ की कोहनी को पकड़ें।

4. अब यह ध्यान रखें कि आपके हाथ के बीच की दूरी कंधों के बीच की दूरी के बराबर हो।

5. अब शरीर का संतुलन बनाते हुए कूल्हों को ऊपर की तरफ उठायें।

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6. अब दोनों घुटनों को जमीन से ऊपर उठाते हुए शीर्षासन जैसी मुद्रा में आएं।

7. पैरों की उंगलियों को बाहर की ओर रखते हुए पैरों को सिर की तरफ ले जाएं।

8. लगभग 20 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में रहने के बाद आराम से अपने दोनों पैरों को जमीन की तरफ ले जाकर पहले की स्थिति में आ जाएं।

9. अगर आप शीर्षासन में अभ्यस्त नही हैं तो इसको करने के लिए दीवार का सहारा ले सकते हैं।

10. सामान्य स्थिति में आएं और शरीर को कुछ देर के लिए आराम की स्थिति में रखें।

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वृश्चिकासन का अभ्यास करते समय जरूरी सावधानी (Precautions While Doing Vrishchikasana)

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 योगासनों के अभ्यास की शुरुआत करने वाले लोगों को वृश्चिकासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए, यह आसन केवल अभ्यस्त लोगों को ही करने की सलाह दी जाती है। इसका अभ्यास अकेले में करने से चोट लगने की संभावना होती है, ऐसे में इसे अकेले में करने से भी बचना चाहिए। कुछ बातें है जिनका इस आसन के अभ्यास में ध्यान रखना जरूरी है।

  • -  नए लोगों को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • - शुरुआत में इसका अभ्यास प्रशिक्षक या एक्सपर्ट की देखरेख में किया जाना चाहिए।
  • - पीठ या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी दिक्कत, कूल्हे में चोट, चक्कर, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग आदि में इसका अभ्यास न करें।
  • - महिलाओं को गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।

वृश्चिकासन के फायदे (Vrischikasana Health Benefits)

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वृश्चिकासन का नियमित अभ्यास करने से पीठ, धड़, पैर और कंधों को मजबूती मिलती है। इसके नियमित अभ्यास से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में फायदा मिलता है। शरीर को मजबूत रखने के साथ-साथ पैरों को टोंड रखने में भी इसका अभ्यास फायदेमंद होता है। नियमित रूप से वृश्चिकासन का अभ्यास करने के ये फायदे होते हैं।

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1. पेट से जुड़ी समस्याओं में बेहद फायदेमंद होता है, इसके नियमित अभ्यास से पेट की चर्बी कम करने में मदद मिलती है।

2. शरीर की सहनशक्ति में सुधार करने में इस आसन का नियमित अभ्यास उपयोगी होता है।

3. हाथ, पैर और पीठ को मजबूत करने में बेहद फायदेमंद।

4. कूल्हे की मांसपेशियां जैसे पेसो, ग्लूटस मैक्सिमस, एडिक्टर आदि के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

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5. पैरों को मजबूत और अच्छी तरह से टोंड रखने के लिए इसका नियमित अभ्यास फायदेमंद होता है।

6. फेफड़ों के लिए बेहद फायदेमंद इस आसन के नियमित अभ्यास में छाती के डायाफ्राम को फैलाने में लाभ मिलता है।

7. इसके नियमित अभ्यास से आपके मस्तिष्क में ब्लड प्रेशर तेज होता है, जिससे याददाश्त और एकाग्रता में सुधार होता है।

8. रीढ़ की हड्डी, कंधों और ऊपरी बांह को लचीला करने में यह आसन बेहद फायदेमंद होता है।

9. चिंता और तनाव को दूर करने के लिए इसका नियमित अभ्यास उपयोगी माना जाता है।

10. थायरॉयड ग्रंथियों के मकाज में सुधार के लिए इस आसन का नियमित अभ्यास फायदेमंद होता है।

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11. चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने और झुर्रियों को कम करने में इसका नियमित अभ्यास लाभ देता है।

12. गर्दन से जुड़ी समस्या में इसका अभ्यास फायदेमंद होता है, वृश्चिकासन का अभ्यास करने से स्पॉन्डिलाइटिस के खतरे को कम किया जा सकता है।

13. बालों से जुड़ी समस्या जैसे बालों का सफेद होना और झड़ना आदि में इस आसन का नियमित अभ्यास बेहद फायदेमंद माना जाता है।

14. इस आसन के नियमित अभ्यास से मूत्र से जुड़े रोगों में भी फायदा मिलता है।

15. वृश्चिकासन के नियमित अभ्यास से क्राउन (सहस्रार) चक्र, तीसरी आंख (अजना) चक्र, गला (विशुद्ध) चक्र और हृदय (अनाहत) चक्र एक्टिव और संतुलित करने में फायदा मिलता है।

वृश्चिकासन का नियमित अभ्यास शरीर को शक्ति और लचीलापन प्रदान करता है। इसका नियमित अभ्यास पीठ, कंधों और हाथ व पैर के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस आसन का नियमित अभ्यास क्रोध, अभिमान, घृणा, असहिष्णुता और ईर्ष्या जैसे मानसिक भाव को कम करने में फायदेमंद होता है। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी, वृश्चिकासन का अभ्यास करते समय जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए। शुरुआत में इसका अभ्यास किसी एक्सपर्ट या प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

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