होम्‍योस्‍टेसिस यानी स्‍वस्‍थ हैं आप

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2013

यदि मानव शरीर के संबंध में होम्‍योस्‍टेसिस टर्म का यूज किया जाएं तो इसका सीधा सा मतलब होता है कि शरीर में सभी क्रियाएं और रसायन संतुलित मात्रा में हैं और आपकी बॉडी एकदम सामान्‍य रूप से काम कर रही है। शरीर में होने वाली विभिन्‍न क्रियाओं के बीच ब्‍लड ग्‍लूकोज के स्‍तर को होम्‍योस्‍टेसिस रेग्‍यूलेशन द्वारा मेनटेन किया जाता है। हालांकि इन्‍सुलिन की मात्रा को बैलेंस करने में समस्‍या आती है। ये ए‍क बड़ा सवाल है कि क्‍या मुधमेह रोगियों को उपचार में परेशानी का सामना करना पड़ता है? इस लेख के जरिए हम इसी पर बात करते हैं।

डायबिटीजतथ्‍य
डायबिटीज एक मेडिकल टर्म है। इस रोग में बॉडी में इन्‍सुलिन का गलत तरीके से इस्‍तेमाल होता है। इसके फलस्‍वरूप मुधमेह रोगी के शरीर में होम्‍योस्‍टेसिस की सिचुएशन कभी नहीं आती। यानी डायबिटीज के रोगी के शरीर में सभी क्रियाएं सामान्‍य रूप से नहीं चल पाती। मायो क्‍लीनिक के मुताबिक टाइप 1 डायबिटीज के मुकाबले टाइप 2 डायबिटीज ज्‍यादा पुरानी और गंभीर होती है। इसका उपचार और देखभाल बहुत जरूरी होता है। यदि इसकी देखभाल न की जाएं तो यह रोगी के शरीर के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

प्रक्रिया
होम्‍योस्‍टेसिस शरीर में होने वाली दैनिक क्रिया है। शरीर में जब ब्‍लड शुगर की मात्रा अचानक बहुत ज्‍यादा और बहुत कम होती है तो पाचन ग्रंथ‍ि इन्‍सुलिन की मात्रा को नियंत्रित करती है। ब्‍लड शुगर की मात्रा अचानक कम और ज्‍यादा होने पर पाचन ग्रंथि होम्‍योस्‍टेसिस के लिए ग्‍लूकोज रिलीज करती है। जब ब्‍लड शुगर की मात्रा ज्‍यादा होती है तो लीवर इसे संश्‍लेषित करता है और होम्‍योस्‍टेसिस प्रक्रिया के लिए एकत्रित करता है। स्‍वास्‍थ्‍य बने रहने के लिए इन्‍सुलिन भी जरूरी होती है।

समाधान
डायबिटीज का कोई भी स्‍थायी समाधान नहीं है। रोगी मधुमेह के स्‍तर पर मॉनीटरिंग करके ही इसकी बुरी स्थिति पर कंट्रोल कर सकता है। इसके साथ ही स्‍वस्‍थ खाना और नियमित व्‍यायाम भी मधुमेह रोगी को फायदा पहुंचाता है। ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में ताजे फलों का सेवन करें। जो फल और सब्जियां शर्करा की मात्रा को बढ़ाते हैं, उन्‍हें खाने से परहेज करें। केवल उन्‍हीं सब्जियों का सेवन करें जिनमें शर्करा की मात्रा कम से कम हो। शरीर किस तरह ग्‍लूकोज को यूज करें इस प्रक्रिया में व्‍यायाम सुधार करता है और मधुमेह को मेनटेन रखता है। ब्‍लड शुगर पर कंट्रोल करने के लिए इसके स्‍तर की नियमित जांच करें।

चेतावनी
जब आपकी बॉडी होम्‍योस्‍टेसिस को मेनटेन नहीं कर पाती तो इसका असर व्‍यक्ति के स्‍वास्‍थय पर नहीं पड़ता लेकिन वह इसे महसूस करता है। डायबिटीज के साथ ही शरीर में कम और ज्‍यादा समय तक बनी रहने वाली समस्‍याएं शुरू हो जाती हैं। हाइपोग्‍लाइसीमिया (हाई ब्‍लड शुगर), हाइपरग्‍लासीमिया (लो ब्‍लड शुगर) और डायबिटिक केटोएसिडोसिस डायबिटीज में कम समय तक होने वाली परेशानी होती है। वहीं लंबे समय तक होने वाली दिक्‍कत में हृदय रोग, नर्व, किडनी, आंख और पैर को क्षति पहुंचना, स्किन और मुंह पर इनफेक्‍शन होना और हड्डियों व जोड़ों में परेशानी होना है।

गलतफहमी
कई बार कोई व्‍यक्ति जो सोचता है उसे अपने ही विचारों में विरोधाभास हो जाता है। कई बार कुछ लोग मधुमेह रोगी की खुराक के बारे में सोचते हैं लेकिन इस रोग में में कोई भी तय खुराक नहीं होती। इस रोग में किसी भी रोगी की डाइट बहुत अहम होती है। इसलिए हर रोगी को यह पता होना चाहिए कि उसे अपनी स्थिति के मुताबिक क्‍या खाना है और क्‍या नहीं खाना। प्रत्‍येक रोगी की डाइट पूरी तरह से प्‍लान्‍ड होनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि वह आपके लिए बोरिंग हो जाएं। मायो क्‍लीनिक के मुताबिक मधुमेह रोगी एक निश्चित समय के अंतराल पर खाने में शुगर का यूज भी कर सकते हैं।

 

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