Tue Oct 13, 2026 | 10:29 PM IST

दुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति मोटापे से परेशान, बच्चों में बढ़ रही है समस्या; WHO के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

दुनिया भर में मोटापा सेहत से जुड़ी लगभग हर समस्या का कारण बना हुआ है। आजकल जिस रफ्तार से मोटापे के मामले बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि भविष्य में यह गंभीर बीमारी बनकर उभर सकता है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट में मोटापे से जुड़े आंकड़े इस दावे को और ज्यादा पुख्ता कर रहे हैं। 
दुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति मोटापे से परेशान, बच्चों में बढ़ रही है समस्या; WHO के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंतादुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति मोटापे से परेशान, बच्चों में बढ़ रही है समस्या; WHO के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

दुनिया भर में बढ़ता मोटापा कई गंभीर बीमारियों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट से जुड़ी बीमारियों, लिवर , किडनी और कई तरह के कैंसर को बढ़ा रहा है। हाल ही में मोटापे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2024 के आंकड़े इस स्थिति को और भी गंभीर बना देते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में करीब 110 करोड़ लोग मोटापे से जूझ रहे थे। इसका मतलब है कि हर सात में से लगभग एक व्यक्ति मोटापे से प्रभावित था। वहीं, 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के करीब 260 करोड़ लोग ओवरवेट थे। इनमें लगभग 94 करोड़ वयस्क मोटापे से प्रभावित थे।

मोटापे को लेकर WHO की रिपोर्ट

WHO के मुताबिक, 1990 से 2024 के बीच दुनिया में वयस्कों में मोटापे के मामले दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। अगर टीनएजर्स की बात की जाए, तो यह चार गुना तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा, साल 2024 में 18 साल और उससे ज्यादा उम्र के करीब 45 प्रतिशत लोग ओवरवेट थे। इनमें पुरुषों के 44 प्रतिशत और महिलाओं में मोटापे के 45 प्रतिशत मामले थे।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इससे बच्चे भी अछूते नहीं है। साल 2024 में पांच साल से कम उम्र के करीब 3.5 करोड़ बच्चे ओवरवेट थे। वहीं, 5 से 19 साल के लगभग 40 करोड़ बच्चे और टीनएजर्स ओवरवेट थे, जिनमें से लगभग 17 करोड़ मोटापे से प्रभावित थे।

मोटापे के बढ़ते मामलों को पहले अमीर देशों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन WHO की हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि अब कम और मध्यम आय वाले देशों में मोटापे से जुड़े मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका मतलब यह है कि अब मोटापा किसी एक देश, उम्र या आर्थिक वर्ग तक सीमित नहीं है।

मोटापे के कारण

WHO के अनुसार, आजकल का लाइफस्टाइल और खान-पान मोटापे को बढ़ाने वाला बनता जा रहा है और इसके कई कारण हैं।

  • पौष्टिक, किफायती और हाइजीन वाला खाना लोगों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
  • लोग आसानी से मिलने वाला अधिक चीनी, नमक और फैट वाला खाना खाने लगे हैं।
  • लोगों में फिजिकल एक्टिविटी कम होती जा रही है। लोग खेलकूद में भाग लेना कम करते जा रहे हैं।
  • लोगों का स्क्रीन टाइम या एक जगह पर कई घंटों तक बैठकर काम करते रहना भी मोटापे का कारण बनता जा रहा है।
  • समय रहते मोटापे की पहचान और इलाज नहीं किया जा रहा है।
  • बाजार के कमजोर कानून भी इस स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ रहे हैं।

who obesity reportwho obesity report

यह भी पढ़ें- हफ्ते में सिर्फ एक दिन भी 75 मिनट तेज चलें, तो घट सकती है पेट की चर्बी, नई स्टडी में चौंकाने वाला दावा

मोटापे का सेहत पर असर

WHO के अनुसार, वजन बढ़ने के कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। साल 2023 में सामान्य से ज्यादा BMI होने के कारण दुनिया भर में लगभग 37 लाख मौतें हुई थीं। इनमें हार्ट से जुड़ी बीमारियां, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियां शामिल थीं।

मोटापे का असर बच्चों में न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक भी पड़ सकता है। मोटापे के कारण बच्चे स्कूल में चिढ़ाने या भेदभाव करने लगते हैं। इससे उनके आत्मविश्वास पर भी असर पड़ सकता है। अगर बचपन में मोटापे की समस्या बनी रहती है, तो यह आगे चलकर डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकता है।

मोटापे का कैसे पता करें?

WHO के मुताबिक, वजन और लंबाई के आधार पर बॉडी मास इंडेक्स (BMI) काउंट किया जाता है। BMI को मापने के लिए वजन और हाइट चाहिए। 

  • BMI को मापने के लिए वजन किलोग्राम में होना चाहिए और लंबाई मीटर में होनी चाहिए।
  • लंबाई को दो बार गुणा कर लें। जैसे अगर आपकी हाइट 1.7 मीटर है, तो 1.7 गुणा 1.7 करें करके 2.89 उत्तर आएगा।
  • अब वजन को इस उत्तर से भाग कर दें।

अब मोटापे या ओवरवेट को ऐसे चेक करें। 

  • वयस्कों में BMI 25 या इससे ज्यादा होने पर ओवरवेट और 30 या इससे ज्यादा होने पर मोटापा माना जाता है।
  • बच्चों और किशोरों में BMI को उनकी उम्र और लिंग के अनुसार चेक किया जाता है।
  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों में वजन और लंबाई के अनुपात जैसे मानकों का इस्तेमाल किया जाता है।

मोटापे से बचाव के उपाय

WHO के मुताबिक, मोटापे से बचने के लिए लोगों को अपने लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने चाहिए।

  • प्रेग्नेंसी से पहले सेहतमंद वजन बनाए रखना चाहिए और प्रेग्नेंसी के दौरान भी वजन सही और बैलेंस्ड तरीके से बढ़ना चाहिए। 
  • जन्म के पहले 6 महीने सिर्फ ब्रेस्टफीड कराना चाहिए। इसके बाद 2 साल या उससे ज्यादा समय के लिए बाहरी डाइट के साथ ब्रेस्टफीड जारी रखना चाहिए। 
  • बच्चों को पौष्टिक खान-पान, फिजिकल एक्टिविटी, अच्छी नींद को बढ़ावा देना चाहिए और स्क्रीन टाइम को सीमित करना चाहिए। 
  • चीनी वाले मीठे ड्रिंक्स और कैलोरी वाले जंक फूड्स को कम से कम लेना चाहिए।
  •  खाने में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और मेवे लेने चाहिए। 
  • पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है।
  •  रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करना बहुत महत्वपूर्ण है। 
  • तंबाकू या शराब लेने से परहेज करना चाहिए।

यह भी पढ़ें- क्या मोटापा वैक्सीन का असर कम कर देता है? डॉक्टर से जानें सच्चाई

निष्कर्ष
मोटापा एक लंबे समय तक रहने वाली बीमारी हो सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेकर इससे जुड़ी बीमारियों के बारे में जरूर जानें और इलाज कराएं। इसके अलावा, रोजाना संतुलित भोजन, रेगुलर एक्टिविटीज, अच्छी नींद और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • क्या बचपन में मोटापा अनुवांशिक हो सकता है?

    अनुवांशिकी का प्रभाव होता है, लेकिन यह मुख्य वजह नहीं है। पेरेंट्स में मोटापा होने पर बच्चे में इसका रिस्क बढ़ जाता है, लेकिन अनहेल्दी लाइफस्टाइल और बहुत ज्यादा कैलोरी वाला खान-पान ही इस जेनेटिक प्रवृत्ति को बीमारी में बदलता है।
  • क्या बच्चों में वजन घटाने के लिए क्रैश डाइटिंग या कम खाना देना सही है?

    बढ़ते बच्चों को विकास के लिए सभी पोषक तत्वों की जरूरत होती है। क्रैश डाइटिंग से बच्चों की लंबाई और ग्रोथ रुक सकती है और कमजोरी आ सकती है। बच्चों का जंक फूड बंद करके न्यूट्रिशियस खाना दिया जाए और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाई जाए।

Read Next

→ नाना पाटेकर का 75 की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से निधन, 45 मिनट CRP देने के बाद भी नहीं बच सकी जान

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Oct 13, 2026 20:27 IST

    Published By : Aneesh Rawat