Mon Oct 26, 2026 | 01:21 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

PCOS में पीरियड्स आ रहे हैं फिर भी ओव्यूलेशन नहीं हो रहा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण

PCOS में नियमित पीरियड्स आने के बाद भी ओव्यूलेशन रुक सकता है। ऐसा क्यों होता है और इसका पता कैसे लगाया जाता है, इस तरह के तमाम जरूरी बातें जानने के लिए इस लेख को सावधानी पूर्वक पूरा पढ़ें।
PCOS में पीरियड्स आ रहे हैं फिर भी ओव्यूलेशन नहीं हो रहा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षणPCOS में पीरियड्स आ रहे हैं फिर भी ओव्यूलेशन नहीं हो रहा? डॉक्टर से जानें इसके लक्षण

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), जिसे अब Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS) के नाम से भी जाना जाता है, से जूझ रही महिलाओं के लिए पीरियड्स का नियमित होना अक्सर राहत की बात होती है। कई महिलाएं मान लेती हैं कि यदि हर महीने मासिक धर्म आने लगा है, तो अंडाशय में अंडा भी सही समय पर बन रहा होगा और गर्भधारण की संभावना सामान्य हो गई होगी, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। पीरियड्स का आना और ओव्यूलेशन होना, दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कुछ महिलाओं में नियमित रक्तस्राव होने के बावजूद ओव्यूलेशन नहीं होता या हर महीने नहीं होता। ऐसे में, खासकर गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि शरीर में वास्तव में क्या हो रहा है?

पीरियड्स आने के बाद भी ओव्यूलेशन क्यों नहीं होता?

Signs Of Ovulatory Dysfunction In PCOS WomenSigns Of Ovulatory Dysfunction In PCOS Women

वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता बताती हैं,  "PMOS में हार्मोन के असंतुलन के कारण अंडाशय में अंडे के विकास और उसके बाहर निकलने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सामान्य मासिक चक्र में अंडाशय से एक परिपक्व अंडा निकलता है, जिसे ओव्यूलेशन कहते हैं। यदि यह प्रक्रिया नहीं होती, तो महिला को गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है।"

PMOS में कभी-कभी हार्मोनल बदलावों के कारण गर्भाशय की अंदरूनी परत बनती और फिर झड़ती रहती है, जिससे रक्तस्राव हो सकता है, भले ही ओव्यूलेशन न हुआ हो। इसके अलावा, जीवनशैली में बदलाव, वजन में उतार-चढ़ाव और उपचार के प्रभाव से भी मासिक चक्र में परिवर्तन आ सकता है। इसलिए केवल पीरियड्स की तारीख नियमित होने से यह निश्चित नहीं माना जा सकता कि हर महीने ओव्यूलेशन भी हो रहा है।

साल 2021 में Clinical Obstetrics and Gynecology में प्रकाशित क्लिनिकल रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, PCOS में हार्मोनल असंतुलन (विशेष रूप से बढ़े हुए एंड्रोजन और LH/FSH अनुपात में असंतुलन) के कारण नियमित ओव्यूलेशन रुक जाता है। हालांकि, इसकी वजह से अक्सर महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होते हैं और गर्भधारण (प्रजनन क्षमता) में समस्या आती है।

कैसे पता चलता है कि ओव्यूलेशन हो रहा है या नहीं?

1. मासिक चक्र पर नजर रखें

यदि पीरियड्स नियमित अंतराल पर आ रहे हैं, तो यह ओव्यूलेशन होने का संकेत हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं करता। लगभग 21 से 35 दिनों का मासिक चक्र कई वयस्क महिलाओं में सामान्य माना जाता है। हालांकि, नियमित चक्र वाली महिलाओं में भी कभी-कभी ओव्यूलेशन नहीं हो सकता।

2. शरीर में होने वाले बदलावों को समझें

ओव्यूलेशन के आसपास योनि से निकलने वाला स्राव पारदर्शी और चिकना हो सकता है। कुछ महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द भी महसूस होता है। हालांकि, PMOS में ये संकेत हर महिला में स्पष्ट नहीं होते और इनके आधार पर ओव्यूलेशन की पुष्टि नहीं की जा सकती।

3. ओव्यूलेशन जांच किट का इस्तेमाल करें

बाजार में उपलब्ध ओव्यूलेशन जांच किट पेशाब में LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) के बढ़े हुए स्तर का पता लगाती हैं। सामान्यतः यह हार्मोन बढ़ने के बाद ओव्यूलेशन हो सकता है। लेकिन PMOS में LH का स्तर पहले से बढ़ा हुआ रह सकता है या इसमें कई बार उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए जांच किट में सकारात्मक परिणाम आने का अर्थ हमेशा यह नहीं होता कि अंडा निकल चुका है।

4. प्रोजेस्टेरोन की जांच कराएं

डॉक्टर उचित समय पर रक्त में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। यह हार्मोन ओव्यूलेशन के बाद बढ़ता है। यदि मासिक चक्र 28 दिनों का है, तो आमतौर पर अगली माहवारी आने से लगभग सात दिन पहले इसकी जांच की जाती है। हर महिला में जांच का समय एक जैसा नहीं होता, इसलिए इसे चक्र के अनुसार तय करना चाहिए।

5. अल्ट्रासाउंड से निगरानी

यदि गर्भधारण में परेशानी हो रही है या ओव्यूलेशन की स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो डॉक्टर क्रमिक अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह दे सकते हैं। इससे अंडाशय में फॉलिकल के विकास और उसके फटने के संकेतों का आकलन किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर दूसरी जांचों के साथ इसके परिणामों को समझा जाता है।

यदि ओव्यूलेशन नहीं हो रहा, तो क्या करें?

डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार, सबसे पहले PMOS के लक्षणों, हार्मोन संबंधी स्थिति और गर्भधारण की योजना का मूल्यांकन करना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और जरूरत के अनुसार वजन प्रबंधन से कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन बेहतर हो सकता है। हालांकि, हर महिला को वजन घटाने की आवश्यकता नहीं होती।

यदि गर्भधारण में परेशानी हो रही है, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ ओव्यूलेशन बढ़ाने वाली दवाओं की सलाह दे सकते हैं। इन दवाओं का सेवन चिकित्सकीय निगरानी में ही करना चाहिए। साथ ही, गर्भधारण में देरी के अन्य संभावित कारणों का भी मूल्यांकन जरूरी है।

निष्कर्ष

निश्चित रूप से PMOS में पीरियड्स का नियमित होना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे ओव्यूलेशन का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। यदि गर्भधारण की योजना है और संदेह बना हुआ है, तो सही समय पर जांच कराकर यह जानना बेहतर है कि ओव्यूलेशन वास्तव में हो रहा है या नहीं।"

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FAQ

  • क्या सामान्य वजन (Lean PCOS) वाली महिलाओं में भी ओव्यूलेशन रुकने की समस्या हो सकती है?

    बिलकुल, ऐसा हो सकता है। असल में लीन PCOS में वजन सामान्य होने पर भी इंसुलिन रेजिस्टेंस और एड्रेनल एंड्रोजेन बढ़ने से ओव्यूलेशन बाधित हो सकता है।
  • ओव्यूलेशन न होने के कारण गर्भाशय की परत (एंडोमेट्रियम) लंबे समय तक न झड़ने से क्या खतरा रहता है?

    इससे गर्भाशय की परत अत्यधिक मोटी होने लगती है, जिससे एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया और आगे चलकर एंडोमेट्रियल कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

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Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Oct 26, 2026 11:30 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Shobha Gupta