मौसम में बदलाव के साथ अक्सर लोगों को वायरल इंफेक्शन और बुखार होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में अक्सर लोग एंटीबायोटिक दवाइयों का सेवन करते हैं, लेकिन कई बार इसका असर बुखार पर नहीं होता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि दवा लेने के बाद भी बुखार या इंफेक्शन ठीक क्यों नहीं हो रहा है? आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।
एंटीबायोटिक से हर बुखार ठीक क्यों नहीं होता है?
डॉ. अरविंद के अनुसार, बुखार, इंफेक्शन या सूजन (इंफ्लेमेटरी) के प्रति शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। यह तब होता है, जब शरीर का इम्यून सिस्टम किसी बीमारी से लड़ने के लिए शरीर का तापमान बढ़ा देता है। हालांकि, एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल आमतौर पर इंफेक्शन के इलाज के लिए किया जाता है, लेकिन ये सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन (बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण) पर ही असरदार होती हैं। इसलिए, बुखार पैदा करने वाली हर स्थिति में ये काम नहीं आती है।
इंफेक्शन वायरस के कारण
डॉ. अरविंद का कहना है, बुखार के हर मामले में एंटीबायोटिक्स के काम न करने का एक मुख्य कारण यह है कि कई इंफेक्शन वायरस के कारण होते हैं। सामान्य सर्दी-जुकाम, इन्फ्लूएंजा, डेंगू और वायरल बुखार के ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक्स का कोई असर नहीं होता है। एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया की संरचना और उनकी कार्यप्रणाली को निशाना बनाती हैं, जो वायरस में नहीं होती है। इसलिए, वायरल इंफेक्शन में एंटीबायोटिक्स लेने से न तो वायरस खत्म होता है और न ही ठीक होने की प्रक्रिया तेज होती है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण
एक और बड़ी चिंता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (एंटीबायोटिक्स का बेअसर हो जाना) है। जब एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक इस्तेमाल किया जाता है, बिना डॉक्टरी सलाह के ली जाती हैं या कोर्स पूरा होने से पहले ही बंद कर दी जाती हैं, तो बैक्टीरिया में ऐसी क्षमता विकसित हो सकती है, जिससे वे कुछ खास दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट (प्रतिरोधी) हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि ऐसे रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन का इलाज करना और भी मुश्किल हो सकता है, जिसके लिए अलग तरह की एंटीबायोटिक्स या खास मेडिकल देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।
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इंफ्लेमेटरी डिसऑर्डर के कारण
बुखार बिना इंफेक्शन वाली स्थितियों के कारण भी हो सकता है, जैसे कि इंफ्लेमेटरी डिसऑर्डर (सूजन से जुड़ी बीमारियां), कुछ खास दवाएं या अन्य कोई अंदरूनी मेडिकल समस्या। ऐसे मामलों में, इलाज में एंटीबायोटिक्स की कोई भूमिका नहीं होती है।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2024 में Antibiotics में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एंटीबायोटिक्स के संभावित नुकसान और कुछ जांच प्रक्रियाओं की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें लिखते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ये अक्सर वायरल बीमारियों पर असरदार नहीं होती हैं और सिर्फ बुखार होने पर इनका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (दवाओं के बेअसर होने) जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए यह बहुत जरूरी है कि इनका इस्तेमाल साक्ष्यों पर आधारित और सही तरीके (एंटीबायोटिक स्टीवार्डशिप) से किया जाए।
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बुखार होने पर क्या करें?
डॉ. अरविंद का कहना है, बुखार होने पर तुरंत एंटीबायोटिक्स लेने के बजाय, इसके असली कारण का पता लगाना सबसे सही तरीका है। डॉक्टर लक्षणों, बुखार की अवधि और शारीरिक जांच के आधार पर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। इलाज में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, आराम करना, बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और स्थिति के अनुसार सही इलाज कराना शामिल हो सकता है।
ध्यान रहे, लोगों को बची हुई एंटीबायोटिक्स या किसी और के लिए लिखी गई दवाएं लेने से बचना चाहिए। एंटीबायोटिक्स सिर्फ तभी लेनी चाहिए जब कोई डॉक्टर इसकी सलाह दे।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. अरविंद कहते हैं, अगर बुखार बना रहता है, बहुत ज्यादा बढ़ जाता है या इसके साथ कुछ चेतावनी देने वाले लक्षण दिखते हैं, जैसे सांस लेने में परेशानी, भ्रम की स्थिति, तेज सिरदर्द, लगातार उल्टी आना, डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) या बहुत ज्यादा सुस्ती महसूस होती है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
यह समझना बहुत जरूरी है कि हर बुखार में एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती है। सही डायग्नोसिस (बीमारी की पहचान) और सही इलाज से मरीज जल्दी ठीक हो सकता है, साथ ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा भी कम हो जाता है।
निष्कर्ष
एंटीबायोटिक्स सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन (बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन) पर असरदार होती हैं, जबकि वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम या डेंगू जैसी समस्याएं वायरस के कारण होती हैं, जिन पर ये बेअसर रहती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के या अधूरा कोर्स करने से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में इलाज मुश्किल हो सकता है। इसलिए, हर बुखार में एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती है। बुखार होने पर तुरंत दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही कारण का पता लगाना चाहिए और अगर बुखार लंबे समय तक बना रहे या सांस लेने में परेशानी जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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FAQ
बार-बार बुखार होने के क्या कारण हैं?
वायरल इंफेक्शन, बैक्टीरियल इंफेक्शन, मच्छरों से जुड़ी बीमारियों, कमजोर इम्यूनिटी, ऑटोइम्यून या सूजन को बढ़ाने वाली बीमारियों, दवाइयों और थायराइड असंतुलन जैसी समस्याओं के कारण व्यक्ति को बार-बार बुखार होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।एंटीबायोटिक का सेवन कब करना चाहिए?
बैक्टीरियल इंफेक्शन और यूटीआई जैसी स्थितियों में एंटीबायोटिक्स का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ किया जा सकता है।
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Current Version
Oct 31, 2026 22:22 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr. Aravinda S N
