Mon Oct 5, 2026 | 09:57 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vighnesh Y , Sr. Consultant – General Medicine

Tetanus Injection Rules: चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन कब है जरूरी? जानें डॉक्टर से सही उम्र और नियम

टिटनेस वैक्सीन शरीर को टिटनेस पैदा करने वाले बैक्टीरिया से बचाव के लिए इम्‍यून‍िटी विकसित करने में मदद करती है। जानें इसकी डोज कब और कैसे लेनी चाह‍िए?
Tetanus Injection Rules: चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन कब है जरूरी? जानें डॉक्टर से सही उम्र और नियमTetanus Injection Rules: चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन कब है जरूरी? जानें डॉक्टर से सही उम्र और नियम

टिटनेस एक गंभीर इंफेक्‍शन है, जो क्लोस्ट्रीडियम टेटानी (Clostridium Tetani) नाम के बैक्‍टीरिया के कारण होता है। यह बैक्‍टीरिया मिट्टी, धूल और गंदगी में पाया जाता है और जब गहरे घाव में पहुंचता है, तो टॉक्सिन छोड़ता है जो मांसपेशियों में अकड़न और गंभीर समस्‍याओं का कारण बन सकता है। टिटनेस की स्थिति में मांसपेशियों में दर्द और जकड़न होती है, जो सबसे पहले जबड़े और गर्दन में शुरू होती है। इसे 'लॉक जॉ' भी कहा जाता है। अगर समय पर इलाज न हो, तो यह सांस लेने में कठिनाई और दिल की धड़कन की अनियमितता जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा कर सकता है। आइए जानते हैं इससे बचाव के ल‍िए बनी टि‍टनेस वैक्‍सीन कब और क्‍यों लेना जरूरी है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Vighnesh Y, Sr. Consultant General Physician At Yashoda Hospitals, Secunderabad से बात की।

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक, ट‍िटनेस वैक्‍सीन सभी के ल‍िए होती है। बच्चों को टिटनेस से बचाव की DTaP वैक्सीन 2, 4 और 6 महीने की उम्र में दी जाती है। इसकी चौथी डोज 15 से 18 महीने और पांचवीं डोज 4 से 6 साल की उम्र में दी जाती है। 11 से 12 साल की उम्र में Tdap की बूस्टर डोज दी जाती है। 19 साल के बाद, Tdap या Td का बूस्टर आमतौर पर हर 10 साल में दिया जाता है।

टिटनेस का इंजेक्शन कब और किसे लगवाना चाहिए?

ट‍िटनेस का टीका वयस्क, बच्‍चों, क‍िशोरों, गर्भवती मह‍िलाओं को लगाया जाता है। जब चोट या घाव होता है या वैक्‍सीन को लगाए 10 साल से अध‍िक समय बीत चुका होता है, तब ट‍िटनेस का इंजेक्‍शन लगाया जाता है।

उम्र के हिसाब से टिटनेस का टीका (सही समय और डोज)

क‍िसे लगवानी चाह‍िए? ट‍िटनेस वैक्‍सीन कब लगवानी चाह‍िए? वैक्‍सीन का प्रकार 
श‍िशु जन्‍म के 2 महीने के भीतर, 4 महीने पर और 6 महीने पर। DTaP (शुरुआती 3 मुख्य खुराकें)
छोटे बच्‍चे 15 से 18 महीने की उम्र में और फिर 4 से 6 वर्ष की उम्र में। DTaP (बूस्टर खुराकें)
क‍िशोर 

11 से 12 वर्ष की उम्र में।

Tdap बूस्टर डोज
वयस्‍क हर 10 वर्ष में एक बार। Td या Tdap बूस्टर डोज
गर्भवती मह‍िलाएं आमतौर पर तीसरी त‍िमाही में। Tdap (मां और नवजात शिशु की सुरक्षा के लिए) 
मामूली चोट लगने पर 

चोट लगने के 24 से 48 घंटों के भीतर।

 
गहरी चोट लगने पर 

चोट लगने के 24 से 48 घंटों के भीतर।

 

टिटनेस क्या है और यह शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?

टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। टिटनेस का इलाज न कराने पर मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन, सांस लेने में कठिनाई और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। समय पर टीकाकरण इन गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकता है।

चोट लगने के कितनी देर के भीतर टिटनेस का इंजेक्शन लगाना जरूरी है?

चोट लगने के बाद, 48 घंटे के अंदर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अगर घाव गंदा है या टिटनेस का खतरा ज्यादा है, तो जितनी जल्दी हो सके टीका लगवाएं। बेहतर है कि उसी दिन टिटनेस का टीका लगवा लिया जाए।

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क्या जंग लगी चीज से चोट लगने पर टिटनेस का टीका लगवाना जरूरी है?

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जंग खुद टिटनेस का कारण नहीं बनती। हालांकि, जंग लगी चीजों पर मिट्टी या बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं। अगर चोट गहरी या गंदी है और आखिरी टिटनेस बूस्टर को 5 साल से ज्यादा हो चुके हैं, तो टिटनेस का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है।

टिटनेस का टीका कितने समय तक असरदार रहता है?

टिटनेस के बूस्टर डोज से मिलने वाली सुरक्षा आमतौर पर 10 साल तक रहती है। हालांकि, अगर घाव गहरा, गंदा या उसमें ज्‍यादा संक्रमण का खतरा है, तो आखिरी टीका लगने के 5 साल बाद या उससे अधिक समय होने पर बूस्टर डोज की सलाह दी जा सकती है।

क्या मामूली कट या खरोंच पर भी टिटनेस का टीका लगवाना जरूरी है?

अगर घाव साफ एवं छोटा है और प्राइमरी वैक्‍सीन कोर्स पूरा हो चुका है और आखिरी टिटनेस डोज को 10 साल से कम समय हुआ है, तो आमतौर पर बूस्टर की जरूरत नहीं होती, लेकिन गंदे या कील जैसी चीज से हुए छेद वाले घाव में घाव छोटा होने के बाद भी डॉक्टर से जांच के बाद वैक्‍सीन लेना है या नहीं, यह तय क‍िया जाता है।

टिटनेस वैक्सीन से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां

  • गहरे या गंदे घाव को नजरअंदाज न करें, भले ही चोट छोटी दिखाई दे।
  • चोट लगने पर घाव को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें।
  • डॉक्टर को बताएं कि आखिरी टिटनेस की डोज कब लगी थी?
  • अपने टीकाकरण का रिकॉर्ड संभालकर रखें।
  • केवल जंग लगी चीज को टिटनेस का कारण न मानें। घाव का गंदा या मिट्टी से दूषित होना ज्‍यादा खतरा पैदा करता है।
  • टिटनेस की वैक्सीन या अन्य जरूरी उपचार की जरूरत होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

ट‍िटनेस इंजेक्‍शन बच्‍चों, क‍िशोरों, वयस्‍कों, गर्भवती मह‍िलाओं, चोट या घाव होने की स्‍थ‍िति‍ में या डोज को अगर 10 साल से अध‍िक समय बीत चुका है, तो ट‍िटनेस इंजेक्‍शन लगाया जाता है। बच्चों को टिटनेस से बचाव की DTaP वैक्सीन 2, 4 और 6 महीने की उम्र में दी जाती है। इसकी चौथी डोज 15 से 18 महीने और पांचवीं डोज 4 से 6 साल की उम्र में दी जाती है। 11 से 12 साल की उम्र में Tdap की बूस्टर डोज दी जाती है। 19 साल के बाद, Tdap या Td का बूस्टर आमतौर पर हर 10 साल में दिया जाता है। जंग वाली चीज से गहरी चोट लगने पर या बूस्‍टर डोज को 5 साल से अध‍िक समय बीतने पर ट‍िटनेस का टीका लगाया जाता है। ट‍िटनेस वैक्‍सीन की सुरक्षा आमतौर पर 10 सालों तक रहती है। जंग खुद ट‍िटनेस का कारण नहीं बनती, लेक‍िन जंग वाली चीज पर लगी धूल या म‍िट्टी के कारण बैक्‍टीर‍िया त्‍वचा को इंफेक्‍ट कर सकते हैं ज‍िससे बचने के ल‍िए ट‍िटनेस इंजेक्‍शन लगाया जाता है। ऐसे में कभी-कभी छोटी चोट में भी इंजेक्‍शन लगाने की सलाह दी जाती है। ट‍िटनेस इंजेक्‍शन न लगवाने पर मांसपेशियों में गंभीर ऐंठन, सांस लेने में कठिनाई और यहां तक कि मौत जैसी स्‍थि‍त‍ि भी हो सकती है इसल‍िए ट‍िटनेस वैक्‍सीन को नजरअंदाज न करें। साथ ही, चोट लगने के 48 घंटों के भीतर जांच करवाएं और जल्‍द से जल्‍द ट‍िटनेस शॉट लगवाना चाह‍िए। टिटनेस इंफेक्‍शन से बचने के लिए इंजेक्शन लगवाना जरूरी हो सकता है।

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FAQ

  • क्या टिटनेस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?

    नहीं। टिटनेस आमतौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता। यह बैक्टीरियल इंफेक्‍शन, बैक्‍टीर‍िया के घाव के जरिए शरीर में प्रवेश करने से होता है।
  • गर्भावस्था में टिटनेस का इंजेक्शन क्यों जरूरी है?

    गर्भावस्था में मह‍िला को गंभीर इंफेक्‍शन से बचाव के ल‍िए यह वैक्‍सीन जरूरी है। हालांक‍ि, ट‍िटनेस इंजेक्‍शन हर गर्भवती मह‍िला को नहीं लगाया जाता है। यह केवल डॉक्‍टर की सलाह के अनुसार द‍िया जाता है।

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Oct 05, 2026 20:08 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vighnesh Y