डेंगू या चिकनगुनिया जैसी बीमारियों में मरीजों का प्लेटलेट्स का चेकअप होता है। आमतौर पर माना जाता है कि प्लेटलेट्स 50,000 से कम नहीं होने चाहिए। अगर किसी के प्लेटलेट्स इससे कम होते हैं, तो अक्सर मरीज घबरा जाता है, लेकिन इस कंडीशन में क्या करना चाहिए? इसके बारे में Dr. Ankur Nandan Varshney, Senior Consultant, Medical Oncology, Medanta Hospital, Noida ने बताया कि प्लेटलेट्स 50,000 से नीचे आने की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि डॉक्टर इस बात को भी चेक करते हैं कि प्लेटलेट्स कितने हैं, कितनी तेजी से कम हुए हैं, कोई लक्षण हैं या नहीं और इसके पीछे कारण क्या है।
प्लेटलेट काउंट कितना होना चाहिए?
Cleveland Clinic के अनुसार, अगर प्लेटलेट काउंट कम होता है, तो उसे थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया कहते हैं और ज्यादा होने पर थ्रॉम्बोसाइटोसिस माना जाता है।
- सामान्य प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर ब्लड में 1,50,000 से 4,00,000 प्लेटलेट्स होने चाहिए।
- कम प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर रक्त में 1,50,000 से कम प्लेटलेट्स हैं।
- ज्यादा प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर ब्लड में 4,50,000 से अधिक प्लेटलेट्स होना।
Dr. Ankur Nandan Varshney कहते हैं, “प्लेटलेट्स खून का थक्का बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं और चोट लगने पर ब्लीडिंग को रोकने में शरीर की मदद करते हैं। इसलिए इनकी संख्या कम होने पर शरीर में खून बहने का रिस्क बढ़ सकता है, लेकिन हर मरीज में यह खतरा एक जैसा नहीं होता।”
Platelet Count Drops Below fifty thousand
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प्लेटलेट्स कम होने के क्या कारण हो सकते हैं?
Dr. Ankur Nandan Varshney ने कहा, “वैसे तो प्लेटलेट्स कम होने के कई कारण हो सकते हैं और इसमें डेंगू जैसे वायरल इंफेक्शन या दवाओं का असर भी प्लेटलेट्स कम कर सकता है। कई बार शरीर का इम्यून सिस्टम ही गलती से प्लेटलेट्स को खत्म करने लगता है। इसे इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपीनिया (ITP) कहा जाता है। इसके अलावा, लिवर की बीमारी, बढ़ी हुई तिल्ली, विटामिन B12 या फोलेट की कमी और बोन मैरो से जुड़ी कुछ समस्याएं भी प्लेटलेट्स कम होने की वजह बन सकती हैं।”
उन्होंने बताया कि कई बार कैंसर के मरीजों में कीमोथेरेपी भी प्लेटलेट्स कम होने का कारण बन सकती है। कुछ मामलों में कैंसर का बोन मैरो तक फैलना भी प्लेटलेट्स कम होने से जुड़ा हो सकता है। इसलिए कम प्लेटलेट्स खुद कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर में चल रही बीमारियों का लक्षण हो सकता है। इसलिए प्लेटलेट्स बढ़ाने का इलाज शुरू करने से पहले इसके कारणों को जानना बहुत जरूरी है।
प्लेटलेट 50,000 से कम होने पर क्या करना चाहिए?
Dr. Ankur Nandan Varshney का कहना है, “मरीज को सबसे पहले प्लेटलेट्स कम देखकर घबराना बिल्कुल नहीं चाहिए, क्योंकि इसके कारणों को जानने के बाद प्लेटलेट्स बढ़ाए जा सकते हैं। मरीज को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।”
- अपनी रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाएं। अगर कोई खास लक्षण नहीं भी हैं, तब भी डॉक्टर ही आगे के चेकअप के बारे में बताएंगे।
- कई बार डॉक्टर दोबारा CBC टेस्ट कराने की सलाह भी दे सकते हैं। कुछ कंडीशंस में खून के सैंपल के अंदर प्लेटलेट्स आपस में चिपक जाते हैं और मशीन उनकी संख्या कम दिखा सकती है।
- इस दौरान अपनी तरफ से कोई दवा शुरू या बंद न करें। अगर कोई मरीज ब्लड थिनर या ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ाने वाली दवा ले रहा है, तो उसकी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
- किसी भी तरह के हर्बल प्रोडक्ट्स या घरेलू नुस्खे न अपनाएं।
- शराब बिल्कुल भी नहीं पीनी चाहिए।
- ऐसी एक्टिविटीज से दूर रहना चाहिए, जिनमें चोट लगने का डर हो।
- अगर प्लेटलेट्स किसी संक्रमण, दवा, इम्यून समस्या या दूसरी बीमारी की वजह से कम हुए हैं, तो इलाज भी उसी कारण के हिसाब से किया जाता है।
- इस बात का ध्यान रखें कि हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर जांच और बीमारी के अनुसार ही इलाज तय करते हैं।
प्लेटलेट 50,000 से कम होने पर कब चिंता करनी चाहिए?
Mayo Clinic के अनुसार, शरीर में प्लेटलेट्स कम होने पर अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
- स्किन या मुंह के अंदर नीले या बैंगनी धब्बे या दाने दिखना
- आसानी से खरोंच या नीले निशान पड़ना
- छोटे से कट से बहुत देर तक खून बहना
- मसूड़ों या नाक से खून बहना
- पेशाब या पॉटी से खून आना
- महिलाओं को हैवी पीरियड्स होना या लंबे समय तक ब्लीडिंग होना
डॉक्टर की सलाह
Dr. Ankur Nandan Varshney सलाह देते हैं कि अगर प्लेटलेट्स 50,000 से कम हो जाएं, तो इसके कारणों, लक्षणों और प्लेटलेट्स कम होने की गति को देखकर ही इलाज किया जाना चाहिए। इसके साथ मरीजों को किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे न आजमाने की सलाह दी जाती है। कई बार मरीज रिपोर्ट देखकर खुद ही फैसला कर लेते हैं कि उन्हें क्या करना है। ऐसा करने पर मरीज की कंडीशन गंभीर हो सकती है। इसलिए प्लेटलेट्स कम होने पर डॉक्टर की ही सलाह लेनी चाहिए।
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निष्कर्ष
प्लेटलेट्स काउंट कम होने पर मरीजों को अपने लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए और अगर किसी को डेंगू या वायरल इंफेक्शन है, तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। प्लेटलेट्स कम होने पर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर प्लेटलेट्स कम होने के कारणों को जानकर इसका इलाज कर सकते हैं।
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FAQ
क्या 50,000 से कम प्लेटलेट्स होने पर अस्पताल में भर्ती या प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन जरूरी है?
अगर प्लेटलेट्स तेजी से गिर रहे हों, एक्टिव ब्लीडिंग हो या डेंगू-मलेरिया जैसा गंभीर इंफेक्शन हो, तो अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है। प्लेटलेट्स 20,000 से कम होने या एक्टिव ब्लीडिंग पर प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन किया जाता है।क्या पेट या आंतों में अंदरूनी ब्लीडिंग का पता खुद लगाया जा सकता है?
अगर पॉटी का रंग गहरा काला या लाल हो या उल्टी में कॉफी के रंग के थक्के दिखें, तो यह आंतों या पेट में ब्लीडिंग का संकेत है। ऐसा होने पर तुरंत इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाएं।
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Oct 05, 2026 18:02 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Ankur Nandan Varshney
