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Medically Reviewed by Dr Akshay Chugh

चोट लगने के बाद कितने समय तक लग जाना चाहिए टिटनेस का इंजेक्शन? जानें डॉक्टर की राय

When To Get Tetanus Shot After Cut: चोट या कट लगने के बाद टिटनेस का इंजेक्शन जरूर लेना चाहिए, जानें चोट लगने के कितने समय के भीतर इसका शॉट लेना चाहिए?
चोट लगने के बाद कितने समय तक लग जाना चाहिए टिटनेस का इंजेक्शन? जानें डॉक्टर की रायचोट लगने के बाद कितने समय तक लग जाना चाहिए टिटनेस का इंजेक्शन? जानें डॉक्टर की राय

When To Get Tetanus Shot After Cut: चोट लगने या कट लग जाने पर हर व्यक्ति को टिटनेस का इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है। दरअसल लोहे या जंग लगे लोहे से चोट लगने पर टिटनेस का इंजेक्शन ना लगवाने से इन्फेक्शन का खतरा रहता है। टिटनेस दरअसल एक तरह की बैक्टीरियल बीमारी है और इस्किव वजह से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए हमेशा जंग लगे लोहे या किसी मेटल की वजह से चोट या कट लगने पर आपको डॉक्टर की सलाह लेकर टिटनेस का इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। अब सवाल यह उठता है कि चोट या कट लगने के कितने समय तक टिटनेस का इंजेक्शन लगवा सकते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में Dr. Akshay Chugh, Internal Medicine & Metabolic Disorders, Metro Hospital and Heart Institute, Noida से।

चोट लगने के कितने समय तक टिटनेस का इंजेक्शन लगवा सकते हैं?

डॉ. अक्षय चुग कहते हैं कि टिटनेस का इंजेक्शन शरीर में एक वैक्सीन की तरह से काम करता है इसलिए चोट या कट लगने के 24 से 48 घंटे के भीतर आपको टिटनेस का इंजेक्शन लगवा सकते हैं। सही समय पर इसे लगवाने से आपको संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। टिटनेस का संक्रमण आपके शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकता है, इसीलिए हमेशा किसी मेटल या जंग लगी चीज से चोट लगने पर तुरंत टिटनेस का इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा दूसरा डोज चोट लगने के चार हफ्ते बाद और फिर एक साल बाद इसका तीसरा डोज लगवा लेना चाहिए।

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टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लगाएंगे तो क्या होगा?

डॉ. अक्षय कहते हैं कि टिटनेस इंजेक्शन न लगवाने पर क्लॉस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) नामक बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यह नर्वस सिस्टम पर हमला कर सकते हैं। आमतौर पर इस इंफेक्शन के लक्षण 3 से 21 दिन के अंदर नजर आ सकते हैं।

टिटनेस का इंजेक्शन क्यों लगवाना चाहिए?

लोहे या जंग लगे मेटल से चोट लगने के बाद क्लॉस्ट्रीडियम टटेनाइ नामक बैक्टीरिया के संक्रमण से बचने के लिए टिटनेस वैक्सीन का शॉट लेना बहुत जरूरी होता है। यह इंजेक्शन घाव या चोट ठीक करने के लिए नहीं बल्कि शरीर को संक्रमण से बचाने के लिए लेना जरूरी होता है। अगर आप मेटल या जंग लगे लोहे से चोट लगने के बाद टिटनेस का इंजेक्शन नहीं लेते हैं, तो आपको बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा रहता है। यही कारण है कि डॉक्टर चोट लगने के बाद टिटनेस वैक्सीन का शॉट लेने की सलाह देते हैं।

टिटनेस (टेटनस) के लक्षण

टिटनेस का इन्फेक्शन क्लॉस्ट्रीडियम टटेनाइ नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। टिटनेस का इन्फेक्शन होने पर दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षण इस तरह से हैं

  • गले में दर्द और खाने-पीने में परेशानी
  • मांसपेशियों में जकड़न
  • जबड़े में खिंचाव
  • सांस लेने में परेशानी
  • मुंह खोलने में दिक्कत

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क्या हम बिना चोट के टिटनेस का इंजेक्शन ले सकते हैं?

हां, हम बिना चोट लगे भी टिटनेस का इंजेक्शन ले सकते हैं। आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को यह लगाई जाती है। अगर आप एक बार इसकी वैक्सीन ले लेते हैं तो लगभग 5 से 10 सालों तक शरीर में इसका असर रहता है।

क्या हर कट से टिटनेस होता है?

डॉ. चुग कहते हैं कि नहीं, हर कट से टिटनेस नहीं होता है। टिटनेस फैलने का खतरा खुले और गहरे घाव से ज्यादा होता है जो कि मिट्टी, धूल, और जानवरों के मल में मिलने वाले क्लोस्ट्रीडियम टिटानी (Clostridium tetani) नामक बैक्टीरिया से फैलता है।

किस प्रकार की चोट में ज्यादा होता है टिटनेस का खरता?

हर प्रकार की चोट में टिटनेस का खतरा नहीं होता है बल्कि, कील, कांटा, सुई या नुकीली जंग लगी लोहे की चीज से लगी चोट में टिटनेसा खतरा होता है। इसके अलावा गहरे खुले हुए घाव में टिटनेस का खतरा ज्यादा होता है। साथ ही, पानी या मवाद वाले घाव में भी टिटनेस का खतरा होता है। डॉ. चुग कहते हैं कि शरीर में कोई भी छोटा-मोटा कट लग जाए चाहे यह ब्लेड से ही क्यों न हो, टिटनेस का खतरा होता है।

टिटनेस का टीका है जरूरी

WHO के अनुसार, टिटनस से बचाव TTCV (टेटनस युक्त टीके) के जरिए किया जा सकता है। ये टीके दुनिया भर में नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों का हिस्सा हैं और कई देशों में गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली स्वास्थ्य देखभाल (antenatal care) के समय लगाए जाते हैं।

जीवन भर सुरक्षा पाने के लिए, WHO की सलाह है कि एक व्यक्ति को TTCV की कुल 6 खुराकें जिसमें 3 प्राथमिक खुराकें और 3 बूस्टर डोज लेनी चाहिए। 

  • 3 प्राथमिक खुराकों की शुरुआत 6 सप्ताह की उम्र से की जानी चाहिए और इसके बाद की खुराकें कम से कम 4 सप्ताह के अंतराल पर दी जानी चाहिए।
  • 3 बूस्टर खुराकें जीवन के दूसरे वर्ष यानी 12-23 महीने, 4-7 वर्ष की उम्र में और 9-15 वर्ष की उम्र में दी जानी चाहिए। 
  • बूस्टर खुराकों के बीच कम से कम 4 साल का अंतर होना चाहिए।

निष्कर्ष:

अंत में डॉ. चुग कहते हैं कि चोट चाहे छोटी हो या बड़ी, यहां तक कि जानवर के काटने और जलने पर भी टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना चाहिए इसलिए सतर्क रहें और चोट को नजरअंदाज न करें नहीं तो आप इस संक्रमण के शिकार हो सकते हैं।

FAQ

  • क्या टेटनस ठीक हो सकता है?

    टिटनेस, सही समय पर सही मेडिकल इलाज से ठीक हो सकता है। हालांकि, एक बार यह बीमारी विकसित हो जाए तो नर्वस सिस्रट तक पहुंच सकती है और दिक्कत बढ़ सकती है।
  • टेटनस का इंजेक्शन कहां लगाया जाता है?

    ये इंजेक्शन डेल्टॉइड मांसपेशी में त्वचा के नीचे लगाया जाता है खासकर कि कंधे के पास या जांघ में लगाया जाता है। कुछ स्थितियों में कूल्हे की मांसपेशी में भी लगाया जाता है। 

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जागरण न्यू मीडिया में (Only MyHealth) में बतौर सब एडिटर काम कर रहे प्रिंस को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 5 सालों से अधिक काम करने का अनुभव है। बतौर पत्रकार प्रिंस ने त्रिपुरा, नागालैंड सही पूर्वोत्तर के राज्यों में राजनीति, महिला सुरक्षा और हेल्थ जैसे मुद्दों पर रिपोर्टिंग भी की है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ रखने वाले प्रिंस ने देश के विभिन्न राज्यों में चुनावी कवरेज भी की है। प्रिंस को हेल्थ, पब्लिक पॉलिसी, राजनीति, क्राइम, फैक्ट चेक और डेटा स्टोरी समेत कई विषयों पर रिपोर्टिंग और लिखने की अच्छी समझ है। प्रिंस ने कमला नेहरु संस्थान से ग्रेजुएशन और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है।

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    Oct 23, 2026 10:41 IST

    Modified By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Dr Akshay Chugh
  • Oct 14, 2022 19:00 IST

    Published By : Prins Bahadur Singh