प्रेग्नेंसी में डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आमतौर पर, महिलाएं प्रेग्नेंसी के आखिरी तिमाही में अधिक सावधानी बरतती हैं, जबकि प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही सजग रहना चाहिए। खासकर, डाइट को लेकर जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ज्यादातर महिलाओं को नहीं पता होता है कि प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। अगर आपको भी इस तरह की कशमकश हो रही है, तो परेशान न हों। यहां वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता आपको बता रही हैं प्रेग्नेंसी के पहले महीने में क्या खाएं और किन चीजों से परहेज करें।
प्रेग्नेंसी के पहले महीने में क्या खाएं?
-1786614086196.webp)
विशेषज्ञों की मानें, तो प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीने में मिसकैरेज का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इसलिए, इस समय खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि इस तरह के रिस्क को कम किया जा सके-
1. फॉलिक एसिड युक्त चीजें खाएं
प्रेग्नेंसी के पहले महीने में महिलाओं को फॉलिक एसिड का सेवन करना चाहिए और यह बहुत जरूरी भी है। डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "फॉलिक एसिड विटामिन बी9 का ही एक रूप होता है, जो कि शिशु के न्यूरल ट्यूब को बनाने में मदद करता है। इसकी मदद से आगे चलकर शिशु का दिमाग और रीढ़ की हड्डी बनती हैं।" CDC के अनुसार, प्रेग्नेंसी के शुरुआती 28 दिनों के अंदर इसका सेवन करने से शिशु को भविष्य में जन्मजात बीमारियों से बचाया जा सकता है।
डाॅ. शोभा गुप्ता आगे सलाह देती हैं, "फॉलिक एसिड की कमी को पूरा करने के लिए प्रेग्नेंसी के पहले महीने में महिलाएं ब्रोकली, पालक, बीन्स और सिट्रस फल आदि खाएं।"
2. साबुत अनाज करें डाइट में शामिल
The American Journal of Clinical Nutrition के अनुसार, प्रेग्नेंसी की पहले महीने में साबुत अनाज खाना भी महिलाओं के लिए बहुत जरूरी होता है। साबुत अनाज कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है, जैसे विटामिन-बी, आयरन और फाइबर। ये पोषक तत्व प्रेग्नेंसी में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखते हैं, शुरुआती प्रेग्नेंसी में होने वाली कब्ज से बचाते हैं और शरीर को लगातार ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
डाॅ. शोभा गुप्ता के अनुसार, "प्रेग्नेंसी की शुरुआत से ही महिला थकान, कमजोरी, उल्टी आदि समस्याओं से दो-चार होती हैं। साथ ही, खान-पान में बदलाव के कारण कब्ज जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में साबुत अनाज, जैसे रोटी, ओट्स और मल्टीग्रेन आटे को डाइट का हिस्सा बनाने से कब्ज जैसी परेशानियां कम होती हैं।’ यही नहीं, साबुत अनाज की मदद से गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों और टिश्यूज के शुरुआती विकास में भी बहुत मदद मिलती है।"
3. प्रोटीन युक्त चीजें का सेवन करें
-1786614161217.webp)
गर्भावस्था और गर्भ में पल रहे शिशु, दोनों के लिए प्रोटीन जरूरी पोषक तत्व है। इस पोषक तत्व की मदद से टिश्यूज बनाने, कोशिकाओं के तेजी से विकास, गर्भवती महिला के शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने और बच्चे के अंगों, मांसपेशियों व हड्डियों के निर्माण बुनियादी तौर पर मदद मिलती है।
डाॅ. शोभा गुप्ता के शब्दों में, "प्रोटीन इतना जरूरी पोषक तत्व है कि यह न सिर्फ शिशु की हड्डियां और मांसपेशियों के विकास में मदद करता है, बल्कि हार्मोन्स और एंजाइम्स के उत्पादन को भी बढ़ावा देता है। दरअसल, प्रोटीन से मिलने वाले अमीनो एसिड बच्चे की कोशिकाओं के तेजी से विकास और प्लासेंटा के निर्माण के लिए भी बहुत जरूरी होते हैं। इसकी कमी को पूरा करने के लिए दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स जैसे दूध, दही, पनीर, चिकन और अच्छी तरह के पके हुए अंडे का सेवन कर सकते हैं।"
4. हेल्दी फैट को न करें नजरअंदाज
अक्सर महिलाएं फैट लेने से बचती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के पहले महीने में आप यह गलती बिल्कुल न करें। प्रेग्नेंसी के पहले महीने में हेल्दी फैट्स बहुत जरूरी होते हैं। इसकी मदद से बच्चे के दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नर्वस सिस्टम का निर्माण होता है।
डाॅ. शोभा गुप्ता बताती हैं, "हेल्दी फैट्स आपके शरीर को जरूरी विटामिन्स को अवशोषित करने में मदद करते हैं, शुरुआती प्रेग्नेंसी के हार्मोन्स को संतुलित रखते हैं और थकान से बचाकर महिला को लगातार एनर्जेटिक बनाए रखते हैं। हेल्दी फैट्स के लिए आप भीगे हुए बादाम, अखरोट और मौसमी फल का सेवन कर सकते हैं।"
प्रेग्नेंसी के पहले महीने में किन चीजों का सेवन न करें?
- डाॅ. शोभा गुप्ता सलाह देती हैं कि प्रेग्नेंसी के पहले महीने में भूलकर भी अधपकी चीजों का सेवन न करें। विशेषकर, नाॅन-वेज महिलाएं इसका ध्यान रखें। उन्हें कच्चे अंडे, अधपके मीट, सीफूड आदि से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। इस तरह की चीजों से बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है, जो कि शिशु के विकास को बाधित कर सकता है।
- University of Bristol के अनुसार गर्भवती महिलाओं को हाई मर्करी वाली मछलियों का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि, संतुलित मात्रा में मछली खाना शिशु के विकास के लिए सही होता है। वहीं, अधिक मात्रा वाली मर्करी युक्त मछलियों की बात करें, तो इसका सेवन करने से मर्करी खून में घुल जाती है, जिससे वह प्लेसेंटा के जरिए शिशु तक पहुंच सकती है। इससे शिशु के ब्रेन डेवेलपमेंट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
- प्रेग्नेंट महिलाओं को अनपाश्चराइज्ड डेयरी प्रोडक्ट से भी दूर रहना चाहिए। इसका मतलब है कि पहले महीने में बिना उबला हुआ दूध और उससे बनी चीजें नहीं खानी चाहिए।
- कच्चे खाद्य पदार्थों में लिस्टिरिया, साल्मोनेला और ई. कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं, जिससे महिला को गंभीर फूड पॉइजनिंग हो सकती है। यह शुरुआती प्रेग्नेंसी के लिए बिल्कुल सही नहीं है। इससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
- प्रेग्नेंसी के पहले महीने में कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थों और शराब, तंबाकू या नशीली दवाओं से भी पूरी तरह दूर रहना चाहिए। इससे शिशु के मुख्य अंगों, दिमाग और रीढ़ की हड्डी का निर्माण बाधित होता है।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं क्या खा रही हैं और क्या नहीं, उन्हें बात पर विशेष ध्यान देना चाहिए। प्रेग्नेंसी के शुरुआती में भ्रूण की संरचना तैयार होती है। इसलिए, इन दिनों महिला जो भी चीज खाती है, उसका सीधा-सीधा असर शिशु के विकास पर पड़ता है। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी के पहले महीने में आप क्या खा रहे हैं और क्या नहीं, उसको लेकर जरा भी लापरवाही न करें। अगर स्वास्थ्य में जरा उतार-चढ़ाव हो, किसी चीज के खाने से तबियत बिगड़ती हो, तो तुरंत डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या प्रेग्नेंसी के पहले महीने में फास्ट फूड खा सकते हैं?
पहले महीने में प्रिजर्वेटिव्स, अत्यधिक मात्रा में सोडियम और आर्टिफिशियल फ्लेवर वाले जंक फूड बिलकुल नहीं खाने चाहिए।क्या प्रेग्नेंसी के पहले महीने में मॉर्निंग सिकनेस होने पर खाना-पीना पूरी तरह छोड़ देना चाहिए?
नहीं, ऐसा किया जाना प्रेग्नेंट महिला और गर्भस्थ शिशु के लिए सही नहीं है। अगर मॉर्निंग सिकनेस हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर डाइट में बदलाव कर सकते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 13, 2026 15:15 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta