महिलाएं प्रेग्नेंसी के पहले महीने से लेकर आखिरी महीने तक सामान्य होती है और डॉक्टर भी उनकी कंडीशन को देखते हुए नॉर्मल डिलीवरी कराने की सलाह देते हैं, लेकिन लेबर के दौरान महिलाओं की इमरजेंसी में सर्जरी करने की जरूरत पड़ सकती है। इस बारे में Dr. Monica Aggarwal, Associate Director- Department of Obstetrics and Gynecology at Cloudnine Group of Hospitals, Chandigarh बताती हैं कि कई बार प्रसव के दौरान मां या शिशु की स्थिति में ऐसा बदलाव आता है, जिसकी वजह से डॉक्टरों को डिलीवरी का तरीका बदलने का फैसला लेना पड़ सकता है। उस समय डॉक्टर मां और शिशु, दोनों को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं।
नॉर्मल डिलीवरी के समय इमरजेंसी सर्जरी करने के 5 कारण
March of Dimes के मुताबिक, अगर महिलाओं के लेबर का प्रोसेस बहुत धीमा हो जाता है, शिशु का वजन और आकार सामान्य से ज्यादा हो, शिशु जन्म के लिए सिर नीचे वाली पॉजीशन में न हो, गर्भनाल दब जाए या शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिले, तो सर्जरी कराने की जरूरत पड़ सकती है।
Dr. Monica Aggarwal ने बताया कि लेबर के दौरान डॉक्टर कई अलग-अलग फैक्टर्स को देखते हुए सर्जरी का फैसला लेते हैं।
1. बच्चे की हार्ट रेट सामान्य न होना
Dr. Monica Aggarwal कहती हैं, “इमरजेंसी सी-सेक्शन की जरूरत पड़ने का सबसे महत्वपूर्ण कारण शिशु की हार्ट रेट का असामान्य होना हो सकता है। जब महिला को लेबर शुरू होता है, तो शिशु की हार्ट रेट को चेक किया जाता है। अगर मॉनिटरिंग के दौरान डॉक्टर को महसूस होता है कि शिशु को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है और स्थिति में सुधार नहीं हो रहा, तो डॉक्टर इमरजेंसी में सर्जरी का फैसला ले सकते हैं, क्योंकि नॉर्मल डिलीवरी को जारी रखना रिस्की हो सकता है।”
2. लेबर आगे न बढ़े
Dr. Monica Aggarwal ने कहा, “कुछ मामलों में देखा गया है कि लेबर शुरू होने के बाद डिलीवरी में जरूरत से ज्यादा समय लगने लगता है। अगर संकुचन होने के बावजूद सर्विक्स का मुंह न खुले या शिशु नीचे की ओर न बढ़ रहा हो, तो ऐसे में डॉक्टर महिला की कंडीशन चेक करते हैं। अगर यही स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो मां और शिशु को सुरक्षित रखने के लिए डिलीवरी के तरीके को बदला भी जा सकता है।”
3. शिशु की पोजीशन में बदलाव
Dr. Monica Aggarwal ने बताया कि कुछ मामलों में शिशु की पोजीशन आखिर में आकर बदल सकती है। इसमें शिशु की ब्रीच पोजीशन में हो सकता है यानी सिर नीचे होने के बजाय दूसरी दिशा में हो सकता है। ऐसी स्थिति में नॉर्मल डिलीवरी कराने पर शिशु का कंधा फंसने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी इमरजेंसी से बचाव के लिए डॉक्टर इन मामलों में सी-सेक्शन कराने की सलाह दे सकते हैं।
4. अचानक ज्यादा ब्लीडिंग होना
Dr. Monica Aggarwal ने कहा, “कुछ मामलों में लेबर के दौरान अचानक तेज ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। ऐसी स्थिति में प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याओं का रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसमें मां और शिशु दोनों के लिए इमरजेंसी की स्थिति हो सकती है। ऐसे केस में डॉक्टर जल्द डिलीवरी कराने का फैसला लेते हैं और सी-सेक्शन कर सकते हैं।”
5. गर्भनाल का नीचे आना
Dr. Monica Aggarwal के अनुसार, महिला की पूरी प्रेग्नेंसी सामान्य रहती है, लेकिन डिलीवरी से पहले कभी-कभी गर्भनाल दब सकती है या शिशु से पहले नीचे की ओर आ जाती है। यह इमरजेंसी की स्थिति हो सकती है, क्योंकि इस कंडीशन में शिशु को ऑक्सीजन मिलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे मामले में समय पर डिलीवरी कराना जरूरी हो जाता है।
Emergency C-Section During Vaginal Labour
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6. शिशु का गर्भ में पॉटी करना
Dr. Monica Aggarwal कहती हैं, “कभी-कभी शिशु गर्भ में ही पॉटी यानी मेकोनियम पास कर देता है। ऐसी स्थिति में शिशु के आस-पास के फ्लूड में मेकोनियम मिल जाता है और शिशु के सांस लेने के दौरान फेफड़ों में जाने की संभावना बढ़ सकती है। इस कंडीशन में लेबर के दौरान इमरजेंसी सी-सेक्शन करने की जरूरत पड़ सकती है।”
डॉक्टर की सलाह
Dr. Monica Aggarwal सलाह देते हुए कहती हैं कि लेबर में दर्द ज्यादा होना या प्रसव की प्रक्रिया का थोड़ा लंबा होने से सर्जरी होने की वजह नहीं होती। डॉक्टर हमेशा शिशु और मां दोनो की मेडिकल कंडीशन और अन्य दिक्कतों को देखते हुए ही सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर के लिए लेबर के दौरान मां और शिशु की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है, इसलिए कई बार कंडीशन को देखते हुए डिलीवरी के प्रोसेस में बदलाव हो सकता है।
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निष्कर्ष
नॉर्मल डिलीवरी या सी-सेक्शन जैसे फैसले हमेशा मां और शिशु की हेल्थ और सेफ्टी को देखकर ही लिया जाता है। अगर किसी महिला को ब्लीडिंग ज्यादा होने लगे, गर्भनाल फंस जाए या शिशु पॉटी कर दे, तो तुरंत डिलीवरी कराने की सलाह दी जाती है।
FAQ
नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश के दौरान इमरजेंसी सी-सेक्शन की तैयारी में कितना समय लगता है?
आधुनिक अस्पतालों में डिसीजन टू डिलीवरी टाइम 0 मिनट से भी कम होता है। जैसे ही डॉक्टर फीटल डिस्ट्रेस या ब्लीडिंग जैसी इमरजेंसी देखते हैं, मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट करके एनेस्थीसिया दिया जाता है।नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश के दौरान शोल्डर डिस्टोसिया क्या है और इसमें क्या करना पड़ता है?
जब बच्चे का सिर तो बाहर आ जाता है लेकिन उसके कंधे मां की पेल्विक हड्डी में फंस जाते हैं, तो इसे शोल्डर डिस्टोसिया कहते हैं। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें डॉक्टर तुरंत खास पेल्विक पोजीशन बदलते हैं या इमरजेंसी सर्जरी का फैसला लेते हैं।
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Sep 23, 2026 12:06 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Monica Agarwal
