When Dental Cap Is Necessary: अगर दांत में दरार है या दांत टूट रहा है, तो कैप लगाई जा सकती है, अगर दांत में सड़न हो और वह सड़न फिलिंग से ठीक न हो, तो डेंटल कैप या क्राउन की मदद ली जाती है। क्राउन की मदद से डैमेज हुए दांत को निकालने से बचाया जा सकता है और कैप लगने के बाद वह दांत खाने और चबाने लायक बन जाता है। इससे दांत की उम्र भी बढ़ जाती है। कई बार फिलिंग के कारण दांत कमजोर हो जाते हैं और डैमेज होने का खतरा देखते हुए डेंटिस्ट क्राउन लगाने की सलाह देते हैं। रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद दांत को सुरक्षित रखने के लिए भी डेंटल क्राउन लगाया जा सकता है। आइए समझते हैं क्राउन का महत्व और उसे लगाने की प्रक्रिया। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Suman Yadav, Dentist, Oral And Maxillofacial Surgeon At Numed Super Speciality Hospital, Greater Noida से बात की।
MedlinePlus के मुताबिक, डेंटल क्राउन दांत के आकार की एक कैप होती है, जो मसूड़ों की सतह के ऊपर प्राकृतिक दांत के दिखाई देने वाले हिस्से को ढकती है। कमजोर दांत को सहारा देने, उसे टूटने से बचाने या उसकी दिखावट को बेहतर बनाने के लिए डेंटल क्राउन लगवाने की जरूरत पड़ सकती है। डेंटल क्राउन की मदद से डेंटल ब्रिज को सहारा मिलता है, कमजोर दांत को टूटने से बचा सकते हैं, दांत की बनावट सुधर जाती है।
Mayo Clinic के मुताबिक, जो लेटेस्ट मशीन हैं उनकी मदद से एक ही दिन में दांतों पर क्राउन लगाने की प्रक्रिया को पूरा करना संभव हो गया है। इससे मरीजों को बार-बार डेंटिस्ट के पास आने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, फिलहाल सीमित जगहों पर ही ये मशीनें मौजूद हैं लेकिन भविष्य में इससे इलाज और आसान होने की उम्मीद है।
दांत में कैप कब लगती है?
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1. जब दांत टूट जाए
अगर दांत में दरार है या दांत आधा टूट गया है, तो इंफेक्शन का खतरा रहता है। इससे खाने के छोटे कण दांत में सड़न पैदा कर सकते हैं। दरार या गैप के जरिए बैक्टीरिया दांत के पल्प तक पहुंच सकते हैं और इंफेक्शन फैला सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर दांत को बचाने के लिए क्राउन लगाने की सलाह देते हैं।
2. दांत की दिखावट सुधाने के लिए कैप लगाया जाता है
जब दांत टेढ़े-मेढ़े हों और उसकी बनावट सही न दिखे, तो भी दांत पर कैप या क्राउन लगाने की जरूरत पड़ सकती है। अगर दांत ज्यादा डैमेज हो गया है, तो डेंटिस्ट क्राउन की जगह इंप्लांट लगाने की सलाह भी दे सकते हैं।
3. दांत में सड़न होने पर
अगर दांत में सड़न के कारण ज्यादा नुकसान हो गया हो और फिलिंग से भी दांत को सुरक्षा न मिले, तो दांत को साफ करके उस पर क्राउन लगाया जाता है।
4. जब फिलिंग असरदार न हो
अगर दांत में सड़न के बाद की गई फिलिंग असरदार न हो और दांत को लगातार नुकसान हो, तो भी डॉक्टर क्राउन लगाने की सलाह दे सकते हैं क्योंकि फिलिंग खराब होने से भविष्य में दांत के कमजोर होने या टूटने का खतरा बना रहता है। क्राउन की मदद से दांत को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
5. रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद क्राउन क्यों जरूरी है?
रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद दांत को सुरक्षित रखने के लिए डेंटल क्राउन लगाया जा सकता है। रूट कैनाल आमतौर पर तब किया जाता है, जब दांत में गंभीर सड़न के कारण इंफेक्शन हो जाए या दांत के पल्प को इंफेक्शन नुकसान पहुंचे। इलाज के बाद दांत को दोबारा चोट से बचाने के लिए उस पर क्राउन लगाया जा सकता है।
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डेंटल क्राउन के मुख्य प्रकार
1. मेटल क्राउन
ये डेंटल धातुओं से बनाए जाते हैं। ये मजबूत और टिकाऊ होते हैं, इसलिए अक्सर पीछे की दाढ़ों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
2. सिरेमिक क्राउन
इनका रंग प्राकृतिक दांतों जैसा होता है इसलिए सामने के दांतों के लिए इन्हें पसंद किया जा सकता है।
3. मेटल सिरेमिक क्राउन
इनमें अंदर की तरफ धातु और बाहर दांतों के रंग की पोर्सिलेन की परत होती है। ये मजबूत और प्राकृतिक दिखते हैं।
4. जिरकोनिया क्राउन
ये एक मजबूत प्रकार के सिरेमिक से बने क्राउन होते हैं। इनका इस्तेमाल आगे और पीछे, दोनों तरह के दांतों पर किया जा सकता है।
5. कंपोजिट रेजिन क्राउन
ये दांतों के रंग की रेजिन सामग्री से बनाए जाते हैं। इनकी शुरुआती लागत कुछ दूसरे विकल्पों से कम हो सकती है, लेकिन इनमें समय के साथ घिसने, रंग बदलने या टूटने की आशंका ज्यादा हो सकती है।
सही क्राउन का चुनाव दांत की स्थिति, मसूड़ों के स्वास्थ्य और बजट के आधार पर डेंटिस्ट तय करके आपको बता सकते हैं।
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डेंटल क्राउन लगवाने की प्रक्रिया
- डेंटल क्राउन लगाने के लिए डॉक्टर सबसे पहले दांत और मसूड़ों की जांच करते हैं।
- एक्स-रे से दांत की स्थिति देखी जाती है।
- एनेस्थीसिया देकर दांत के बाहरी हिस्से को जरूरत के मुताबिक आकार दिया जाता है ताकि क्राउन फिट हो जाए।
- दांत की छाप या डिजिटल स्कैन लिया जाता है। इसके आधार पर क्राउन तैयार किया जाता है।
- क्राउन तैयार होने पर उसे डेंटल सीमेंट से चिपका दिया जाता है।
- अगर क्राउन तुरंत तैयार नहीं है, तो दांत की सुरक्षा के लिए अस्थायी क्राउन लगाया जा सकता है।
क्राउन को लंबे समय तक ठीक रखने के लिए देखभाल कैसे करें?
- दिन में दो बार दांत साफ करें। क्राउन और मसूड़ों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।
- क्राउन के आस-पास और दांतों के बीच फंसे भोजन और प्लाक को हटाने के लिए रोज फ्लॉस करें।
- कठोर चीजें चबाने से बचें। बर्फ, बहुत कठोर कैंडी और दूसरी सख्त चीजों को दांतों से तोड़ने से बचें। इससे क्राउन डैमेज हो सकता है।
- दांतों से पैकेट न खोलें। पैकेट, बोतल के ढक्कन या अन्य चीजें खोलने के लिए दांतों का इस्तेमाल न करें।
- डेंटिस्ट की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराएं, ताकि क्राउन की फिटिंग, मसूड़ों और उसके नीचे मौजूद दांत की स्थिति का पता चलता रहे।
निष्कर्ष:
कई स्थितियों में डेंटिस्ट दांत पर क्राउन या कैप लगाने की सलाह देते हैं जैसे- दांत में दरार होने पर, दांत खराब होने पर, दांत टूट जाने पर, फिलिंग खराब होने पर, रूट कैनाल ट्रीटमेंट के बाद वगैरह। दांत की बनावट सुधारने के लिए कैप लगाने की सलाह दी जाती है। क्राउन के मुताबिक दांत को बाहर से आकार दिया जाता है और क्राउन को तैयार करके डेंटल सीमेंट की मदद से दांत पर चिपका दिया जाता है। कई तरह के डेंटल क्राउन लगाए जाते हैं। जैसे- मेटल क्राउन जो डेंटल धातुओं से बनता है, सिरेमिक क्राउन जो दांतों के प्राकृतिक रंग जैसा दिखता है, मेटल सिरेमिक क्राउन पर पोर्सिलेन की परत होती है और अंदर धातु का इस्तेमाल होता है, जिरकोनिया, सिरेमिक से बने मजबूत क्राउन होते हैं और कंपोजिट रेजिन क्राउन, रेजिन से बने होते हैं इसलिए सस्ते होते हैं, लेकिन ये जल्दी खराब हो सकते हैं।
image credit: magnific
FAQ
डेंटल क्राउन और डेंटल इंप्लांट में क्या अंतर है?
डेंटल क्राउन दांत के ऊपर लगाया जाने वाला कैप है, जबकि डेंटल इंप्लांट जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है। इंप्लांट के ऊपर भी क्राउन लगाया जा सकता है। प्राकृतिक दांत मौजूद होने पर क्राउन सीधे उस दांत पर लगाया जाता है।डेंटल क्राउन कितने साल तक चलता है?
डेंटल क्राउन 5 से 15 साल तक चल सकता है। अच्छी देखभाल के साथ कुछ क्राउन इससे ज्यादा समय तक भी ठीक रहते हैं।
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Oct 16, 2026 13:52 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Suman Yadav
