Wed Oct 14, 2026 | 06:17 PM IST

Medically Reviewed by Dr Suman Yadav , Dentist and Oral & Maxillofacial Surgeon Numed Super Speciality Hospital, Greater Noida

दांत में कीड़ा लगने पर क्या हमेशा उसे निकलवाना जरूरी होता है? दंत रोग व‍िशेषज्ञ से जानें

दांत न‍िकलवाने का नाम सुनकर ही लोगों को डर लगने लगता है, लेक‍िन कई बार दांत में कैव‍िटी होने पर यह जरूरी हो जाता है, लेक‍िन क्‍या हमेशा कैव‍िटी होने पर दांत न‍िकलवाना जरूरी है? डॉक्‍टर से जानें सच। 
दांत में कीड़ा लगने पर क्या हमेशा उसे निकलवाना जरूरी होता है? दंत रोग व‍िशेषज्ञ से जानेंदांत में कीड़ा लगने पर क्या हमेशा उसे निकलवाना जरूरी होता है? दंत रोग व‍िशेषज्ञ से जानें

कई लोगों को लगता है क‍ि दांत में कीड़ा लगने पर या कैव‍िटी होने पर दांत न‍िकलवाना ही पड़ेगा, लेक‍िन ऐसा नहीं है। अगर दांत में सड़न है, तो यह जरूरी नहीं है क‍ि हर बार दांत को न‍िकलवाना ही पड़ेगा। सही समय पर इलाज करके दांत को सड़न से बचाया जा सकता है। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं, जो दांतों की सबसे बाहरी परत यानी इनेमल को नुकसान पहुंचाता है। धीरे-धीरे दांत की ऊपरी परत कमजोर होने लगती है और उसमें छेद हो सकता है। इसी स्थिति को दांतों में सड़न या कैविटी कहा जाता है। आइए जानते हैं क‍ि आख‍िर दांतों में सड़न का इलाज क्‍या है और दांत न‍िकलवाने की जरूरत कब पड़ सकती है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Suman Yadav, Dentist, Oral And Maxillofacial Surgeon At Numed Super Speciality Hospital, Greater Noida से बात की।

दांत में कैव‍िटी का इलाज क्‍या है?

दांत में कैव‍िटी की स्‍थि‍ति‍  डेंटल ट्रीटमेंट

जब सड़न दांत की नस तक नहीं पहुंची हो

फि‍ल‍िंग
जब सड़न दांत की नस तक पहुंच जाए       रूट कैनाल ट्रीटमेंट
जब दांत में बहुत ज्यादा सड़न हो जाए और दांत का बड़ा ह‍िस्‍सा डैमेज हो जाए   दांत न‍िकलवाना पड़ सकता है
जब सड़न हो और दांत कमजोर हो   क्राउन

दांतों में सड़न कितनी गहरी है और दांत के किस हिस्से तक पहुंची है, इसके आधार पर इलाज किया जाता है। दांतों की जांच करने के बाद डेंटिस्ट तय करते हैं कि किस उपचार की जरूरत है? दांतों में सड़न होने पर ये तीन स्‍थि‍त‍ि हो सकती है-

1. फ‍िल‍िंग की मदद कब ली जाती है?

अगर दांतों में सड़न शुरुआती स्‍टेज में है और दांत के अंदर मौजूद नसों वाले हिस्से तक नहीं पहुंची है, तो दांत को बचाना आसान होता है। ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट दांत के खराब हुए हिस्से को साफ करते हैं। इसके बाद दांत में बने खाली हिस्से को फिलिंग करके भर दिया जाता है।

2. क्राउन की जरूरत कब होती है?

अगर दांत में बहुत ज्यादा सड़न हो गई है या वह कमजोर हो गया है, तो क्राउन लगाने की जरूरत पड़ सकती है। क्राउन एक खास तरह का कृत्रिम कवर होता है, जो दांत के ऊपर लगाया जाता है और उसके प्राकृतिक ऊपरी हिस्से को ढक लेता है।

Mayo Clinic के मुताब‍िक, क्राउन दांत को मजबूती देने और उसके टूटने का खतरा कम करने में मदद करता है। इसे लगाने से पहले डेंटिस्ट दांत के सड़े हुए हिस्से को हटाते हैं और क्राउन को सही तरीके से फिट करने के लिए दांत को तैयार करते हैं। क्राउन सोना, मजबूत पोर्सिलेन मटेर‍ियल, रेजिन या धातु पर पोर्सिलेन की परत चढ़ाकर बनाई गई सामग्री से तैयार किया जा सकता है।

3. रूट कैनाल ट्रीटमेंट की जरूरत कब होती है?

  • जब दांतों की सड़न अंदर मौजूद पल्प (Pulp) तक पहुंच जाती है, तो समस्या गंभीर हो सकती है।
  • पल्प दांत का अंदरूनी हिस्सा होता है, जिसमें नसें और ब्‍लड वेसल्‍स मौजूद होती हैं।
  • जब सड़न इस हिस्से तक पहुंचती है, तो दर्द और इंफेक्‍शन हो सकता है।
  • ऐसी स्थिति में केवल सामान्य फिलिंग करना पर्याप्त नहीं होता। डेंटिस्ट रूट कैनाल ट्रीटमेंट की सलाह दे सकते हैं।
  • इस प्रक्रिया में दांत के अंदर से डैमेज हुए पल्प को हटाकर अंदरूनी हिस्से को साफ किया जाता है और फिर उसे भर द‍िया जाता है।

4. दांत कब न‍िकलवाना पड़ सकता है?

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  • अगर दांत की सड़न बहुत ज्यादा बढ़ गई है और दांत का बड़ा हिस्सा टूट या डैमेज हो चुका है, तो उसे बचाना मुश्किल हो सकता है।
  • रूट कैनाल के बाद दांत को ठीक से मजबूत बनाने और उस पर फिलिंग या क्राउन लगाने के लिए पर्याप्त स्वस्थ दांत का हिस्सा बचा होना जरूरी होता है।
  • अगर दांत का ज्यादातर हिस्सा डैमेज हो चुका है और उसे दोबारा मजबूत बनाना संभव नहीं है, तो डेंटिस्ट दांत निकलवाने की सलाह दे सकते हैं।
  • हालांकि, दांत निकालने का फैसला जांच के बाद ही किया जाना चाहिए। कुछ गंभीर मामलों में भी विशेषज्ञ दांत बचाने के विकल्पों पर व‍िचार भी करते हैं।
  • अक्ल दाढ़ अगर टेढ़ी निकले, मसूड़े में फंसी रहे या उसके कारण बार-बार संक्रमण, दर्द और आस-पास के दांतों को नुकसान हो, तो उसे निकालने की जरूरत पड़ सकती है।

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समय पर इलाज करवाकर दांत को बचा सकते हैं

  • दांतों में सड़नहोने पर समय पर इलाज कराना बहुत जरूरी है। शुरुआती अवस्था में समस्या का पता चलने पर इलाज आसान हो सकता है और दांत न‍िकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
  • अगर सड़न बढ़ती जाती है, तो दांत की अंदरूनी परतों तक इंफेक्‍शन पहुंच सकता है। इससे दर्द बढ़ने और रूट कैनाल जैसे इलाज की जरूरत पड़ती है। गंभीर स्थिति में दांत भी निकलवाना पड़ सकता है।

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दांत न‍िकलवाने के बाद डेंटल इंप्‍लांट, ब्रिज और डेंचर के व‍िकल्‍प हैं

अगर किसी कारण से दांत निकलवाना पड़े, तो दांत की जगह को भरने के लिए डेंटल इंप्‍लांट, ब्रिज और डेंचर जैसे विकल्प उपलब्ध हैं। डेंटिस्ट व्यक्ति की स्थिति के अनुसार सही विकल्प चुनने में मदद कर सकते हैं-

1. डेंटल इंप्‍लांट

डेंटल इम्प्लांट एक कृत्रिम दांत लगाने का तरीका है। एक या उससे ज्यादा दांत न‍िकल गए हों, तो डॉक्‍टर डेंटल इंप्‍लांट कराने की सलाह देते हैं। यह प्राकृतिक दांत जैसा दिख सकता है और चबाने में मदद करता है।

2. डेंटल ब्रिज

डेंटल ब्रिज में गायब दांत की जगह कृत्रिम दांत लगाया जाता है। इसे आमतौर पर खाली जगह के दोनों ओर मौजूद दांतों के सहारे लगाया जाता है। इसके लिए सहारा देने वाले दांतों को कुछ हद तक घिसकर उन पर क्राउन लगाए जा सकते हैं। यह खाली जगह को भरता है और चबाने में मदद कर सकता है।

3. डेंचर

डेंचर कृत्रिम दांतों का ऐसा सेट होता है, जिसे मुंह से निकाला और दोबारा लगाया जा सकता है। यह दो प्रकार का होता है पार्शियल डेंचर, जिसमें कुछ गायब दांतों की जगह भरी जाती है, और फुल डेंचर, जिसमें ऊपर या नीचे के सभी दांतों की जगह कृत्रिम दांत लगाए जाते हैं। यह तब इस्‍तेमाल क‍िया जाता है जब कई दांत या सभी दांत गायब हों।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

दांत में दर्द, सूजन, कैविटी या सड़न होने पर इलाज में देरी न करें और तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। सही समय पर डेंटिस्ट से जांच कराने से दांत को बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

दांत में कीड़ा लगने पर हमेशा दांत न‍िकलवाने की जरूरत नहीं होती है। जब सड़न दांत की नस तक नहीं पहुंची हो, तब फ‍ि‍ल‍िंग की मदद ली जाती है, जब सड़न दांत की नस तक पहुंच जाए, तब रूट कैनाल क‍िया जाता है, जब दांत में बहुत ज्यादा सड़न हो जाए और दांत का बड़ा ह‍िस्‍सा डैमेज हो जाए, तो दांत न‍िकालने की जरूरत पड़ सकती है। दांत न‍िकलवाने के बाद डेंटल इंप्‍लांट, ब्रिज और डेंचर जैसे व‍िकल्‍पों की मदद ले सकते हैं। दांत में दर्द, सूजन, कैविटी या सड़न होने पर इलाज में देरी न करें और तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • दांत में सड़न होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    दांत में सड़न होने पर काले निशान, ठंडा-गर्म लगना, मीठा खाने पर झनझनाहट और दांत में दर्द हो सकता है। 
  • क्या दांतों पर काले निशान का मतलब सड़न है?

    जरूरी नहीं है। दांतों पर काले निशान चाय-कॉफी के दाग, तंबाकू के कारण, दांतों पर लंबे समय तक जमा गंदगी हो सकती है। हालांकि, काला गड्ढा या दांत की सतह में बदलाव सड़न का संकेत भी हो सकता है। इसके लिए जांच जरूरी है।

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  • Current Version

    Oct 14, 2026 16:29 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Suman Yadav