Thu Sep 17, 2026 | 08:53 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

महिलाएं घर पर ऐसे करें सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन, कई गंभीर बीमारियों की हो सकती है समय पर पहचान

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन को लाइफ सेव‍िंग स्‍क‍िल कहा जाता है ज‍िसे हर महि‍ला को जानना चाह‍िए। इसे हर महीने करीब 10 से 15 म‍िनट में क‍िया जा सकता है। जानें इस जांच के सभी 7 जरूरी स्‍टेप्‍स के बारे में।

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ब्रेस्‍ट कैंसर एक कॉमन समस्‍या बनता जा रहा है और फ‍िलहाल एक्‍सपर्ट्स इसका मुख्‍य कारण भी नहीं जान पाए हैं इसल‍िए ब्रेस्‍ट कैंसर से बचाव जरूरी है। कई बार ब्रेस्‍ट कैंसर के संकेत साइलेंट होते हैं और पता ही नहीं चलता क‍ि ब्रेस्‍ट कैंसर हो गया है। ऐसे में सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन क‍िसी संजीवनी से कम नहीं है। हालांकि, सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन ब्रेस्ट कैंसर की जांच का विकल्प नहीं है। किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, लेक‍िन इस जांच की मदद से ब्रेस्‍ट की सेहत और असामान्‍य बदलावों को समझने में मदद म‍िलती है। आइए जानते हैं सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िन‍ेशन क्‍या है और यह ब्रेस्‍ट हेल्‍थ के ल‍िए क्‍यों जरूरी है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन क्‍या है?

 

सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन के 7 जरूरी स्‍टेप

1.  हाथों को कमर पर रख लें। ब्रेस्‍ट की जांच करें।
2. हल्‍का सा आगे शीशे की ओर झुकें। बदलाव पर गौर करें।
3. हाथों को स‍िर के पीछे रखें। हाथों को आगे की तरफ प्रेस करें। ब्रेस्‍ट में बदलाव को नोट‍िस करें।
4. लेटकर बाएं हाथ से दाएं स्‍तन और दाएं हाथ से बाएं स्‍तन की जांच करें। कंधे के नीचे तौल‍िए को रखें। 
5. ब्रेस्‍ट को तीन उंगल‍ियों की मदद से हल्का दबाव देते हुए ऊपरी ह‍िस्‍से की जांच करें।
6. दोनों बाजुओं के आर्मप‍िट एर‍िया को चेक करें। 
7. निप्पल को हल्के से दबाकर डिस्चार्ज की जांच करें। 

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन का मतलब है अपने ब्रेस्‍ट की जांच खुद से करना। इसमें मह‍िलाए ब्रेस्‍ट को द‍ेखकर और हल्‍के हाथ से छूकर पता लगा सकती है क‍ि कहीं ब्रेस्‍ट में कोई असामान्‍य बदलाव, तो नहीं है?

ब्रेस्‍ट कैंसर मरीजों में 25% महिलाओं ने खुद ब्रेस्ट में बदलाव को पहचाना

साल 2011 में Journal Of Women's Health में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित 361 महिलाओं की जानकारी पर अध्ययन क‍िया गया। इसमें पाया गया क‍ि 57% महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता मैमोग्राम के अलावा किसी अन्य तरीके से चला था। इनमें 25% महिलाओं ने खुद ब्रेस्ट में बदलाव या गांठ महसूस करके कैंसर का पता लगाया था, जबकि 18% मामलों में यह किसी अन्य कारण से जांच के दौरान संयोग से पता चला।

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सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन से किन समस्याओं के संकेत मिल सकते हैं?

  • ब्रेस्ट कैंसर
  • ब्रेस्‍ट स‍िस्‍ट
  • स्तन में संक्रमण या सूजन
  • असामान्य डिस्चार्ज
  • फाइब्रोएडेनोमा

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है?

  • सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन की मदद से ब्रेस्ट के सामान्य आकार, शेप और बनावट को समझने में मदद म‍िलती है।
  • इस दौरान महिला नई गांठ, स्तन के आकार या शेप में बदलाव, त्वचा पर गड्ढा या सिकुड़न, त्वचा पर लाल चकत्ते और निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज जैसे बदलावों पर ध्यान दे सकती है।
  • इसलिए सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन का उद्देश्य खुद बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि असामान्य बदलाव को समय पर पहचानकर डॉक्टर से जांच कराना है।

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन करने का सही समय क्‍या है?

पीर‍ियड्स के लगभग 10 द‍िनों के बाद सेल्‍फ ब्रेस्‍ट एग्‍जाम‍िनेशन कर सकते हैं। ऐसा इसल‍िए पीरियड्स शुरू होने के लगभग 10 दिन बाद स्तनों में दर्द या छूने पर संवेदनशीलता होने की संभावना कम होती है। ऐसे में यह जांच करने के ल‍िए सबसे सटीक समय माना जाता है।

कि‍स उम्र से शुरू करें सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन?

  • 20 साल की उम्र के बाद यह जांच हर महीने करनी चाह‍िए।
  • प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के बाद भी यह जांच कर सकते हैं।
  • ब्रेस्‍ट के साइज और शेप में बदलाव आने पर गौर करें।

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सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन के 7 जरूरी स्‍टेप्‍स

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पहला स्‍टेप

  • एक शीशे के सामने खड़े हो जाएं।
  • अपने हाथों को कमर पर रख लें।
  • ब्रेस्‍ट में क‍िसी भी बदलाव को नोट‍िस करें जैसे साइज या शेप में बदलाव वगैरह।

ब्रेस्‍ट कैंसर के शुरूआती लक्षणों पर गौर करें

  • ब्रेस्‍ट कैंसर के इन शुरूआती लक्षणों पर गौर करना जरूरी है-
  • ब्रेस्‍ट की त्वचा पर गड्ढा या धंसाव दिखाई देना।
  • ब्रेस्‍ट की त्वचा का सिकुड़ना या खिंची हुई नजर आना।
  • निप्पल की त्वचा पर पपड़ी या परत जमना।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते या दाने निकलना।
  • स्तन की सतह पर नसों का पहले से ज्यादा उभरी हुई दिखना।
  • एक हाथ के ऊपरी हिस्से या बगल में असामान्य सूजन होना।
  • निप्पल से असामान्य तरल पदार्थ निकलना।

दूसरा स्‍टेप

  • हल्‍का सा आगे शीशे की ओर झुकें।
  • शेप या साइज में होने वाले क‍िसी भी बदलाव को दोबारा चेक करें।

तीसरा स्‍टेप

  • हाथों को स‍िर के पीछे रखें।
  • हाथों को आगे की तरफ प्रेस करें और फ‍िर से क‍िसी असामान्‍य लक्षण पर गौर करें।

चौथा स्‍टेप

  • एक समान सर्फेस या हार्ड बेड पर लेट जाएं।
  • दाएं कंधे के नीचे एक तौल‍िए को फोल्‍ड करके रखें।
  • दाएं ब्रेस्‍ट को बाएं हाथ से चेक करें।
  • इसी तरह बाएं कंधे के नीचे तौल‍िया रखें।
  • बाएं ब्रेस्‍ट को दाएं हाथ से चेक करें।

पांचवा स्‍टेप

  • ब्रेस्‍ट को हाथ से हल्के दबाव के साथ छूकर और महसूस करके चेक करें।
  • तीन उंगल‍ियों की मदद से ब्रेस्‍ट के ऊपरी ह‍िस्‍से की जांच करें।
  • ऊपर से नीचे की ओर उंगल‍ियों को घुमाएं।
  • ब्रेस्‍ट के बीच के ह‍िस्‍से से बाहर की ओर उंगल‍ियों को लेकर जाएं और क‍िसी भी तरह की असामान्‍यता को नोट‍िस करें।

छठा स्‍टेस

दोनों बाजुओं के आर्मप‍िट एर‍िया को चेक करें।

सातवां स्‍टेप

  • निप्पल को हल्के से दबाकर देखें कि उसमें से कोई तरल पदार्थ (डिस्चार्ज), तो नहीं निकल रहा है? अगर रंगहीन, म‍िल्‍की, ब्‍लड वाला, हरा या काला ड‍िस्‍चार्ज नजर आए, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

ब्रेस्‍ट हेल्‍थ को लेकर पूछे जाने वाले कॉमन सवालों के जवाब

1. ब्रेस्‍ट में गांठ का मतलब ब्रेस्‍ट कैंसर है?

नहीं, ब्रेस्‍ट की हर गांठ का मतलब कैंसर नहीं होता। ज्‍यादा गांठें, गैर-कैंसरकारी गांठें (Benign Lumps) होती हैं। Mayo Clinic के मुताब‍िक, संदिग्ध गांठ की जांच के ल‍िए डॉक्‍टर मैमोग्राम या ब्रेस्ट अल्ट्रासाउंड करवा सकते हैं। कैंसर का संदेह होने पर बायोप्‍सी भी की जाती है।

2. क्‍या दोनों ब्रेस्‍ट का साइज अलग-अलग होना सामान्‍य है?

कई मह‍िलाओं के दोनों ब्रेस्‍ट का साइज अलग-अलग हो सकता है और यह नॉर्मल बात है। दोनों ब्रेस्‍ट में हल्‍की असामान्‍यता अक्‍सर देखने को म‍िलती है। यह च‍िंता की बात तब होती है, जब अचानक से ब्रेस्‍ट के साइज में बदलाव आए और शेप का अंतर अचानक ज्‍यादा द‍िखने लगे।

3. क्‍या ब्रेस्‍ट पर बाल होना सामान्‍य है?

ब्रेस्‍ट एर‍िया में कुछ बाल हो सकते हैं। यह च‍िंता की बात नहीं है। हालांक‍ि, अगर अचानक से ब्रेस्‍ट एर‍िया में हेयर ग्रोथ द‍िख रही है, तो यह हार्मोनल असंतुल‍न का लक्षण हो सकता है।

4. ब्रेस्‍टफीड‍िंग कराने से स्‍तनों का ढीलापन बढ़ जाता है?

नहीं ऐसा स्‍तनपान के कारण नहीं होता है। स्‍तन के लूज होने के पीछे एज‍िंग एक कारण हो सकता है ज‍िसकी वजह से त्‍वचा की इलास्‍ट‍िस‍िटी में बदलाव आता है। साथ ही वजन के बढ़ने के कारण भी लूज ब्रेस्‍ट नजर आने लगते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन को 20 साल की उम्र के बाद, हर महीने करना चाह‍िए। प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के बाद भी यह जांच कर सकते हैं। यह जांच पीर‍ियड्स के लगभग 10 द‍िनों के बाद करनी चाह‍िए। सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन में ब्रेस्‍ट के साइज और शेप में असामान्‍य बदलाव पर गौर करें। ब्रेस्‍ट की त्वचा का स‍िकुड़ना, त्‍वचा पर पपड़ी जमना, लाल चकत्ते, सूजन वगैरह ब्रेस्‍ट कैंसर के शुरूआती लक्षण हो सकते हैं। दाेनों ब्रेस्‍ट के साइज में हल्‍का बदलाव च‍िंता की बात नहीं है, लेक‍िन जब बदलाव अचानक नजर आए और समय के साथ बढ़ने लगे, तो डॉक्‍टर से तुरंत संपर्क करें।

image credit: magnific

FAQ

  • क्‍या ब्रेस्‍ट कैंसर केवल मह‍िलाओं को होता है?

    नहीं, पुरुषों को भी ब्रेस्‍ट कैंसर हो सकता है। हालांक‍ि, पुरुषों में ब्रेस्‍ट कैंसर होने की संभावना कम होती है, लेक‍िन क‍िसी भी जेंडर के व्‍यक्‍त‍ि को ब्रेस्‍ट के असामान्‍य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाह‍िए। 
  • क्‍या ब्रेस्‍ट कैंसर केवल बूढ़ी मह‍िलाओं को होता है?

    ब्रेस्‍ट कैंसर क‍िसी भी उम्र की मह‍िला को हो सकता है। हालांक‍ि, जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ब्रेस्‍ट कैंसर का खतरा भी बढ़ने लगता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 17, 2026 19:04 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal

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