Fri Sep 11, 2026 | 09:04 PM IST

Medically Reviewed by Vandana Rajput , Antenatal and Postnatal Nutrition & Diabetes Educator

कैल्शियम नहीं लेने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? बता रहे हैं एक्सपर्ट

What Does Low Calcium Affect The Body: कैल्शियम नहीं लेने से शरीर पर कई तरह के नेगेटिव असर पड़ते हैं, जैसे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, नर्व्स फंक्शन प्रभावित होने लगते हैं। जानें, कैल्शियम नहीं लेने के अन्य नुकसानों के बारे में भी।

Side Effects Of Low Calcium Levels: हमारे शरीर के लिए सभी तरह के पोषक तत्व महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी तरह के पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में किसी न किसी तरह की परेशानी हो सकती है। वैसे न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से इम्यूनिटी वीक हो जाती है और बीमार होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। इन्हीं पोषक तत्वों में कैल्शियम भी अहम तत्वों में से एक है। फिर भी आपने देखा होगा कि कई लोग डाइट में बदलाव करने के चलते कैल्शियम को कम कर देते हैं। हालांकि, ऐसा किया जाना बिल्कुल सही नहीं है। इसलिए, इस लेख में हम आपको बताएंगे कि अगर कोई व्यक्ति कैल्शियम पूरी तरह लेना बंद कर दे, तो इसका उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है? आइए, नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत से जानते हैं सभी जरूरी बातें।

कैल्शियम नहीं लेने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?- What Happens If You Don't Eat Calcium In Hindi

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कैल्शियम न सिर्फ महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है, बल्कि यह हमारी हड्डियों को मजबूती देने का मुख्य स्रोत है। यह हमारी हड्डियों को मजबूती देता है और हार्ट, मसल्स तथा नर्व्स को भी सही तरह से काम करने के लिए कैल्शियम की जरूरत पड़ती है। इससे स्पष्ट है कि शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद, अगर आप पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं लेते हैं, तो इसकी वजह से कई तरह के नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। आइए, जानते हैं इनके बारे में-

हड्डियों से जुड़ी परेशनी

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वंदना राजपूत कहती हैं, "अगर आप लंबे समय तक कैल्शियम लेना पूरी तरह बंद कर देता है, तो यह सबसे पहले आपकी हड्डियों को नुकसान पहुंचाता है। कैल्शियम की कमी की वजह से धीरे-धीरे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और भविष्य में हड्डियों से जुड़ी बीमारी, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ जाता है। आपको बता दें कि ऑस्टियोपोरोसिस वह कंडीशन है, जिसमें हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि गिरने भर से व्यक्ति की हड्डियां फ्रैक्चर हो जाती हैं।"

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मसल्स क्रैंप

वंदना राजपूत आगे समझाती हैं, "कैल्शियम की कमी की वजह से मसल्स पर भी नेगेटिव असर पड़ता है। खासकर, पैरों की मसल्स में दर्द और ऐंठन बढ़ जाता है। असल में कम कैल्शियम की वजह से नर्व्स और मांसपेशी कोशिकाओं में उत्तेजना को बढ़ाकर मांसपेशियों में दर्द का कारण बनता है। इसके अलावा, जब शरीर में कैल्शियम का स्तर गिरता है, तो सोडियम चैनल का सक्रिय होना आसान हो जाता है। इससे तंत्रिकाएं बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाती हैं, जो कि मसल्स क्रैंप का कारण बनती हैं।"

सुन्नपन और झुनझुनाहट

कैल्शियम की कमी के कारण सुन्नपन और झुनझुनाहट जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसा खासकर, पैरों, उंगलियों और मुंह के आसपास के हिस्सों में अधिक देखा जाता है। सवाल है, ऐसा क्यों होता है? विशेषज्ञों की मानें, तो पर्याप्त कैल्शियम न लेने के कारण नर्व्स फंक्शन बाधित हो जाते हैं। इसके अलावा, कैल्शियम के स्तर में गिरवट के कारण ब्लड क्लॉटिंग भी होने लगती है। यही कारण है कि सुन्नपन और झुनझुनाहट की समस्या भी व्यक्ति में हो जाती है।

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निष्कर्ष

कुल मिलाकर, कहने की बात ये है कि शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं होनी चाहिए। इससे न सिर्फ हड्डियां कमजोर होती हैं, बल्कि शरीर के कई फंक्शन सही तरह से काम नहीं करते हैं। अगर किसी के शरीर में कैल्शियम की कमी है, तो उन्हें डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच करवानी चाहिए। जरूरी हो, तो कैल्शियम सप्लीमेंट को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए।

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FAQ

  • किस फल में सबसे ज्यादा कैल्शियम होता है?

    वैसे तो कई ऐसे फल हैं, जिनमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, लेकिन सूखे अंजीर में अन्य फलों की तुलना में सबसे ज्यादा कैल्शियम पाया जाता है। लगभग 100 ग्राम सूखे अंजीर में 160 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। इसके अलावा, संतरा, खुबानी, कीवी आदि भी कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।
  • तेजी से कैल्शियम कैसे बढ़ाएं?

    कैल्शियम तेजी से बढ़ाने के लिए दूध और दूध से बने प्रोडक्ट को डाइट में शामिल करें। इसके अलावा, हरी पत्तेदार सब्जियां, जैसे पालक, मेथी, मेवे और बादाम, तिल, चिया सीड्स आदि भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं।
  • क्या कैल्शियम की कमी से नसों में दर्द हो सकता है?

    कैल्शियम की कमी की वजह से कई तरह के बॉडी फंक्शन प्रभावित होते हैं। इस असर नर्व्स पर भी पड़ता है। ऐसे में सुन्नपन और झुनझुनी का अहसास हो सकता है।

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Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Sep 23, 2025 13:39 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Sep 23, 2025 13:39 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Vandana Rajput

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