अक्सर अच्छे स्वास्थ्य के लिए लोगों को गट को स्वस्थ रखने की सलाह दी जाती है। गट को स्वस्थ रखने से ओवरऑल स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन अगर व्यक्ति को गट से जुड़ी समस्याएं हैं, तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में व्यक्ति के मन में सवाल उठता है कि अनहेल्दी गट का कैसे पता चलता है? आइए इस बारे में Dr. Shivakumar Varakanahalli, Consultant - Medical Gastroenterology, Aster Whitefield Hospital और Dr. Anupama N K, Senior Consultant - Medical Gastroenterology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।
अनहेल्दी गट के 7 संकेत
डॉ. शिवकुमार के अनुसार, अस्वस्थ पेट (unhealthy gut) कोई मेडिकल डायग्नोसिस नहीं है, लेकिन कुछ ऐसे लक्षण हैं, जो बार-बार दिखाई देते हैं और बताते हैं कि पाचन तंत्र पर ध्यान देने की जरूरत है। जैसे- ब्लोटिंग, बहुत ज्यादा गैस बनने, एसिडिटी, सीने में जलन, लगातार थकान होने, भूख और वजन में बदलाव।
डॉ. अनुपमा के अनुसार, अनहेल्दी गट की समस्या में स्वास्थ्य से जुड़े कुछ लक्षण दिख सकते हैं। जैस ब्लोटिंग, ज्यादा गैस होने, एसिडिटी, लगातार थकान, वजन में बदलाव होने और भूख में बदलाव होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
1. ब्लोटिंग होने की समस्या
अनहेल्दी गट का पहला लक्षण है लगातार पेट फूलना (bloating), खासकर तब जब यह कभी-कभार के बजाय बार-बार हो। इसके अलावा, व्यक्ति को पाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है।
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2. मल त्याग की आदतों में बदलाव
गट से जुड़ी समस्या होने का दूसरा लक्षण है मल त्यागने की आदतों में साफ बदलाव, जैसे बार-बार कब्ज होना, दस्त होना या कभी कब्ज़ और कभी दस्त होना। ऐसा आंतों की कार्यप्रणाली के प्रभावित होने पर होता है।
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3. ज्यादा गैस बनना
बहुत ज्यादा गैस बनना या खाना खाने के बाद बार-बार पेट में बेचैनी या परेशानी होने जैसी समस्याएं गट के अनहेल्दी होने का संकेत देती हैं। इन परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
4. खाने से जुड़ी परेशानियां
कई बार व्यक्ति को बिना किसी साफ कारण के खाने से जुड़ी परेशानियां (food intolerance) या ऐसे खाने की चीजों से पाचन से जुड़े लक्षण दिखने जो पहले आसानी से पच जाती थीं, इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
5. लगातार एसिडिटी और सीने में जलन
अनहेल्दी गट का पांचवां संकेत है लगातार एसिडिटी, रिफ्लक्स या अपच (indigestion) महसूस होना। कभी-कभार एसिडिटी होना आम बात है, लेकिन अगर लक्षण बार-बार दिखें तो लगातार खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
6. भूख या वजन में बदलाव
पाचन संबंधी लक्षणों के साथ भूख में बदलाव या बिना किसी साफ वजह के वजन में बदलाव कभी-कभी पेट या आंतों (gastrointestinal) की किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।
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7. लगातार थकान रहना और अस्वस्थ महसूस करना
पाचन से जुड़ी परेशानियों के साथ-साथ लगातार थकान या नॉर्मल रूप से अस्वस्थ महसूस करना है। यह सिर्फ़ पेट की सेहत से जुड़ा नहीं है, बल्कि कभी-कभी पोषण की कमी या पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण (absorption) को प्रभावित करने वाली अन्य स्थितियों के कारण भी ऐसा हो सकता है।
क्या कहती है स्टडी?
साल 2021 में Frontiers In Endocrinology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अनहेल्दी गट या आंत का असंतुलन (Gut Dysbiosis) तब होता है, जब हेल्दी माइक्रोऑर्गेनिज्म्स की कमी हो जाती है और हानिकारक प्रोटोबियन्ट्स (pathobionts) बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर में सूजन (inflammation) और इम्यूनिटी में असंतुलन बढ़ जाता है। इसके प्रमुख पाचन लक्षणों में इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) के कारण कब्ज या दस्त, पाचन प्रक्रिया के दौरान अधिक दर्द, आंत की प्रोटैक्टिव वॉल (दीवार) की gut permeability बढ़ना तथा क्रोन बीमारी व अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी आंत की सूजन संबंधी बीमारियां (IBD) शामिल हैं।
इसके अलावा, आंत और ब्रेन के बीच कम्युनिकेशन नेटवर्क (gut-brain axis) प्रभावित होने से चिंता (anxiety) और डिप्रेशन जैसे मानसिक लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं। यह असंतुलन शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़कर मोटापे, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) तथा गठिया (rheumatoid arthritis), टाइप 1 डायबिटीज, मल्टीपल स्केलेरोसिस और लुपस (SLE) जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के खतरे को बढ़ा देता है।
कई परेशानियों में दिखते हैं ये लक्षण
डॉ. शिवकुमार का कहना है, जरूरी बात यह है कि इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति के पेट में खराब बैक्टीरिया (bad gut bacteria) हैं या गट डिस्बायोसिस (gut dysbiosis) की समस्या है।
- इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)
- खाने से जुड़ी परेशानियां (food intolerances)
- आंतों में इंफेक्शन (Gastrointestinal Infections)
- इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)
- सीलिएक डिजीज (Coeliac Disease)
- दवाओं का इस्तेमाल के कारण होने वाले साइड इफेक्ट
- कई अन्य स्थितियां
इन सभी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण भी व्यक्ति को ऐसी ही परेशानियां हो सकती हैं। हर व्यक्ति का गट माइक्रोबायोम (पेट के बैक्टीरिया का ग्रुप) अलग-अलग होता है, और अभी तक एकदम सही या स्वस्थ माइक्रोबायोम की कोई एक क्लिनिकल परिभाषा नहीं है।
हेल्दी गट के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव है जरूरी
डॉ. शिवकुमार के अनुसार, पेट से जुड़ी समस्याएं होने पर तुरंत प्रोबायोटिक्स, डिटॉक्स प्रोडक्ट्स या बहुत ज्यादा पाबंदी वाली डाइट (restrictive diets) अपनाने के बजाय, लगातार दिखने वाले लक्षणों के मूल कारण की जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा, पेट को स्वस्थ रखने के लिए कुछ अच्छी आदतों को अपनाना फायदेमंद है।
- बैलेंस डाइट लें, जिसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर, सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और कम प्रोसेस्ड (minimally processed) फूड्स हों।
- पर्याप्त पानी पिएं।
- नियमित रूप से फिजिकल एक्टिविटीज करें।
- अच्छी नींद लें।
इन सभी आदतों को अपनाने से पाचन स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी पाचन से जुड़ी समस्याएं अगर बार-बार होती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।
निष्कर्ष
गट से जुड़ी समस्या होने पर व्यक्ति को ब्लोटिंग, मल त्याग की आदतों में बदलाव, ज्यादा गैस होने, खाने से जुड़ी परेशानियां, लगातार एसिडिटी, सीने में जलन, भूख या वजन में बदलाव, लगातार थकान और अस्वस्थ महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती है। ध्यान रहे, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें, खासकर लंबे समय तक पेट की परेशानी बने रहने पर। ताकि किसी भी स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।
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FAQ
हेल्दी गट के लिए क्या खाना चाहिए?
गट को हेल्दी रखने के लिए डाइट में फाइबर और प्रोबायोटिक्स से युक्त फर्मेंटेड फूड्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है। जैसे- दही, छाछ, इडली, साबुत अनाज, दालें, फलियां, फल, सब्जियां और पर्याप्त पानी पिएं।गट से जुड़ी समस्याओं के क्या कारण हैं?
शरीर में फाइबर की कमी, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, स्ट्रेस, दवाइयों, फिजिकल एक्टिविटीज न करने, नींद की कमी और पानी की कमी के कारण गट की समस्या हो सकती है।
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Current Version
Sep 30, 2026 23:48 IST
Modified By : Priyanka Sharma Sep 30, 2026 23:48 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Anupama N K
