Thu Oct 8, 2026 | 02:35 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

भोजन से पहले ट्राई करें 12 सेकंड की ये ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, पाचन समस्‍याओं से म‍िल सकती है राहत

3-4-5 ब्रीदि‍ंग एक्‍सरसाइज को अगर भोजन से पहले कर लें, तो इसकी मदद से पाचन समस्‍याओं से बचने में मदद म‍िल सकती है। जानें इसे करने का आसान तरीका।
भोजन से पहले ट्राई करें 12 सेकंड की ये ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, पाचन समस्‍याओं से म‍िल सकती है राहतभोजन से पहले ट्राई करें 12 सेकंड की ये ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, पाचन समस्‍याओं से म‍िल सकती है राहत

क्‍या आपको भी गैस, एस‍िड‍िटी, पेट में जलन जैसी पाचन समस्‍याएं होती हैं? इससे बचने के ल‍िए ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज कर सकते हैं। इस ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज को करने में केवल 12 सेकंड का समय म‍िलता है। इसे 3-4-5 ब्रीदिंग पैटर्न एक्‍सरसाइज करते हैं। इसके तहत 3 सेकंड तक सांस अंदर लेनी है, 4 सेकंड तक सांस रोकनी है और फिर 5 सेकंड में धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़नी है। इसे भोजन से पहले क‍िया जा सकता है। आइए जानते हैं इस ब्रीद‍िंग पैटर्न के फायदे और इसकी प्रक्र‍िया। Payal Asthana, Certified Fitness Coach & Director Ozefit Fitness Club, Australia के अनुसार, लोग अक्‍सर मसालेदार भोजन करते हैं ज‍िससे पाचन तो ब‍िगड़ता ही है, साथ ही हृदय की धड़कन बढ़ सकती है। इसलिए अगर आप कोई भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं, तो यह आपके पाचन के लिए फायदेमंद साब‍ित होगी। 3-4-5 ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज के साथ-साथ बॉक्‍स ब्रीद‍िंग भी कर सकते हैं।

3 सेकंड सांस अंदर लें।
4 सेकंड सांस रोकें।
5 सेकंड सांस छोड़ें।

साल 2023 में Cell Reports Medicine में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताबि‍क, ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज की मदद से च‍िंता और मूड को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है। लंबे समय तक ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करने से शरीर को र‍िलैक्‍स रखने में मदद म‍िल सकती है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि जब स्‍ट्रेस कम होता है, तो पाचन समस्‍याओं से राहत म‍िलती है।

साल 2025 में Journal Of Community Hospital Internal Medicine Perspectives में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, एसिड रिफ्लक्स की समस्‍या में ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करने से मरीजों में सुधार देखा गया है।

बेहतर पाचन के ल‍िए 3-4-5 ब्रीदिंग एक्सरसाइज कैसे करें?

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भोजन करने से पहले ये 12 सेकंड की ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करें-

  • 3 सेकंड तक सांस अंदर लें।
  • 4 सेकंड तक सांस रोकें।
  • 5 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

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क्या इस ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज को ऑफिस में भी किया जा सकता है?

  • हां। कुर्सी पर सीधे बैठकर कुछ मिनट इसका अभ्यास किया जा सकता है। इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती।
  • ऑफिस में इसे डेस्क पर बैठे-बैठे भी आसानी से किया जा सकता है।
  • काम के बीच तनाव, बेचैनी या मानसिक थकान महसूस होने पर कुछ मिनट इसका अभ्यास किया जा सकता है।
  • बस पीठ सीधी रखें और बिना जल्दबाजी के धीमी और गहरी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें।

क्या अस्थमा वाले लोग 3-4-5 ब्रीदिंग कर सकते हैं?

कुछ लोग इसे रिलैक्सेशन तकनीक के रूप में कर सकते हैं, लेकिन अस्थमा के दौरान सांस रोकने या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

क्या गर्भावस्था में 3-4-5 ब्रीदिंग की जा सकती है?

गर्भावस्था में सामान्य धीमी सांस लेने का अभ्यास किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक सांस रोकने से बचना चाह‍िए। इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

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ब्रीदिंग एक्सरसाइज पाचन समस्‍याओं पर कैसे काम करती है?

ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज की मदद से सांस लेने से शरीर की र‍िलैक्‍सेशन प्रत‍िक्र‍िया बढ़ सकती है। ब्रीदि‍ंग एक्‍सरसाइज पाचन से जुड़ी शारीर‍िक प्रक्र‍ियाओं के ल‍िए अनुकूल माना जाता है। पेट फूलना, गैस, पेट दर्द, मल त्‍याग में बदलाव जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। धीमी और गहरी सांस लेने से शरीर को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है जिसका पाचन तंत्र पर भी पॉज‍िट‍िव असर पड़ सकता है। हालांकि, ब्रीदिंग एक्सरसाइज को पाचन संबंधि‍त बीमारियों का इलाज नहीं माना जाता है।

क्या 12 सेकंड की ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज को रोज करना चाहिए?

12 सेकंड की ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज रोजाना कर सकते हैं, लेक‍िन यह पाचन समस्‍याओं का इलाज नहीं है। वैज्ञान‍िक प्रमाणों में न‍ियंत्र‍ित ब्रीद‍िंग से स्‍ट्रेस और पाचन समस्‍याओं से राहत म‍िलती है। इसे माइंडफुल आदत के तौर पर रूटीन में शाम‍िल क‍िया जा सकता है। अगर पाचन समस्‍या बार-बार हो रही है, तो केवल एक्‍सरसाइज या डाइट पर न‍िर्भर रहने के बजाय डॉक्‍टर से संपर्क करें।

3-4-5 ब्रीदि‍ंग एक्‍सरसाइज क्‍यों फायदेमंद है?

  • 3-4-5 ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करने से तनाव और बेचैनी को कम करने में मदद म‍िलती है।
  • स्‍ट्रेस कम होने से पाचन तंत्र को सपोर्ट म‍िलता है।
  • कुछ मिनट तक सांस पर ध्यान केंद्रित करने से मन को शांत करने और ध्यान लगाने में मदद मिल सकती है।
  • सोने से पहले धीमी सांस लेने की एक्सरसाइज शरीर और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद कर सकती है।
  • मांसपेशियों का तनाव कम करने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

भोजन से पहले अगर आसान 3-4-5 ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज को केवल 12 सेकंड तक करें, तो पाचन समस्‍याओं से बचाव हो सकता है। भोजन करने से पहले 3 सेकंड तक सांस अंदर लें। 4 सेकंड तक सांस रोकें और 5 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इससे स्‍ट्रेस कंट्रोल होता है, नींद अच्‍छी आती है और पाचन समस्‍याओं से भी राहत म‍िल सकती है। हालां‍क‍ि, यह गैस, ब्‍लोट‍िंग जैसी समस्‍याओं का इलाज नहीं है, लेक‍िन इस उपाय को स्‍वस्‍थ जीवनशैली में शाम‍िल क‍िया जा सकता है।

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FAQ

  • ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज करते समय किन बातों का ध्यान रखें?

    आरामदायक पोजीशन में बैठें, सांस को जबरदस्ती न खींचें, बहुत तेजी से सांस न लें और चक्कर या सांस फूलने पर अभ्यास रोक दें।
  • ब्रीदिंग एक्‍सरसाइज को कितनी देर तक करना चाहिए?

    शुरुआत में 2 से 5 मिनट तक ब्रीदि‍ंग एक्‍सरसाइज कर सकते हैं। आराम महसूस होने पर धीरे-धीरे अवधि बढ़ाई जा सकती है।

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Oct 08, 2026 13:52 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Oct 08, 2026 13:52 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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