Fri Oct 23, 2026 | 08:49 AM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

डीप ब्रीद‍िंग (गहरी सांस लेने) से शरीर को मिल सकते हैं ये 7 फायदे, एक्सपर्ट से जानें सही तरीका

डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज एक सांस लेने की प्रक्र‍िया है। सामान्‍य सांस तो सब लेते हैं, लेक‍िन डीप ब्रीद‍िंग से सेहत को बेहतर बना सकते हैं और बीमार‍ियों से बच सकते हैं।
डीप ब्रीद‍िंग (गहरी सांस लेने) से शरीर को मिल सकते हैं ये 7 फायदे, एक्सपर्ट से जानें सही तरीकाडीप ब्रीद‍िंग (गहरी सांस लेने) से शरीर को मिल सकते हैं ये 7 फायदे, एक्सपर्ट से जानें सही तरीका

हम बिना सोचे दिनभर सांस लेते रहते हैं। सामान्य सांस लेना शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसके लिए हमें कुछ व‍िशेष करने की जरूरत नहीं होती, लेक‍िन जब बात डीप ब्रीद‍िंग यानी गहरी सांस लेने की प्रक्र‍िया की आती है, तो व्यक्ति अपनी सांस की गति और पैटर्न पर ध्यान देता है। इसका मकसद सांस को जबरदस्ती लंबा करना नहीं, बल्कि उसे आरामदायक और नियमित बनाना है। डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Deep Breathing Exercise) एक सरल ब्रीदिंग तकनीक है। इसमें सांस लेते समय डायफ्राम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पेट और निचली पसलियों के आसपास हल्की मूवमेंट महसूस हो सकती है। डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करने से पहले जानें इसके क्‍या-क्‍या फायदे होते हैं। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Certified Fitness Coach Payal Asthana & Director Ozefit Fitness Club, Australia से बात की।

डीप ब्रीदिंग करने का कोई एक निश्चित समय जरूरी नहीं है। इसे व्यक्ति अपनी दिनचर्या के अनुसार कर सकता है। सुबह उठने के बाद कुछ मिनट इसका अभ्यास किया जा सकता है। ऑफिस या काम के दौरान तनाव महसूस होने पर भी कुछ समय धीमी सांस लेने का अभ्यास किया जा सकता है। रात में सोने से पहले शांत वातावरण में इसका अभ्यास करना और भी आरामदायक हो सकता है। कुछ लोग इसे योग या मेडिटेशन के साथ भी करते हैं।

1. ब्लड प्रेशर मैनेज करने में मदद म‍िलती है

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धीमी और नियंत्रित सांस लेने से शरीर के तनाव वाले रिस्पॉन्स को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कुछ लोगों को बीपी कंट्रोल करने में मदद म‍िल सकती है। हालांकि, इसे हाई बीपी की दवाओं का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। साल 2023 में Frontiers In Physiology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, डीप ब्रीदिंग से ब्लड प्रेशर और तनाव को कम करने में मदद म‍िल सकती है। शोध में शाम‍िल लोगों के सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में करीब 6 mmHg और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 3 से 6 mmHg की कमी देखी गई।

2. स्‍ट्रेस और एंग्‍जायटी दूर होती है

डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करके स्‍ट्रेस और एंग्‍जायटी दूर होती है। जब हम धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से सांस लेते हैं, तो शरीर को रिलैक्स होने का संकेत मिलता है। इससे मन की बेचैनी और घबराहट कम महसूस हो सकती है। तनाव के समय कुछ मिनट गहरी सांस लेने से खुद को शांत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या का इलाज नहीं है, बल्कि तनाव को मैनेज करने का एक तरीका है।

3. अन‍िद्रा दूर करने में मदद म‍िलती है

सोने से पहले डीप ब्रीदिंग करने से शरीर और दिमाग को रिलैक्स होने में मदद मिल सकती है। यह तकनीक तनाव और लगातार चलने वाले विचारों को शांत करने में फायदेमंद हो सकती है। कुछ मिनट धीमी सांसों पर ध्यान देने से व्यक्ति को सोने के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में मदद मिल सकती है।

4. मन शांत और र‍िलैक्‍स होता है

मन में बहुत उथल-पुथल चल रही है और मन को र‍िलैक्‍स करना चाहते हैं, तो डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज का अभ्‍यास करें। सोने से पहले दिमाग में लगातार चलने वाले विचारों के कारण कई लोगों को रिलैक्स होने में परेशानी होती है। सोने से पहले 5 से 10 मिनट आराम से सांस लेने का अभ्यास किया जा सकता है। इस तरह अन‍िद्रा से भी बचाव होगा।

5. एकाग्रता बढ़ाने में मदद म‍िलती है

डीप ब्रीद‍िंग में धीरे-धीरे सांस लेने पर व्यक्ति का ध्यान अपनी सांसों पर जाता है, जिससे तनाव और आसपास की चीजों से ध्यान भटकना कम हो सकता है। नियमित अभ्यास से अपने विचारों और भावनाओं पर बेहतर कंट्रोल महसूस हो सकता है। पढ़ाई, काम या किसी खास एक्‍ट‍िव‍िटी से पहले कुछ मिनट डीप ब्रीदिंग करने से मन को शांत करके फोकस रखने में मदद मिल सकती है।

6. पेल्विक फ्लोर मसल्स के लिए फायदेमंद है डीप ब्रीद‍िंग

हमारी पसलियों के नीचे डायफ्राम नाम की मांसपेशी होती है। सांस लेते समय डायफ्राम नीचे की ओर फैलता है और सांस छोड़ते समय ऊपर की ओर लौटता है। डीप ब्रीदिंग में डायफ्राम की यह मूवमेंट बेहतर तरीके से होती है। इसका असर पेट और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है और पेल्‍व‍िक मांसपेश‍ियां मजबूत होती हैं।

7. मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद म‍िलती है

स्‍ट्रेस और एंग्‍जायटी के कारण गर्दन, कंधे और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। डीप ब्रीदिंग के दौरान शरीर को धीरे-धीरे रिलैक्स करने पर मांसपेशियों का तनाव कम महसूस हो सकता है। सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से व्यक्ति अपने शरीर में मौजूद तनाव को पहचान पाता है और उसे कम करने का प्रयास करता है।

डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज कैसे करें?

  • आराम से एक शांत जग‍ह पर बैठ जाएं।
  • नाक से धीरे-धीरे सांस अंदर लें।
  • सांस को आराम से बाहर निकालें।
  • सांस छोड़ते समय पेट धीरे-धीरे अंदर की ओर आए।
  • रोज 5 से 10 मिनट धीमी गत‍ि से डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करें और आराम से सांस लेने का अभ्यास करें। सांस को जबरदस्ती बहुत गहरा लेने की कोशिश न करें।

न‍िष्‍कर्ष:

डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज करने से स्‍ट्रेस, एंग्‍जायटी को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है, मन शांत और रि‍लैक्‍स होता है, एकाग्रता बढ़ाने में मदद म‍िलती है, पेल्विक फ्लोर मसल्स के ल‍िए यह एक्‍सरसाइज फायदेमंद मानी जाती है और इससे मांसपेश‍ियों का तनाव कम करने में भी मदद म‍िलती है। डीप ब्रीद‍िंग से स्‍ट्रेस घटता है, अन‍िद्रा से बचाव होता है और बीपी कंट्रोल रखने में मदद म‍िल सकती है। रोजाना 5 से 10 म‍िनट डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज कर सकते हैं।

image credit: magnific

FAQ

  • क्या डीप ब्रीदिंग से हार्ट रेट कम हो सकता है?

    तनाव के कारण बढ़े हुए हार्ट रेट को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। इसका असर व्यक्ति के स्‍ट्रेस लेवल पर न‍िर्भर करता है। 
  • क्या डीप ब्रीदिंग वजन कम होता है?

    डीप ब्रीदिंग को सीधे वजन कम करने वाली एक्सरसाइज नहीं माना जाता। वेट लॉस के ल‍िए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है।

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    Aug 27, 2026 19:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Payal Asthana