Thu Oct 8, 2026 | 08:36 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bala Raja Sekhar Chandra , Sr. Consultant - Neuro & Spine Surgeon

लैपटॉप पर घंटों काम करने के बाद होता है गर्दन में दर्द? डॉक्टर के बताए इन 7 ट‍िप्‍स से पाएं राहत

अगर आप भी लैपटॉप पर घंटों काम करते हैं और गर्दन दर्द से परेशान हैं, तो कुछ आसान ट‍िप्‍स की मदद से दर्द को दूर कर सकते हैं और काम को आसानी से कर सकते हैं। आइए डॉक्‍टर से जानें ऐसे 7 ट‍िप्‍स।
लैपटॉप पर घंटों काम करने के बाद होता है गर्दन में दर्द? डॉक्टर के बताए इन 7 ट‍िप्‍स से पाएं राहतलैपटॉप पर घंटों काम करने के बाद होता है गर्दन में दर्द? डॉक्टर के बताए इन 7 ट‍िप्‍स से पाएं राहत

लैपटॉप पर घंटों काम करने से लोगों को अक्‍सर गर्दन में दर्द हो जाता है। गर्दन दर्द से बचने के ल‍िए अपनी पोजीशन चेक करें। लैपटॉप पर काम के दौरान स‍िर को आगे की ओर झुकाने से बचें, आरामदायक कुर्सी न हो, तो कमर के नीचे तकि‍या भी रख सकते हैं। लैपटॉप को चेहरे से लगभग एक हाथ की दूरी पर रखें। समय-समय पर कंधे और गर्दन की स्‍ट्रेच‍िंग करने से भी आराम म‍िलता है। Dr. Bala Raja Sekhar Chandra Yetukuri, Sr. Consultant Neuro & Spine Surgeon And Clinical Director- Advance Endoscopic Spine Surgery At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad ने बताया क‍ि लंबे समय तक लैपटॉप का इस्तेमाल करने से अक्सर टेक नेक की समस्या हो सकती है। इसमें सिर आगे की ओर झुका रहने के कारण गर्दन की मांसपेशियों और लिगामेंट्स पर दबाव पड़ता है, जिससे गर्दन में दर्द और जकड़न हो सकती है।

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1. लैपटॉप पर काम करके वक्‍त बैठने की पोजीशन कैसी होनी चाह‍िए?

Harvard Medical School में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, आप चाहे कोई भी डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हों, सही पोजीशन बनाए रखना जरूरी है। लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय पीठ सीधी रखें और सिर को सीधा रखें।

  • सिर को आगे की ओर झुकाकर न बैठें।
  • कंधों को आराम की स्थिति में रखें और कोहनियों को शरीर के करीब रखें। ऐसी कुर्सी पर बैठें जिसमें कमर के निचले हिस्से को सहारा मिले।
  • अगर आपके पास आरामदायक कुर्सी नहीं है, तो कमर के निचले हिस्से के पीछे तकिया रख सकते हैं।

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2. लैपटॉप की सही पोजीशन

  • लैपटॉप को अपने ठीक सामने रखें।
  • लैपटॉप आपके चेहरे से लगभग एक हाथ की दूरी पर होना चाहिए।
  • यह आपकी आंखों से 20 इंच से ज्यादा पास और 40 इंच से ज्यादा दूर नहीं होना चाहिए।
  • स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों के स्तर पर या उससे थोड़ा नीचे होना चाहिए।

3. काम के दौरान चलना जरूरी है

Mayo Clinic के मुताब‍िक, काम के दौरान जितनी बार संभव हो, उठकर थोड़ा चलें।

  • अगर संभव हो, तो कुछ काम खड़े होकर करें।
  • बैठते समय भी समय-समय पर हाथों, उंगलियों और बाजुओं को स्ट्रेच करें।
  • अपनी बैठने की स्थिति बदलना, बीच-बीच में खड़ा होना और शरीर को हिलाना-डुलाना शरीर पर पड़ने वाले तनाव को कम करने और स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।

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4. फोन को स‍िर और गर्दन के बीच न दबाएं

अगर आप फोन पर काफी समय बिताते हैं या फोन पर बात करते हुए अक्सर टाइप करते हैं या लिखते हैं, तो स्पीकर या हेडसेट का इस्तेमाल करें। फोन को सिर और गर्दन के बीच दबाकर रखने से बचें। इससे गर्दन में दर्द हो सकता है।

5. बैठने के ल‍िए कैसी कुर्सी चुनें?

  • लैपटॉप पर काम के दौरान बैठने के ल‍िए ऐसी कुर्सी चुनें जो आपकी रीढ़ को सही सहारा दे।
  • कुर्सी की ऊंचाई इस तरह रखें कि आपके पैर फर्श पर सीधा टिका रहें।
  • अगर ऐसा संभव न हो, तो फुटरेस्ट का इस्तेमाल करें।
  • अगर कुर्सी में आर्मरेस्ट हैं, तो उन्हें इस तरह रखें कि आपकी बाहें आराम से टिकी रहें।

6. स्क्रीन देखने के लिए गर्दन आगे न झुकाएं

  • लैपटॉप स्क्रीन छोटी या दूर होने पर कई लोग अनजाने में गर्दन आगे की ओर झुकाकर देखने लगते हैं।
  • इस पोजीशन को लंबे समय तक बनाए रखने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है।
  • अगर आपको स्क्रीन देखने के लिए आगे झुकना पड़ रहा है, तो लैपटॉप की दूरी और ऊंचाई को बदलें।
  • जरूरत पड़ने पर स्क्रीन की फॉन्ट साइज बढ़ाएं।
  • स्क्रीन को इतना पास रखें कि आपको उसे देखने के लिए गर्दन आगे न करनी पड़े।
  • काम करते समय सिर को शरीर के ऊपर सीधी स्थिति में रखने की कोशिश करें।

7. कंधे और गर्दन को समय-समय पर स्ट्रेच करें

  • लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करने के दौरान गर्दन और कंधों में जकड़न महसूस हो सकती है। इसलिए काम के बीच हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं।
  • कंधों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर छोड़ना, कंधों को पीछे की ओर घुमाना या हाथों को हल्का स्ट्रेच करना फायदेमंद हो सकता है।
  • गर्दन को अचानक या जोर से घुमाने से बचें।
  • किसी भी स्ट्रेच के दौरान दर्द बढ़े, तो उसे रोक दें।
  • स्ट्रेचिंग को लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहने का विकल्प न मानें।
  • नियमित रूप से पोजीशन बदलना और थोड़ी देर चलना भी जरूरी है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर गर्दन का दर्द दो हफ्ते से ज्‍यादा समय तक बना रहे या इसके साथ सुन्नपन, कमजोरी या दर्द का हाथों की ओर दर्द फैलने जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

लैपटॉप पर घंटों काम की वजह से गर्दन और कंधे में दर्द हो सकता है। इससे बचने के ल‍िए अपनी पोजीशन चेक करें। लैपटॉप पर काम करने के बाद आरामदायक कुर्सी चुनें, स‍िर को आगे झुकाने से बचें। लैपटॉप को आंख की सीध में रखें और उसे एक हाथ की दूरी पर रखें। साथ ही गर्दन की स्‍ट्रेच‍िंग भी जरूरी है। गर्दन दर्द के अलावा सुन्नपन, कमजोरी या हाथ में दर्द हो, तो डॉक्‍टर से संपर्क करना न भूलें।

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FAQ

  • गर्दन दर्द में गर्म सिंकाई करनी चाहिए या ठंडी?

    यह दर्द के कारण पर निर्भर करता है। मांसपेशियों की जकड़न में गर्म सिंकाई से आराम म‍िलता है, जबकि नई चोट या सूजन में ठंडी सिंकाई की जाती है। स‍िंकाई को डॉक्‍टर की सलाह पर ही करें।
  • क्या गर्दन दर्द में मालिश कर सकते हैं?

    हल्की मालिश से मांसपेशियों की जकड़न में कुछ लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन तेज दर्द, चोट, सुन्नपन या कमजोरी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

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Yashaswi Mathur

Health Journalist

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े।

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    Oct 08, 2026 18:48 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Bala Raja Sekhar Chandra