थायराइड रोग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- हाइपोथायराइडिज्म, हाइपरथायराइडिज्म आदि। यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि थायराइड गले के सामने वाले हिस्से में त्वचा के ठीक नीचे स्थित एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि होती है। यह एंडोक्राइन सिस्टम का ही एक हिस्सा है। थायराइड ग्लैंड थायराइड हार्मोन जैसे कि थायरोक्सिन और ट्रायोडोथायरोनिन बनाकर उन्हें रिलीज करती है, जिससे शरीर के कई फंक्शन सही तरह से काम करते हैं। थायराइड की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड को एक महत्वपूर्ण टेस्ट मानते हैं। आइए, दिल्ली स्थित PSRI Multispeciality Hospital में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. हिमिका चावला से जानते हैं थायराइड अल्ट्रासाउंड के बारे में जरूरी बातें।
थायराइड अल्ट्रासाउंड क्या है?
डॉ. हिमिका चावला के अनुसार, "थायराइड अल्ट्रासाउंड एक सेफ और नॉन-इनवेसिव इमेजिंग टेस्ट है। इसकी मदद से ट्रीटमेंट सही दिशा में है या नहीं या फिर ट्रीटमें की शुरुआत कब करनी है, इस तरह की जानकारी मिल जाती है। वैसे तो यह टेस्ट पूरी तरह सुरक्षित है और यह टेस्ट करवाने में मरीज को किसी तरह का दर्द भी नहीं होता है। यह टेस्ट आमतौर पर थायराइड ग्लैंड में गांठ, ट्यूमर या सूजन का पता लगाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञों की मानें, तो थायराइड अल्ट्रासाउंड कई अन्य कारणों से भी किया जाता है, जैसे कैंसर की पहचान, बायोप्सी और संरचनात्मक समस्याओं के बारे में।"
थायराइड अल्ट्रासाउंड कैसे किया जाता है?
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2023 में Reviews in Endocrine and Metabolic Disorders में प्रकाशित स्टडी से पता चलता है कि थायराइड के अल्ट्रासाउंड का उपयोग 1960 के दशक के उत्तरार्ध से एक नैदानिक उपकरण (diagnostic tool) के रूप में किया जा रहा है और यह थायराइड रोग के निदान के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे महत्वपूर्ण इमेजिंग उपकरण है। सवाल है इसका उपयोग कैसे किया जाता है? थायराइड अल्ट्रासाउंड में साउंड वेव का यूज करके शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं। डॉ. हिमिका चावला बताती हैं, "अल्ट्रासाउंड इमेजिंग को सोनोग्राफी भी कहा जाता है। इस टेस्ट में एक छोटे प्रोब का इस्तेमाल किया जाता है। इसे ट्रांसड्यूसर कहा जाता है। यह एक छोटा और हाथ से पकड़ने वाला उपकरण है। यह ऐसी साउंड वेव पैदा करता है, जिसे हम सामान्य तौर पर नहीं सुन पाते हैं।"
डॉ. हिमिका चावला आगे कहती हैं, "थायराइड अल्ट्रासाउंड के लिए ट्रांसड्यूसर के साथ-साथ एक जेल का भी इस्तेमाल किया जाता है, जो कि सीधे तौर पर त्वचा पर लगाया जाता है। यह जेल प्रोब और शरीर के बीच की हवा को हटा देता है। इससे प्रोब से निकलने वाली ध्वनि तरंगें यानी साउंड वेव सीधे शरीर के अंदर अंगों (जैसे थायराइड) तक पहुंच पाती हैं। जब ये वेव ऑर्गन से टकराकर वापस आती हैं, तो यह प्रोब उन्हें एक ‘रिसीवर’ की तरह पकड़ लेता है। प्रोब इन वेव्स को इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदल देता है, जिसे कंप्यूटर स्क्रीन पर एक तस्वीर के रूप में दिखाता है। इसी तरह, जब थायराइड का अल्ट्रासाउंड किया जाता है, तो इससे थायराइड ग्लैंड की इमेज उभरती है।"
थायराइड अल्ट्रासाउंड क्यों किया जाता है?
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डॉ. हिमिका चावला बताती हैं कि थायराइड का अल्ट्रासाउंड कई मामलों में किया जाता है, जैसे-
- गले की गांठः थायराइड अल्ट्रासाउंड किया जाता है, ताकि गले में हुई गांठ (Thyroid Nodules) के बारे में पता लगाया जा सके। National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases के अनुसार, इस प्रक्रिया की मदद से इसकी सटीक जानकारी मिलती है कि गर्दन में जो गांठ हुई है, वह थायराइड ग्लैंड से निकल रही है या आसपास के किसी हिस्से से। साथ ही गांठ की संरचना के बारे में भी सटीक जानकारी मिल जाती है।
- थायराइड गांठ का विश्लेषणः आमतौर पर जब भी गांठ की बात की जाती है, उसे कैंसर से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि थायराइड अल्ट्रासाउंड के जरिए थायराइड में हुए गांठ का सही विश्लेषण किया जाता है। इस पता चलता है कि गांठ सामान्य बेनाइन यानी नॉन-कैंसेरियस है या उसमें ऐसे लक्षण हैं जिनके लिए बायोप्सी की आवश्यकता है।
- गांठों की संख्याः थायराइड अल्ट्रासाउंड के जरिए यह भी जानकारी मिलती है कि गांठों की संख्या कितनी है? ऐसा खासकर, उनके साथ किया जाता है, जिन्हें हाथ से छूने पर एक से अधिक गांठें महसूस होती हैं।
- गांठ का आकारः थायराइड अल्ट्रासाउंड से न सिर्फ गांठ की संरचना के बारे में जानकारी मिल जाती है, बल्कि गांठ का आकार कैसा है, छोटा है या बड़ा है, यह भी पता चल जाता है।
- प्रक्रिया में मददः The Radiology Information Resource for Patients के मुताबिक थायराइड अल्ट्रासाउंड रियल टाइम इमेजेज शो करता है। इसका मतलब है कि सुई द्वारा की जाने वाली बायोप्सी जैसी प्रक्रिया में यह डॉक्टर को अंदरूनी अंग की सटीक जानकारी देता है, जिससे यह प्रक्रिया आसान भी हो जाती है।
थायराइड अल्ट्रासाउंड के लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है?
डॉ. हिमिका चावला कहती हैं, "थायराइड अल्ट्रासाउंड के लिए किसी विशेष तैयारी की जरूरत नहीं होती है। हां, मरीज को अल्ट्रासाउंड से पहले अपनी गर्दन से चेन या ज्वेलरी निकाल देनी चाहिए और बिल्कुल ढीले कॉलर वाले कपड़े पहनने चाहिए ताकि डॉक्टर को जांच करने में आसानी हो।"
थायराइड अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से क्या पता चलता है?
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से निम्नलिखित जानकारियां मिलती हैं, जैसे-
- थायराइड में मौजूद गांठ ठोस (Solid) है या उसमें तरल पदार्थ (Cyst) भरा हुआ है यानी गांठों की प्रकृति के बारे में सटीक जानकारी मिलती है। हालांकि, ठोस गांठों की जांच आगे बायोप्सी से की जा सकती है।
- ग्रंथि के असामान्य आकार (Goiter) या सूजन की पहचान भी इस रिपोर्ट से होती है। असल में यह रिपोर्ट थायराइड में मौजूद गांठ के आकार और संरचना की जानकारी देती है।
- अगर गांठ के किनारे अनियमित हैं या उसमें कैल्शियम जमा (Microcalcifications) है, तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। इसकी जानकारी भी इस रिपोर्ट से मिल सकती है।
थायराइड अल्ट्रासाउंड कितनी लंबी चलती है?
cleveland clinic की मानें, तो थायराइड अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया महज 30 मिनट में पूरी हो जाती है। हालांकि, यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर मरीज की कंडीशन ज्यादा खराब या रिस्की होगी, तो डॉक्टर को थायराइड की कई फोटो की जरूरत हो सकती है और उसी के आधार पर टेस्ट का निश्चित समय लगता है।
थायराइड अल्ट्रासाउंड के लिए कब जाएं डॉक्टर के पास?
थायराइड अल्ट्रासाउंड, थायराइड संबंधी समस्या के लिए किया जाता है। हालांकि, मरीज जब तक थायराइड अल्ट्रासाउंड नहीं करवाते हैं, तब तक उन्हें इन समस्याओं की जानकारी नहीं हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि थायराइड अल्ट्रासाउंड के लिए कब डॉक्टर के पास जाना है, इसकी आपके पास सटीक जानकारी हो। विशेषज्ञों की मानें, तो जब गर्दन में कोई गांठ, घेंघा या किसी भी किस्म का उभार गर्दन के पास महसूस हो, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, थायराइड अल्ट्रासाउंड की सलाह तब भी दी जाती है, जब मरीज की आवाज में भारीपन, कर्कशता, आवाज निकलने में कठिनाई हो। यहां तक कि जब थायराइड ग्लैंड सही तरह से काम नहीं करता है, तो इसके कुछ लक्षण भी नजर आते हैं, उन पर भी गौर किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल के पास जाना चाहिए। जांच के दौरान डॉक्टर पहले से मौजूद गांठों की निगरानी करने या थायराइड के असामान्य ब्लड टेस्ट (जैसे T3, T4, TSH) के बाद स्थिति की जांच करने के लिए भी किया जाता है।
निष्कर्ष
थायराइड अल्ट्रासाउंड एक किस्म का टेस्ट है। जब थायराइड ग्लैंड सही तरह से काम नहीं करता है, तब इस टेस्ट को किया जाता है। साथ ही, यह पता लगाया जाता है कि कहीं थायराइड में किसी तरह की गांठ तो नहीं है, गांठ है तो उसका आकार क्या है और उसकी संरचना कैसी है और उसकी सटीक लोकेशन क्या है, इस तरह की बातों का भी पता चलता है। असल में, थायराइड अल्ट्रासाउंड थायराइड की स्थिति का पता लगाने के लिए एक जरूरी टेस्ट है। मरीज को जब भी थायराइड संबंधित किसी भी तरह की समस्या की आशंका हो, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह पर यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
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FAQ
थायराइड बढ़ने से क्या दिक्कत आती है?
थायराइड हार्मोन के बढ़ने से कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है, जिससे वजन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, दिल की धड़कन बढ़ना, घबराहट होना, पसीना आना, नींद न आना, बालों का झड़ना और गर्दन में सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। यहां तक कि थायराइड हार्मोन की वजह से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है।गर्भवती महिला का थायराइड कितना होना चाहिए?
डॉ. हिमिका चावला के अनुसार गर्भावस्था के दौरान थायराइड का स्तर आमतौर पर 0.1-3.0 mIU/L के बीच होना चाहिए, जो तिमाही (trimester) के अनुसार बदलता है। पहली तिमाही में 0.1-2.5 mIU/L और दूसरी/तीसरी तिमाही में 0.2-3.0 mIU/L। 2.5 mIU/L से कम TSH स्तर को सबसे अच्छा माना जाता है।थायराइड का दर्द कहां होता है?
थायराइड का दर्द मुख्य रूप से गर्दन के निचले हिस्से में होता है। इसकी वजह से कान, जबड़े या गर्दन के किनारों तक भी फैल सकता है।थायराइड के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
थायराइड के शुरुआती लक्षणों में वजन बढ़ना या घटना, अत्यधिक थकान, बालों का झड़ना, रूखी त्वचा और गले में सूजन या खराश शामिल हैं। आपको बता दें कि थायराइड के दो प्रकार हैं, हाइपोथायराइडिज्म (कम थायराइड) और हाइपरथायराइडिज्म (अधिक थायराइड)।थायराइड किसकी कमी से हो जाता है?
थायराइड, विशेषकर हाइपोथायराइडिज्म शरीर में आयोडीन की कमी के कारण होता है। इसके अलावा, इसके होने के कई अन्य कारण भी शामिल हैं, जैसे तनाव, जीन्स और खराब जीवनशैली और खानपान की बुरी आदतें।
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Current Version
Apr 23, 2026 18:27 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 23, 2026 18:27 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Himika Chawla