Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

C-reactive protein (CRP) टेस्ट क्यों किया जाता है और इसके बढ़ने-घटने का मतलब?

क्या आप जानते हैं कि शरीर में बार-बार दर्द या थकान बना रहना हाई सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) का संकेत हो सकता है? जानें CRP टेस्ट की नॉर्मल रेंज क्या है और इसका स्तर बढ़ने से कौन-सी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।

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सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) टेस्ट एक महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट है जिसका उपयोग शरीर में सूजन (Inflammation) का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस लेख में सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट के बारे में विस्तार से जानेंगे। यह टेस्ट क्या है, क्यों किया जाता है और सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट की नॉर्मल रेंज क्या है? इस लेख में दिए गए वैज्ञानिक तथ्यों को  जालंधर स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल में Interventional Cardiologist डॉ. दीबांशु गुप्ता ने खुद रिव्यू किया है।

क्या है सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट?

c reactive protein test crp normal range  02 (4)

Cleveland Clinic के अनुसार सी-रिएक्टिव प्रोटीन एक ब्लड टेस्ट है, जो आपके शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन का पता लगाने के लिए किया जाता है। इससे पहले हम इस टेस्ट के बारे में जानें, यह जान लेना जरूरी है कि सीआरपी क्या है? एक्सपर्ट्स की मानें, तो सीआरपी एक तरह का प्रोटीन है, जो हमारे लिवर में बनता है। जब शरीर में कहीं भी सूजन या कोई संक्रमण होता है, तो लिवर ब्लड में सीआरपी की मात्रा बढ़ा देता है। वैसे तो सीआरपी बढ़ना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। हां, यह एक संकेत है, जिससे पता चलता है कि शरीर में कुछ न कुछ खराब चल रहा है।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट क्यों किया जाता है?

Mayoclinic के मुताबिक सी-रिएक्टिव प्रोटीन कई अलग-अलग तरह की समस्याओं को कंफर्म करने के लिए किया जाता है, जैसे-

  • संक्रमणः इसका जिक्र हमने पहले भी किया है कि जब शरीर में संक्रमण होता है, तो सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। इसी तरह, संक्रमण कितना फैल गया है, इसकी जानकारी के लिए भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट किया जाता है। इससे इंफेक्शन की गंभीरता की सटीक जानकारी मिलती है।
  • क्रोनिक बीमारी की जानकारीः किसी क्रोनिक बीमारी, जैसे गठिया की स्थिति के बारे में पता लगाने के लिए भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट किया जा सकता है। असल में सूजन वाली बीमारियों की जानकारी सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट से मिल जाती है। साथ ही, यह बीमारी की कंडीशन की सही जानकारी देता है।
  • सर्जरी के बादः किसी भी तरह की सर्जरी के बाद इंफेक्शन का रिस्क काफी ज्यादा होता है। यही कारण है कि सर्जरी के बाद सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट किया जाता है, ताकि यह पता चल सके कि कहीं घाव में इंफेक्शन तो नहीं हो गया है। अगर हां, तो वह कितना फैला है, इसका भी पता लगाया जा सकता है।
  • हृदय रोग का जोखिमः अगर किसी को हार्ट से संबंधित समस्या है या इसके नजर आ रहे लक्षणों पर गौर करने की जरूरत होती है। उसी के आधार पर हार्ट डिजीज के जोखिम का आकलन करने के लिए सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट किया जाता है। इससे हार्ट अटैक के जोखिम का आकलन भी किया जा सकता है।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट कब किया जाता है?

c reactive protein test crp normal range  03

डॉक्टर सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट के लिए तब कहते हैं, जब शरीर में निम्न लक्षण नजर आते हैं, जैसे-

  • लगातार बुखार और ठंड लगना।
  • जोड़ों में दर्द और अकड़न महसूस होना।
  • तेज दिल धड़कना या सांस लेने में कठिनाई होना।
  • बहुत ज्यादा थकान महसूस करना।
  • बहुत ज्यादा बॉडी पेन होना।

CRP टेस्ट के परिणामों का चार्ट

 CRP का स्तर (mg/L)  स्थिति और अर्थ
 1.0 mg/L से कम  सामान्य: आपके शरीर में सूजन का जोखिम बहुत कम है।
 1.0 से 3.0 mg/L  औसत: यह हल्की सूजन या भविष्य में हृदय रोग के मध्यम जोखिम को दर्शाता है
 3.0 mg/L से अधिक  उच्च: यह शरीर में सक्रिय सूजन (Inflammation) का संकेत है।
 10.0 mg/L से ऊपर  गंभीर: यह किसी गंभीर संक्रमण (Infection), चोट या पुरानी बीमारी के बढ़ने का संकेत है।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट कैसे किया जाता है?

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  • सबसे पहले हाथ से ब्लड सैंपल लिया जाता है। हाथ में एक निश्चित हिस्से को क्लीन किया जाता है, एक टूर्निकेट (नस फुलाने वाली पट्टी) लगाई जाती है और सुई की मदद से हाथ की नस से ब्लड को निकाला जाता है।
  • इस पूरी प्रक्रिया में बमुश्किल 5-7 मिनट का समय लग सकता है और ब्लड निकालने के बाद प्रभावित हिस्से को कुछ समय के लिए रुई से दबाया जाता है, ताकि ब्लड निकलना बंद हो जाए।
  • आमतौर पर सी-रिएक्टिव टेस्ट के लिए भूखे रहने की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, हाई सेंसिटिविटी सी-रिएक्टिव टेस्ट के लिए 9 से 12 घंटे तक भूखे रहने की सलाह दी जा सकती है।
  • अंत में ब्लड सैंपल को लैब में जांच के लिए भेजा जाता है ताकि ब्लड में सीआरपी की मात्रा मापी जा सके। इसे आमतौर पर मिलीग्राम प्रति लीटर में मापा जाता है।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन की नॉर्मल रेंज क्या है?

Cleveland Clinic की मानें तो सामान्य तौर पर, सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) का सामान्य स्तर 0.9 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) से कम माना जाता है। यदि रिपोर्ट में यह स्तर 1.0 से 10.0 mg/dL के बीच आता है, तो इसे आमतौर पर मॉडरेटली एलिवेटेड कहा जाता है। इसका मतलब है कि शरीर में कहीं न कहीं हल्की सूजन या कोई संक्रमण है। एक्सपर्ट बताते हैं कि सीआरपी को mg/L और mg/dL में मापा जाता है।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन की रेंज किन कारकों से प्रभावित होती है?

सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर कई कारकों से प्रभावित हो सकता है, जैसे-

  • बैक्टीरिया, वायरल और फंगल इंफेक्शन की वजह से सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
  • रूमेटाइड अर्थराइटिस, ल्यूपस और इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर में बदलाव करते हैं।
  • लाइफस्टाइल की बुरी आदतें जैसे स्मोकिंग करने से भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर प्रभावित होता है।
  • हाई बॉडी मास इंडेक्स यानी पेट की चर्बी बढ़ने से भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन की रेंज बदल सकती है।
  • शॉर्ट टर्म इंटेंस एक्सरसाइज भी सीआरपी के स्तर को तेजी से स्पाइक कर सकती है।
  • अच्छी नींद न लेना, लंबे समय से किसी दवा पर निर्भर होना जैसे फैक्टर्स भी सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर पर असर डालते हैं।

सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट कब करवाएं?

वैसे तो आम आदमी को इसकी जानकारी नहीं मिल सकती है कि उनके शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन का स्तर कितना है? इसके लिए उन्हें डॉक्टर के परामर्श पर टेस्ट करवाना पड़ेगा। हालांकि, शरीर में नजर आ रहे कुछ लक्षणों के आधार पर सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट करवा सकते हैं, जैसे एक्यूट इंफेक्शन, ऑटोइम्यून डिजीज के लक्षणों का बढ़ना, थकान, शरीर में दर्द, आईबीडी आदि। इस बात का ध्यान रखें कि यहां बताए गए सभी लक्षण अन्य बीमारियों की ओर भी इशारा कर सकते हैं, इसलिए आवश्यक है कि तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और उनके द्वारा बताई गई सलाह को फॉलो करें।

निष्कर्ष

सी-रिएक्टिव प्रोटीन आपके शरीर में किसी भी प्रकार के सूजन की सटीक जानकारी देता है। हालांकि, इस टेस्ट की जरूरत कब होती है और क्यों होती है, यह डॉक्टर से ही पता लगाया जा सकता है। हां, अगर किसी को शारीरिक समस्या हो, बीमारी हो, संक्रमण हो, तो डॉक्टर के पास जाने में देरी नहीं करनी चाहिए।

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FAQ

  • सीआरपी का कितना स्तर खतरनाक है?

    सीआरपी (CRP) का स्तर 3 mg/L से ऊपर होने पर शरीर में सूजन या संक्रमण का हाई रिस्क माना जा सकता है। वहीं अगर इसका स्तर 100 mg/L से अधिक है, तो यह बहुत ज्यादा खतरनाक माना जाता है। यह सेप्सिस या गंभीर बैक्टीरिया संक्रमण का संकेत हो सकता है।
  • CRP बढ़ने से कौन सी बीमारी होती है?

    आपको जानकारी के लिए बता दें कि सीआरपी बढ़ने से किसी तरह की बीमारी नहीं होती है। यह बीमारी का एक लक्षण है। बैक्टीरियल/वायरल इंफेक्शन, हृदय रोग (हार्ट अटैक/स्ट्रोक), गठिया (Arthritis), ल्यूपस (Lupus), कैंसर, मोटापा या सेप्सिस (Sepsis) जैसी गंभीर बीमारियों में CRP का स्तर बढ़ सकता है। 
  • सीआरपी बढ़ने पर क्या खाना चाहिए?

    CRP (C-Reactive Protein) बढ़ने का मतलब है शरीर में सूजन है। इस स्थिति में मरीज को एंटी-इन्फ्लामेट्री डाइट लेनी चाहिए। डाइट में हल्दी, अदरक, दालचीनी, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अखरोट, बादाम, और अलसी के बीज को शामिल करें।
  • घर पर सीआरपी लेवल कैसे कम करें?

    सीआरपी लेवल की सटीक जानकारी मिलने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। वैसे जीवनशैली में अच्छी आदतें अपनाकर, जैसे अच्छी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और रोजाना अच्छी नींद लेने से सीआरपी लेवल को मैनेज किया जा सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 23, 2026 17:25 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 23, 2026 17:25 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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