क्या आप जानते हैं कि नियमित रूप से स्मोकिंग यानी धूम्रपान करने की वजह से पुरुषों में नपुंसकता बढ़ रही है? जी, हां! यह पूरी तरह सच है। असल में, सिगरेट में कई ऐसे केमिकल और तत्व पाए जाते हैं, जो कि सीधे तौर पर पुरुषों की सेक्शुअल हेल्थ को प्रभावित करते हैं। अगर आप भी रोजाना स्मोक करते हैं, तो इस लेख को इग्नोर न करें। इस लेख में नवी मुंबई स्थित मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले स्मोकिंग और पुरुषों में नपुंसकता के संबंध को विस्तार से बता रहे हैं।
क्या वाकई धूम्रपान करने से पुरुषों में नपुंसकता बढ़ती है?
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इरेक्टाइल डिस्फंक्शन एक ऐसी समस्या है, जिसमें पुरुषों को इरेक्शन प्राप्त करने या उसे बनाए रखने में परेशानी आती है। आमतौर पर यह मानसिक या किसी शारीरिक समस्या के कारण हो सकता है। हालांकि, इसमें स्मोकिंग का भी बड़ा योगदान है। Urology Care Foundation की मानें, तो अकेले अमेरिका में 30 मिलियन (3 करोड़) पुरुषों को प्रभावित कर चुका है। National Cancer Institute की मानें, तो एक सिगरेट में करीब 7,000 से अधिक रसायनों का उपयोग होता है, जिसमें से करीब 250 हानिकारक हैं और इनमें से करीब 69 कैंसरजनक हैं।
साल 2016 में Nature Reviews Disease Primers में प्रकाशित एक रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, स्मोकिंग पुरुषों में नपुंसकता बढ़ा सकती है, क्योंकि इसकी वजह से ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है। ऐसे में शरीर के हर हिस्से में खून नहीं पहुंच पाता है और शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई भी कम हो जाती है। ऐसा पुरुषों के प्रजनन अंगों में भी होता है। नतीजतन, पुरुष स्मोकिंग के कारण अक्सर डल रहते हैं और लंबे समय तक स्मोकिंग करने से नपुंसकता का जोखिम भी बढ़ता है।
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स्मोकिंग किस तरह नपुंसकता का कारण बनती है?
- नसों की क्षतिः सिगरेट में निकोटिन और कार्बन मोनोक्साइड होता है। ये ऐसे तत्व हैं, जो नसों और हमारी रक्त वाहिकाओं को सख्त कर देते हैं, जिससे ब्लड फ्लो सही तरह से नहीं हो पाता है। नपुंसकता का यह एक बड़ा कारण है।
- नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर में गिरावटः नियमित रूप से सिगरेट पीने के कारण शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric Oxide) का स्तर कम हो जाता है। यह पेनिस (लिंग) की रक्त वाहिकाओं को रिलैक्स और उनमें खून भरने का संकेत देता है।
- सिगरेट की संख्याः विशेषज्ञ साफ बताते हैं कि आप जितनी ज्यादा सिगरेट एक दिन में पीते हैं, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का जोखिम उतना ज्यादा बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि जितना ज्यादा धूम्रपान किया जाता है, शरीर उतने ही हानिकारक रसायनों के संपर्क में आता है, जो कि नपुंसकता को बढ़ावा देता है।
- बीमारियांः अगर कोई बीमार होने के बावजूद लगातार स्मोकिंग करता है, तो यह भी नपुंसकता की वजह बन सकता है। जैसे अगर किसी को ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हार्ट डिजीज है, तो ऐसे में रक्त वाहिकाएं पहले से ही कमजोर होती हैं। इस स्थिति में स्मोकिंग करने से नसें और ज्यादा क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की परेशानी बढ़ जाती है।
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क्या स्मोकिंग छोड़ने से नपुंसकता की समस्या में सुधार आता है?
यह सच है कि स्मोकिंग छोड़ने से नपुंसकता की समस्या में कमी आती है। Translational Andrology and Urology के अनुसार जीवनशैली में सुधार करके और स्मोकिंग या अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाकर आप इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या को सुधार कर सकते हैं। हालांकि, आपको नपुंसकता क्यों है, इसके कारण को जानना भी जरूरी है। कई बार कैंसर, हार्ट डिजीज, टाइप 2 डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस आदि समस्याओं के कारण नपुंसकता होती है। ऐसे में मूल बीमारी का इलाज किया जाना जरूरी होता है।
सिगरेट छोड़ने के कितने दिनों बाद परिणाम मिलता है?
Nature Reviews Disease Primers में प्रकाशित रिव्यू लेख से यह पता चलता है कि स्मोकिंग छोड़ने पर नपुंसकता की समस्या में सुधार आता है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है कि इसके परिणाम कितने दिनों में दिख जाएंगे। कुछ पुरुषों में 6 माह का समय लगता है। पुरुषों की रिकवरी इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह कितने लंबे समय से स्मोकिंग कर रहा है और एक दिन में कितनी सिगरेट पीता था।
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निष्कर्ष
स्मोकिंग और नपुंसकता का आपस में सीधा और गहरा संबंध है। अगर कोई लंबे समय से स्मोकिंग कर रहा है, तो उसे इसको हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसका असर उसकी सेक्शुअल लाइफ पर पड़ता है। पुरुषों के लिए जरूरी है कि वे जितना जल्दी संभव हो, स्मोकिंग छोड़ें ताकि उन्हें नपुंसकता जैसी समस्या का सामना न करना पड़े। हां, अगर किसी को नपुंसकता जैसी प्रॉब्लम हो गई है, तो उन्हें इसकी मूल वजह का पता लगाना चाहिए और डॉक्टर द्वारा सही इलाज करवाना चाहिए।
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FAQ
क्या पैसिव स्मोकिंग से भी पुरुषों की यौन क्षमता प्रभावित होती है?
किसी भी रूप में स्मोकिंग बुरी होती है। पैसिव स्मोकिंग में मौजूद हानिकारक विषाक्त पदार्थ भी ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे निकोटिन के सीधे संपर्क में न आने पर भी इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या हो सकती है।क्या वेपिंग या हुक्का पीना सिगरेट पीने की तुलना में स्तंभन दोष का कम जोखिम पैदा करता है?
नहीं, वेपिंग और हुक्के के धुएं में भी निकोटिन और केमिकल्स होते हैं, जो कि सिगरेट की तरह ही रक्त वाहिकाओं को संकुचित करके पेनिस में ब्लड फ्लो को कम करते हैं।
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Aug 20, 2026 20:44 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vijay S Dahiphale
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