शीशम की लकड़ी का नाम हम सभी ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। जब भी घर के लिए नए फर्नीचर लेने की बात होती है, तो हमारे पापा और दादा हमेशा शीशम की लकड़ी से तैयार फर्निचर लेने की ही सलाह देते हैं। फर्नीचर के लिए शीशम की लकड़ियों का काफी अच्छा और मजबूत माना जाता है। लेकिन, क्या आपको पता है शीशम की छाल और पत्तियों का इस्तेमाल आयुर्वेद में भी कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज पेड़, पौधे और अन्य चीजों के इस्तेमाल से किया जाता है। आयुर्वेद में शीशम के पत्तों, छाल और तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें मौजूद औषधीय गुण आपके सेहत, स्किन और बालों के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं।
आपको बता दें कि लोगों के बीच आयुर्वेदिक इलाज और जड़ी-बूटियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उद्देश्य से ओन्लीमायहेल्थ 'आरोग्य विद आयुर्वेद' (Arogya with Ayurveda) नाम की स्पेशल सीरीज चला रहा है। इस सीरीज के तहत हम आपको आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों और जड़ी-बूटियों के बारे में विस्तार से बताने की कोशिश करेंगे। आज के इस लेख में हम हरियाणा के सिरसा में स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानेंगे कि शीशम के क्या फायदे, नुकसान हैं और इसका सेवन कैसे किया जाता है?
आयुर्वेद में शीशम क्या है?
शीशम एक पेड़ है, जो भारत, नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश में पाया जाता है। भारत में इसे शीशम, इंडियन रोजवुड, शिसो, शीशंपा, कृष्णसार आदि नामों से जाना जाता है। शीशम का वैज्ञानिक नाम Dalbergia Sissoo है। इस पेड़ की लकड़ी को काफी मजबूत होती है। इसके पत्ते, छाल, बीज और तेल भी औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
शीशम की तासीर क्या होती है?
आयुर्वेद में शीशम की तासीर उष्ण यानी गर्म मानी जाती है। यह हल्का और ड्राई होता है। स्वाद में ये कड़वा और कषाय होता है। इसका सेवन कफ-वात को कम करने वाला होता है, जो स्किन, ब्लड और यूरिन से जुड़ी समस्याओं में काफी फायदेमंद होता है।
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शीशम के फायदे
आयुर्वेद में शीशम को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है, आइए जानते हैं इसके फायदों के बारे में-
- शीशम का इस्तेमाल कुष्ठ रोग, सफेद दाग, चर्म रोग, फोड़े-फुंसी आदि स्किन की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। इसके पत्तों का रस स्किन पर लगाने से खुजली, एक्जिमा और एलर्जी की समस्या से राहत मिलती है।
- शीशम का सेवन शरीर में जमी चर्बी को कम करने में मदद करता है, जो मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होता है।
- शीशम का इस्तेमाल ब्लड को साफ करने के लिए किया जाता है , जो ब्लड को साफ करके स्किन को चमक बनाने में मदद करता है।
- शीशम का सेवन अपच, कब्ज, गैस और पेट में कीड़े की समस्या को दूर करने में फायदेमंद होता है।
- शीशम की छाल और पत्तों का इस्तेमाल हिचकी, खांसी और सांस से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद होता है।
- पुराने या गहरे घावों को भरने के लिए भी आप शीशम के पत्तों का लेप या रस इस्तेमाल कर सकते हैं।
- जोड़ों के दर्द, गठिया और वात से जुड़ी समस्याओं से राहत पाने के लिए आप शीशम के तेल से मालिश कर सकते हैं।
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शीशम के स्वास्थ्य नुकसान
शीशम भले ही कई औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं, जिसमें-
- जिन लोगों की स्किन सेंसिटिव होती हैं, उन्हें अपनी स्किन पर शीशम के तेल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
- नवजात शिशु और छोटे बच्चों को शीशम का तेल का इस्तेमाल या सेवन से बचाना चाहिए।
- अगर किसी तरह की बीमारी से पीड़ित हैं और दवा का सेवन करते हैं तो शीशम का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें।
- जिन लोगों को इससे एलर्जी है, उन्हें इसके इस्तेमाल या सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इससे खुजली, जलन और रैशेज की समस्या हो सकती है।
शीशम का तेल किस काम आता है?
शीशम के बीजों या पत्तियों का तेल आयुर्वेद में कई तरीकों से इस्तेमाल किया जाता है, जैसे-
- जोड़ों के दर्द, गठिया और कमर दर्द से राहत के लिए
- स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए फेस मास्क के रूप में
- सिर दर्द में बालों में लगाने के लिए फायदेमंद
- ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर रखने के लिए
खाली पेट शीशम के पत्ते चबाने से क्या होता है?
सुबह खाली पेट शीशम के पत्तों को चबाने से आपके सेहत को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं। इसलिए, अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट 4 से 5 शीशम के पत्तों को चबाते हैं तो इससे आपको वजन कम करने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और स्किन से जुड़ी समस्याओं में सुधार करने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, इन पत्तियों का सेवन आपके शरीर से टॉक्सिन पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं और लिवर को डिटॉक्स करते हैं।
शीशम के पत्ते किसे नहीं खाने चाहिए?
शीशम की तासीर गर्म होती है, इसलिए कुछ लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए या सीमित मात्रा में और डॉक्टर की सलाह पर ही इसका सेवन करना चाहिए।
- प्रेग्नेंट महिला को शीशम के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है।
- जिन लोगों को पेशाब में जलन की समस्या होती है उन्हें भी शीशम के पत्ते नहीं खाने चाहिए।
- जिन लोगों के शरीर में ज्यादा गर्मी होती है उन्हें भी इन पत्तों के सेवन से बचना चाहिए।
- एसिडिटी, अल्सर या पेट की गर्मी से परेशान लोग को भी इन पत्तियों को खाने से बचना चाहिए।
शीशम कितनी मात्रा में लेना चाहिए और कैसे?
शीशम का सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है-
- रोजाना 4 से 5 शीशम के पत्तों को सुबह खाली पेट चबाकर गुनगुने पानी से पीना चाहिए।
- आप शीशम चूर्ण का भी सेवन कर सकते हैं, 2 से 5 ग्राम चूर्ण को दिन में एक या दो बार गर्म पानी या शहद के साथ खा सकते हैं।
- शीशम के काढ़े का सेवन भी फायदेमंद होता है। इसे बनाने के लिए 5 से 7 पत्ते या छाल को लेकर एक गिलास पानी में उबालकर चाय की तरह पी सकते हैं।
- शीशम के तेल का इस्तेमाल जोड़ों के दर्द या स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकते हैं।
निष्कर्ष
शीशम एक बहुत ही उपयोगी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे सीमित मात्रा और सही मात्रा में खाने से कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिल सकता है। लेकिन, इसके सेवन से पहले आप डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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Sep 09, 2025 17:42 IST
Published By : Katyayani Tiwari