घर का खाना खाने के बावजूद पोषण की कमी कैसे हो सकती है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है, लेकिन कई घरों में दाल, रोटी, सब्जी और कभी-कभी चावल जैसे फूड आइटम्स ही मील का हिस्सा होते हैं। इससे कई बार ऐसे फूड छूट जाते हैं, जिस वजह से न्यूट्रिशन की कमी हो सकती है। हालांकि, घर का खाना बाहर के खाने से कई मायनों में बेहतर होता है, लेकिन सिर्फ घर का खाना खाना ही यह साबित नहीं करता कि डाइट पूरी तरह से बैलेंस्ड है। इस बारे में National Nutrition Week 2026 के मौके पर हमने Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad से बात की।
घर के खाने में न्यूट्रिशन की कमी होने के 5 कारण
Senior Dietitian Rhitika Sharma कहती हैं, “हेल्दी डाइट में सिर्फ यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खाते हैं, बल्कि यह भी जरूरी है कि कितनी वैरायटी है और पूरे दिन में प्रोटीन व दूसरे पोषक तत्व कितने लिए जा रहे हैं। इसके अलावा, खाने की मात्रा भी पोषक तत्वों पर निर्भर करती है। आमतौर पर लोगों को पोषक तत्वों की कमी होने के कई कारण हो सकते हैं।
1. रोज का खाना एक जैसा होना
Rhitika Sharma कहती हैं, “अगर सुबह वही नाश्ता, दोपहर में दाल-रोटी और रात में फिर रोटी-सब्जी का रुटीन चल रहा है, तो खाना घर का और साफ-सुथरा होने के बावजूद उसमें वैरायटी कम हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर दिन कोई नया या महंगा फूड खाना जरूरी है। असल बात यह है कि हफ्ते भर में अलग-अलग फूड्स होने चाहिए।”
- कभी मूंग या मसूर की दाल, तो कभी चना, राजमा या लोबिया शामिल करना चाहिए।
- सब्जियों में भी सिर्फ दो-तीन ऑप्शंस के बजाय मौसमी सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
- इसी तरह गेहूं के साथ कभी बाजरा, ज्वार या रागी जैसे साबुत अनाज भी शामिल किए जा सकते हैं।
- इसके अलावा, फल, नट्स और सीड्स को भी डाइट में शामिल करना चाहिए।
2. प्लेट में प्रोटीन बहुत कम होना
Rhitika Sharma ने कहा, “कई लोग मेरे पास आते हैं कि हम खाने में दाल तो लेते हैं, फिर भी प्रोटीन कम क्यों है? जो लोग ऐसा सोचते हैं कि दाल से प्रोटीन पूरा हो सकता है, तो यह गलत है। कई घरों में लोग तीन से चार रोटियां या चावल लेते हैं और साथ में कम मात्रा में दाल, तो ऐसे में शरीर को एनर्जी तो मिल जाती है, लेकिन प्रोटीन जरूरत के अनुसार कम रह सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, एथलीट, प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग के दौरान महिलाओं और बीमारी से रिकवरी कर रहे लोगों की प्रोटीन की जरूरत अलग हो सकती हैं।”
प्रोटीन की कमी पूरा करने के तरीके
- वेजिटेरियन डाइट में दालों के साथ चना, राजमा, लोबिया, सोया, पनीर, दूध और दही जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं।
- नॉन वेजिटेरियन लोग अंडा, मछली या चिकन प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत हो सकते हैं।

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3. फल और हेल्दी फैट्स को अलग समझना
Rhitika Sharma के अनुसार, कई लोगों के लिए खाने का मतलब रोटी, दाल और सब्जी तक ही सीमित रहता है। कई लोग फल या नट्स को हमेशा अलग खाने की चीज मानते हैं, लेकिन बैलेंस्ड डाइट में अलग-अलग फूड ग्रुप्स खाना जरूरी है। फलों में फाइबर, विटामिन, मिनरल्स और दूसरे प्लांट कम्पाउंड होते हैं। रोजाना फलों और नट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। हालांकि, नट्स की मात्रा कम लेनी चाहिए और अगर किसी भी तरह की बीमारी है, तो न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर लेना चाहिए।
- मौसमी फलों को जरूर डाइट में शामिल करना चाहिए।
- बादाम, अखरोट, मूंगफली, अलसी, तिल और चिया सीड्स डाइट में शामिल करना चाहिए।
4. पैकेज्ड फूड ज्यादा लेना
Rhitika Sharma कहती हैं, “कई लोग मेरे पास आते हैं कि मैं तो लंच और डिनर घर का ही खाता हूं, तो भी पोषण पूरा नहीं हो रहा। अक्सर लोग इसे ही बैलेंस्ड डाइट मान लेते हैं, लेकिन चाय के साथ नमकीन, बिस्कुट या चिप्स खाना, खाने के बाद कुछ मीठा खाना, शाम को समोसा या तला-भुना खाने को हमेशा इग्नोर कर देते हैं। पैकेज्ड या बाहर का तला-भुना खाने में कैलोरी, सोडियम, शुगर, सोडे वाले ड्रिंक्स और सैचुरेटेड फैट बहुत ज्यादा होते हैं। इन चीजों से पेट तो भर जाता है, लेकिन इसमें फाइबर या न्यूट्रिशन नामात्र या बिल्कुल नहीं होते। हर किसी को पूरे दिन की डाइट पर चेक रखना चाहिए।”
5. हर किसी के लिए एक जैसी डाइट को सही मानना
Rhitika Sharma के मुताबिक, हर घर में सभी सदस्यों के लिए एक ही तरह का खाना बनता है, लेकिन सभी की उम्र, मेडिकल कंडीशन और काम के अनुसार अलग-अलग जरूरत हो सकती है। किसी को प्रोटीन ज्यादा चाहिए, तो किसी को कैलोरी पर नियंत्रण रखने की जरूरत हो सकती है। कुछ मेडिकल कंडीशन में सोडियम, पोटैशियम, फ्लूड या न्यूट्रिएंट्स पर खास ध्यान देना पड़ सकता है। इसलिए डाइट पर जरूर ध्यान दें।
रिसर्च क्या कहती हैं?
Journal of Preventive Medicine and Hygeine के अनुसार, भारत में वयस्कों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है और इसका कारण खाने में पोषक तत्वों की कमी हो सकता है। इस स्टडी में 2016 और 2021 के NFHS आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसमें पाया गया कि भारत में लोग अभी भी प्रोटीन या फल को अपनी डाइट का हिस्सा नहीं बना रहे हैं। इस स्टडी में बताया गया है कि भारत में गेहूं और चावल की खपत ज्यादा है, लेकिन विटामिन A से भरपूर फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और डेयरी प्रोडक्ट्स बहुत कम है।
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
Rhitika Sharma सलाह देती हैं कि दाल-सब्जी रोटी या चावल खाना अच्छा है, लेकिन कुछ लोग बस इसे ही हेल्दी मानकर रोज यही लेते हैं, तो गलत हो सकता है। दाल में वैरायटी रखें, सब्जियां मौसमी लें, मौसमी फल खाएं और नट्स भी जरूर लें। साथ ही पैकेज्ड या जंक फूड से परहेज रखें।
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निष्कर्ष
Rhitika Sharma कहती हैं कि हर खाने के न्यूट्रिशन गिनने की जरूरत नहीं है, लेकिन खाने में दाल, सब्जी, फलों की वैरायटी रखें। घर का बना खाना ही खाएं। हेल्दी फैट्स के लिए नट्स लें और पानी प्रचुर मात्रा में लें। इस तरह की डाइट लगभग सभी पोषक तत्वों को पूरा करने में मदद कर सकती है।
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FAQ
खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से पोषण पर क्या असर पड़ता है?
चाय और कॉफी में टैनिन और फाइटेट्स होते हैं, जो भोजन में मौजूद आयरन और कैल्शियम से चिपक जाते हैं। इससे शरीर इन मिनरल्स को सोख नहीं पाता और हीमोग्लोबिन कम होने लगता है।खाना पकाने के किस तरीके से सब्जियों के न्यूट्रिएंट्स सबसे ज्यादा सुरक्षित रहते हैं?
सब्जियों को डीप-फ्राई करने के बजाय स्टीमिंग, कम तेल में हल्का भूनना या प्रेशर कुकिंग करना सबसे अच्छा माना जाता है। सब्जियों को हमेशा बड़े टुकड़ों में काटें और काटने से पहले धोएं।
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Sep 03, 2026 18:30 IST
Modified By : Aneesh Rawat Sep 03, 2026 18:30 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Rhitika Sharma