बारिश शुरू होते ही सर्दी-जुकाम, गले में खराश, बदन दर्द और बुखार जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। कई बार लोग इसे मौसम बदलने का असर मानकर घर पर खुद ही एंटीबायोटिक ले लेते हैं और आराम करने लगते हैं, लेकिन हर बुखार सामान्य वायरल इंफेक्शन नहीं होता। मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। मानसून में होने वाली बीमारियों के बारे में हमने Dr. Niraj Kumar, Senior Consultant, ShardaCare Hospital, Greater Noida से बात की।
मानसून में बुखार होने पर 7 बीमारियों का रखें ध्यान
Dr. Niraj Kumar ने बताया कि मानसून से जुड़ी बीमारियों के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य फ्लू या वायरल फीवर जैसे दिखाई देतें हैं। इसलिए सिर्फ लक्षणों को देखकर यह तय करना आसान नहीं होता कि बुखार किस वजह से है। कुछ मामलों में जांच की जरूरत पड़ सकती है।
1. डेंगू
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू की महामारी एक मौसमी पैटर्न होता है, जिसमें ट्रांसमिशन अक्सर बारिश के मौसम के दौरान और उसके बाद बहुत तेजी से होता है। गंभीर लक्षण होने पर डेंगू के मरीजों की मृत्यु हो सकती है।
Dr. Niraj Kumar कहते हैं, “डेंगू एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल इंफेक्शन है। शुरुआत में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली या उल्टी और शरीर पर रैशेज हो सकते हैं। ये लक्षण सामान्य वायरल फीवर से मिलते-जुलते हो सकते हैं। डेंगू में एक जरूरी बात यह है कि अगर डेंगू का बुखार कम हो जाए, तो इसे ठीक नहीं माना जा सकता। डेंगू में गंभीर स्थिति के चेतावनी संकेत अक्सर बुखार उतरने के आसपास दिखाई दे सकते हैं। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।”
2. मलेरिया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मलेरिया संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है। साल 2024 में, दुनिया की लगभग आधी आबादी मलेरिया के रिस्क में थी। इसी साल दुनिया भर में मलेरिया के 28.2 करोड़ मामले दर्ज किए गए थे और इसमें पांच साल से कम उम्र के बच्चों में मलेरिया की गंभीर समस्या का सबसे ज्यादा खतरा होता है।
Dr. Niraj Kumar ने कहा, “मलेरिया के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और ठंड लगना शामिल हैं। कई बार शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए इसे सामान्य वायरल बुखार समझ लिया जाता है। इसका समय पर इलाज कराना जरूरी है, क्योंकि कुछ प्रकार का मलेरिया तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। इसमें मरीज को सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या भ्रम, दौरे, पीलिया, असामान्य रक्तस्राव या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं।”
3. चिकनगुनिया
Dr. Niraj Kumar ने कहा, “चिकनगुनिया भी डेंगू के एडीज मच्छरों से भी फैलने वाला वायरल इंफेक्शन है। इसमें भी पहले मरीज को तेज बुखार होता है, लेकिन चिकनगुनिया में सबसे खास बात है कि मरीज को जोड़ों का तेज दर्द होने लगता है। कुछ मरीजों के जोड़ों में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, थकान, मतली और स्किन पर दाने भी हो सकते हैं। डेंगू और चिकनगुनिया के लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं। इसलिए सिर्फ बुखार और शरीर के दर्द होने पर इसे चिकनगुनिया की बीमारी नहीं मानना चाहिए।”

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4. टाइफाइड
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से फैलता है, जो आमतौर पर दूषित पानी या खाने से होता है। टाइफाइड में मरीज को तेज बुखार आ सकता है, लेकिन इसके साथ थकान, सिरदर्द और पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है।
Dr. Niraj Kumar ने बताया कि बारिश के मौसम में अगर लोग दूषित पानी या उससे बना खाना खा लेते हैं, तो इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। आमतौर पर मानसून के सीजन में यह समस्या बहुत ज्यादा होती है। इसलिए अगर बुखार लगातार बना हुआ है और साथ में पेट से जुड़ी परेशानी भी है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
5. लेप्टोस्पायरोसिस
Dr. Niraj Kumar कहते हैं, “बारिश और जलभराव के दौरान लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा भी बढ़ सकता है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क से फैल सकता है। यह बीमारी खासतौर पर तब होती है, जब उसमें संक्रमित जानवरों का मूत्र मिला होता है। इसमें मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और आंखों में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जिन इलाकों में जलभराव बहुत ज्यादा होता है, उन जगहों पर लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी होने का खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।”
6. वायरल फीवर या सीजनल फ्लू
Dr. Niraj Kumar ने कहा, “हर बुखार डेंगू या मलेरिया नहीं होता। मानसून में कई बार सामान्य वायरल इंफेक्शन और फ्लू भी हो सकते हैं। इनमें बुखार के साथ नाक बहना, गले में खराश, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं। हालांकि, लक्षणों के आधार पर वायरल फीवर और दूसरी इंफेक्शन से जुड़ी हीमारियों में अंतर करना बहुत आसान नहीं होता, इसलिए मरीज को बुखार होने पर डॉक्टर से ही सलाह लेनी चाहिए।”
7. गैस्ट्रोएंटेराइटिस और पेट का इंफेक्शन
Dr. Niraj Kumar का कहना, “बारिश में दूषित पानी या खाने से पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कई बार स्ट्रीट फूड खाने से मरीज को हल्का बुखार, उल्टी, मतली और दस्त हो सकते हैं। बार-बार दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। इसलिए अगर बार-बार उल्टी या दस्त हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”
मानसून में बुखार आने पर क्या करना चाहिए?
Dr. Niraj Kumar लोगों को सलाह दी है कि अगर मानसून में बुखार हो जाए, तो मरीज को इन बातों का ध्यान देना चाहिए।
- मरीज को पर्याप्त आराम करना चाहिए।
- शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।
- खुद से एंटीबायोटिक या दूसरी दवा नहीं लेनी चाहिए।
- डेंगू या मलेरिया जैसी मच्छरों से जुड़ी बीमारियों के लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- खुद से एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन से बचाव की सलाह दी जाती है।
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निष्कर्ष
Dr. Niraj Kumar ने बताया कि बारिश में सर्दी-जुकाम और हल्का बुखार अक्सर सामान्य वायरल इंफेक्शन की वजह से हो सकता है, लेकिन इसे हर बार मामूली मानना ठीक नहीं है। खासकर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों के लक्षण शुरुआत में एक-दूसरे से मिल सकते हैं। इसलिए बुखार लंबे समय तक रहे या बढ़ता जाए, तो समय पर डॉक्टर से चेक कराना चाहिए।
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FAQ
क्या पैरासिटामोल लेने से मानसून की गंभीर बीमारी दब सकती है?
हां, पैरासिटामोल बुखार और दर्द कम कर देती है, लेकिन यह अंदरूनी इंफेक्शन को ठीक नहीं करती। बिना जांच बीमारी बढ़ती रह सकती है।क्या मानसून के बुखार में नहाना चाहिए या नहीं?
तेज बुखार में ठंडे पानी से बिल्कुल न नहाएं। शरीर का तापमान कम करने के लिए गुनगुने पानी की पट्टियां ही इस्तेमाल करें।
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Aug 21, 2026 14:57 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Niraj Kumar