Sun Nov 1, 2026 | 01:04 AM IST

Medically Reviewed by Dr. Aravinda S N , Lead Consultant – Internal Medicine

हर बार कहीं दर्द होने पर पेनकिलर खाना कितना सही? डॉक्टर से जानें इसके नुकसान

पेनकिलर का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जिससे पाचन, किडनी, लिवर और रक्तचाप संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना बार-बार दर्द निवारक लेने से बचें और दर्द के मूल कारण का पता लगाएं।
हर बार कहीं दर्द होने पर पेनकिलर खाना कितना सही? डॉक्टर से जानें इसके नुकसानहर बार कहीं दर्द होने पर पेनकिलर खाना कितना सही? डॉक्टर से जानें इसके नुकसान

अक्सर लोग सिर दर्द, जोड़ों में दर्द और शरीर में किसी और जगह दर्द होने पर पेन किलर का सेवन करने लगते हैं। कई बार लोग हल्के दर्द के बाद ही इनका सेवन कर लेते हैं। ऐसे में इनका जरूरत से ज्यादा सेवन करने से स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। आइए इस बारे में Dr. Aravinda S N, Lead Consultant - Internal Medicine, Aster RV Hospital, Bengaluru से जानें।

पेनकिलर का अधिक सेवन करने से क्या होता है?

डॉ. अरविंदा के अनुसार, दर्द निवारक दवाओं यानी पेन किलर का इस्तेमाल आमतौर पर सिरदर्द, बदन दर्द, जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों में दर्द और मासिक धर्म यानी पीरियड्स की ऐंठन को कम करने के लिए किया जाता है। हालांकि ये दवाएं अस्थायी राहत दे सकती हैं, लेकिन दर्द के असल कारण को समझे बिना हर बार दर्द होने पर इन्हें लेना हानिकारक हो सकता है। दर्द निवारक दवाओं का बार-बार या गलत इस्तेमाल शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित कर सकता है और कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

डॉ. अरविंदा आगे कहते हैं, दर्द निवारक दवाएं अलग-अलग श्रेणियों (categories) में आती हैं और शरीर पर उनका प्रभाव अलग-अलग होता है। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में पैरासिटामोल और नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (एनएसएआईडी) शामिल हैं, जैसे कि आइबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक और नेप्रोक्सन। हालांकि ये दवाएं दर्द, सूजन या बुखार को कम करने में मदद करती हैं, लेकिन ये सभी के लिए सही नहीं हैं।

1. पाचन की समस्याओं का खतरा

NSAIDs (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स) के बार-बार इस्तेमाल से जुड़ी एक प्रमुख चिंता पेट और पाचन तंत्र पर इसका प्रभाव है। ये दवाएं पेट की परत में जलन पैदा कर सकती हैं, जिससे एसिडिटी, गैस्ट्राइटिस, अल्सर और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से ही पाचन संबंधी समस्याएं हैं या अल्सर की हिस्ट्री रही है, उन्हें अधिक खतरा हो सकता है।

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2. किडनी के कार्य होते हैं प्रभावित

कुछ दर्द निवारक दवाओं का नियमित या अधिक सेवन किडनी के कार्य को भी प्रभावित कर सकता है। NSAIDs किडनी में ब्लड फ्लो को कम कर सकते हैं, खासकर किडनी की समस्याओं, डिहाइड्रेशन, ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में।

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3. हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

पेन किलर का सेवन करने से कुछ लोगों को ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी या शरीर में पानी जमा होने की समस्या भी हो सकती है। कुछ NSAIDs दिल से जुड़ी कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा बढ़ा सकते हैं, खासकर जब उन्हें अधिक मात्रा में या लंबे समय तक लिया जाए।

4. लिवर से जुड़ी समस्याएं

पैरासिटामोल आमतौर पर अनुशंसित खुराक में लेने पर ठीक रहता है। हालांकि, निर्धारित खुराक से ज्यादा लेने या गलती से पैरासिटामोल युक्त कई दवाओं को एक साथ लेने से लिवर को गंभीर नुकसान हो सकता है।

5. बढ़ती है सिरदर्द की समस्या

एक और चिंता की बात है दवा के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाला सिरदर्द, जो लोग बार-बार होने वाले सिरदर्द के लिए अक्सर दर्द निवारक दवाएं लेते हैं, उनमें एक ऐसी स्थिति विकसित हो सकती है, जहां दवाएं खुद ही सिरदर्द को और अधिक बढ़ा देती हैं।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2025 में NCBI में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाओं) का रोजाना या लंबे समय तक सेवन करना खतरनाक हो सकता है। पेनकिलर्स का नियमित इस्तेमाल पेट में अल्सर व ब्लीडिंग, दिल के दौरे का खतरा, किडनी को नुकसान और अस्थमा के मरीजों में सांस की परेशानी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है, खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए। इसलिए, ये दवाएं सिर्फ हल्के और अस्थायी दर्द में कुछ ही दिनों के लिए सुरक्षित हैं। अगर दर्द लगातार बना रहे और रोज दवा की जरूरत पड़े, तो खुद से खाने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टर से सलाह कब लें?

डॉ. अरविंदा कहते हैं, दर्द को बार-बार दबाने के बजाय, इसके कारण का पता लगाना जरूरी है। लगातार, बार-बार होने वाले या अस्पष्ट दर्द की जांच डॉक्टर से करानी चाहिए। दर्द निवारक दवा का चुनाव, उसकी मात्रा और अवधि व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और पहले से ली जा रही दवाओं पर निर्भर होनी चाहिए।

दर्द निवारक दवाएं यानी पेन किलर सही तरीके से लेने पर फायदेमंद हो सकती हैं, लेकिन हर तरह की परेशानी के लिए इन्हें लेना एक आदत नहीं बन जानी चाहिए। अनावश्यक कॉम्प्लीकेशन्स से बचने के लिए इनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना और डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

सिरदर्द, बदन दर्द या जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए बिना सोचे-समझे और बार-बार पेन किलर्स (जैसे आइबुप्रोफेन या पैरासिटामोल) का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे पाचन तंत्र में अल्सर व ब्लीडिंग, किडनी और लिवर की कार्यप्रणाली में बाधा, हाई ब्लड प्रेशर और दवा के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाला सिरदर्द जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए, दर्द को बार-बार दबाने के बजाय उसके असली कारण का पता लगाना चाहिए और किसी भी संभावित साइड इफेक्ट या कॉम्प्लीकेशन से बचने के लिए पेन किलर्स का सेवन हमेशा जिम्मेदारी से और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

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FAQ

  • ज्यादा पेन किलर खाने से क्या होता है?

    जरूरत से ज्यादा पेन किलर का सेवन करने से व्यक्ति को किडनी, लिवर डैमेज, पेट में अल्सर, ब्लीडिंग, दिल की बीमारी, पैरों में सूजन, थकान और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो सकती है।
  • सिरदर्द से राहत के लिए क्या करें?

    सिरदर्द की समस्या से राहत के लिए दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं, ठंडी या गर्म सिकाई करें, शांति में आराम करें, हल्की मालिश करें और कैफीन का सेवन सीमित करें। 

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 31, 2026 23:50 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr. Aravinda S N