घर पर पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल चेक करने पर अगर रीडिंग 90% आती है, तो लोग इसे ज्यादा गंभीर नहीं मानते, क्योंकि लोगों को शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के नुकसान की ज्यादा जानकारी नहीं है। कई बार व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी नहीं होती, तो ऑक्सीजन लेवल 90% होने पर इसे इग्नोर कर दिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ऑक्सीजन लेवल 90% होना नॉर्मल है या फिर डॉक्टर से जांच कराई जाए। इस बारे में हमने Bangalore के Aster CMI Hospital के Interventional Pulmonology विभाग के Lead Consultant Dr. Sunil Kumar K से बात की। उन्होंने बताया कि अगर ऑक्सीजन लेवल 90% है, तो यह सामान्य नहीं है। ऐसा होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि इसका कारण ब्लड सर्कुलेशन की कमी हो सकती है।
क्या 90% ऑक्सीजन लेवल नॉर्मल है?
Dr. Sunil Kumar कहते हैं, “आमतौर पर एक सेहतमंद वयस्क में ब्लड का ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल यानी SpO₂ 95 से 100% के बीच रहता है। अगर किसी के पल्स ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन लेवल 90% दिख रहा है, तो यह सामान्य से कम है। दरअसल, खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के पीछे फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां, सांस की नली में इंफेक्शन या हार्ट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, अगर कभी-कभार रीडिंग कम आ रही है, तो इसकी वजह ठंडी उंगलियां, हाथों में ब्लड सर्कुलेशन कम होने या ऑक्सीमीटर को ठीक से न लगाना भी हो सकती है। ऐसी कंडीशन में हाथों को हल्का गर्म करके ऑक्सीमीटर को सही तरीके से लगाकर दोबारा रीडिंग चेक करनी चाहिए। इसके बाद भी अगर ऑक्सीजन लेवल फिर भी 90% के आसपास है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।”
ऑक्सीजन लेवल 90% होने पर क्या करना चाहिए?
Dr. Sunil Kumar का कहना है, “अगर ऑक्सीजन का लेवल 90% तक गिर गया है, तो सबसे पहले बैठ जाएं और घबराने के बजाय पल्स ऑक्सीमीटर को चेक करें। इसके अलावा, मरीज को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
- मरीज को किसी भी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करने से बचना चाहिए।
- हाथ को गर्म करके कुछ देर आराम से बैठने के बाद दोबारा रीडिंग लें।
- अगर दो या तीन बार रीडिंग में ऑक्सीजन का लेवल 90% के आसपास बना है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, छाती में दर्द हो, होंठ नीले पड़ने लगें या बहुत ज्यादा नींद आने लगे, तो तुरंत इमरजेंसी में डॉक्टर को दिखाएं।
- ऑक्सीजन लेवल कम होने पर अपनी मर्जी से दवाएं न लें।
- ऑक्सीजन कम होने पर ऑक्सीजन थेरेपी शुरू न करें।
- जिन लोगों को पहले से फेफड़ों की बीमारी है, उन्हें अपने डॉक्टर की बताई ऑक्सीजन लिमिट का ध्यान रखना चाहिए।
oxygen level 90 percent in body
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ऑक्सीजन की कमी होने पर कौन-से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
Dr. Sunil Kumar ने कहा कि ब्लड में ऑक्सीजन का लेवल नॉर्मल से कम होने की कंडीशन को हाइपोक्सिमिया (Hypoxaemia) कहा जाता है। हालांकि, इन लक्षणों के आधार पर ऑक्सीजन की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती और कई बार ऑक्सीजन 90% होने पर भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। आमतौर पर ऑक्सीजन की कमी होने पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना
- सामान्य से ज्यादा तेजी से सांस चलना
- हार्ट बीट का तेज होना
- सिरदर्द और चक्कर आना
- थकान महसूस होना
- फोकस करने में परेशानी होना
- गंभीर स्थिति में सतर्कता कम होना
- होंठों या उंगलियों का रंग नीला पड़ना
ऑक्सीजन लेवल 90% होने पर लक्षण न दिखाई दे, तो क्या करें?
Dr. Sunil Kumar कहते हैं, “अगर किसी का ऑक्सीजन लेवल 90% है और उसे कोई परेशानी महसूस नहीं हो रही है, तो भी इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर ऑक्सीजन लेवल 90% होने के बाद भी अगर व्यक्ति को तुरंत सांस फूलने या चक्कर आने जैसे लक्षण न हो, तो भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। कई बार ऑक्सीजन का लेवल धीरे-धीरे कम होते है, तो कुछ लोगों को इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। हालांकि, जिन लोगों को फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं, उनके लिए ऑक्सीजन लेवल कुछ और हो सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को डॉक्टर से रेगुलर फॉलो-अप लेते रहना चाहिए।"
शरीर में ऑक्सीजन कम होने के कारण
Mayo Clinic के मुताबिक, शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने के ये कारण हो सकते हैं।
- अगर कोई समुद्र तल से बहुत ज्यादा ऊंचाई पर रहता है।
- फेफड़ों की ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए सांस पर्याप्त तरीके से न लेना।
- फेफड़ों तक पर्याप्त ब्लड फ्लो या ऑक्सीजन का न पहुंचना।
- ऑक्सीजन को ब्लड फ्लो में जाने में दिक्कत होना और कार्बन डाइऑक्साइड गैस का बाहर निकलने में परेशानी होना।
- हार्ट में ब्लड फ्लो की दिक्कत होना।
- हीमोग्लोबिन प्रोटीन में बदलाव होना।
- एनीमिया की स्थिति में शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचना।
- बच्चों में जन्मजात दोष या हार्ट से जुड़ी समस्या होना।
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निष्कर्ष
ऑक्सीजन लेवल 90% होना नॉर्मल नहीं है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर व्यक्ति को किसी भी तरह के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे और पल्स ऑक्सीमीटर में रीडिंग 90% से कम आ रहा है, तो इसे सही तरीके से जांच लें। इसके बाद दोबारा अच्छे से उंगली में ऑक्सीमीटर लगाए। अगर फिर भी ऑक्सीजन लेवल लगातार 90% के आसपास है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और खुद से किसी भी तरह की दवा न लें।
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FAQ
क्या रूम एयर में 6 मिनट वॉक टेस्ट से ऑक्सीजन ड्रॉप का पता लगाया जा सकता है?
अगर आराम की स्थिति में ऑक्सीजन 94% या उससे अधिक है, लेकिन 6 मिनट तक कमरे में सामान्य गति से टहलने के बाद SpO2 में 3% से ज्यादा कम हो गया है, तो यह फेफड़ों में छिपे हुए इंफेक्शन, सूजन या पल्मोनरी फाइब्रोसिस का शुरुआती संकेत है।क्या घर पर बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार हाई-फ्लो ऑक्सीजन लेना नुकसानदायक हो सकता है?
बहुत ज्यादा मात्रा में या बिना जरूरत के ऑक्सीजन लेने से ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी हो सकती है। इससे फेफड़ों के टिश्यू में सूजन आ सकती है, आंखों के रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है और COPD के मरीजों में रेस्पिरेटरी अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।
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Current Version
Oct 21, 2026 18:31 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Sunil Kumar K
