विटामिन डी की कमी होने गंभीर समस्या बनी हुई है। लोग सारा दिन घर के अंदर या ऑफिस में रहते हैं, जिससे लोगों को धूप नहीं मिलती। इसके अलावा, फूड्स में भी विटामिन D कम मिल पाता है। इस कारण भी लोगों में विटामिन डी कम हो रहा है और अगर लगातार विटामिन डी कम रहता है, तो इससे शरीर कैल्शियम को अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए विटामिन डी की कमी को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में सवाल रहता है कि रिपोर्ट में विटामिन डी का लेवल कितना होना चाहिए? इस बारे में Dr. Srikanth Madikattu, Consultant, Orthopaedic Surgeon and Joint Replacement Surgeon, Manipal Hospital, Baner, Pune कहते हैं कि रिपोर्ट में विटामिन डी की नॉर्मल 20 ng/mL से 50 ng/mL के बीच होना चाहिए।
विटामिन D क्यों महत्वपूर्ण है?
Medlineplus के अनुसार, विटामिन डी फैट सॉल्युबल है, जिसे शरीर अपने फैटी टिश्यू और लिवर में जमा कर सकता है। इसका सबसे जरूरी काम कैल्शियम को अवशोषित करना और कैल्शियम शरीर की हड्डियों के निर्माण और मजबूती के लिए काम करता है। इसके अलावा, विटामिन डी मसल्स, नर्व और इम्यून सिस्टम के फंक्शन में मदद कर सकता है।
विटामिन D कम होने पर कौन से टेस्ट होते हैं?
Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं, “विटामिन डी के लेवल की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है और रिपोर्ट में सिर्फ विटामिन डी के लेवल को जानने के साथ पूरी हेल्थ कंडीशन को समझना जरूरी है। इसके साथ यह बात भी ध्यान देने वाली है कि हर व्यक्ति को रूटीन में विटामिन D टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है। विटामिन डी का टेस्ट कराने की सलाह उन लोगों को दी जाती है, जिनमें इसकी कमी सबसे ज्यादा देखी जाती है।”
Medlineplus के मुताबिक, विटामिन D को जांचने के लिए आमतौर पर 25-hydroxy Vitamin D या 25(OH)D ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है। इस टेस्ट को कराने से पहले फास्टिंग करने की जरूरत नहीं होती। टेस्ट के दौरान इंजेक्शन के जरिए ब्लड सैंपल निकाला जाता है।
विटामिन डी कितना होना चाहिए?
NIH Office of Dietary Supplements के अनुसार, विटामिन डी के नॉर्मल और कम लेवल ऐसे होते हैं।
- 20 ng/mL या उससे ऊपर - यह लेवल होने पर माना जाता है कि व्यक्ति की हड्डियां और हेल्थ नॉर्मल हैं।
- 12 से 20 ng/mL - लेवल कम माना जाता है।
- 12 ng/mL से कम - विटामिन डी की कमी का रिस्क हो सकता है।
- 50 ng/mL से ऊपर - ज्यादा विटामिन डी का लेवल होने पर इसके कई रिस्क भी हो सकते हैं।
Dr. Srikanth Madikattu बताते हैं कि हर लैब में रेंज थोड़ी-बहुत कम-ज्यादा हो सकती है, लेकिन 30 ng/mL से ऊपर को आमतौर पर नॉर्मल माना जाता है और 20 ng/mL से कम होने पर विटामिन डी की कमी माना जाता है।
vitamin d level
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क्या उम्र के हिसाब से Vitamin D का लेवल अलग होता है?
Dr. Srikanth Madikattu कहते हैं, “यहां एक जरूरी फर्क समझना जरूरी है कि उम्र के हिसाब से विटामिन डी की जरूरत बदलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर उम्र के लिए अलग-अलग नॉर्मल रेंज तय हो।”
NIH के अनुसार विटामिन D की रोजाना की रिकमंड डोज उम्र के साथ बदलती है।
- जन्म से 12 महीने - 400 IU
- 1 से 18 साल - 600 IU
- 19 से 70 साल - 600 IU
- 71 साल और उससे ज्यादा - 800 IU
किन लोगों को विटामिन डी का टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है?
Medlineplus के अनुसार, विटामिन डी की कमी के इन लोगों को टेस्ट कराने का सलाह दी जा सकती है।
- 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में विटामिन D बनना कम हो सकता है।
- मोटापे से ग्रस्त लोग
- जिन लोगों ने वजन घटाने के लिए बैरिएट्रिक सर्जरी कराई है।
- मिर्गी या कुछ खास दवाएं लेने वाले लोग
- ऑस्टियोपोरोसिस या कमजोर हड्डी के मरीज
- जिन लोगों को धूप कम मिलती है।
- जिन लोगों को क्रोहन, अल्सरेटिव कोलाइटिस या सेलिएक रोग है।
रिपोर्ट में विटामिन डी कम आने पर क्या करें?
Dr. Srikanth Madikattu ने कहा, “जिन लोगों का विटामिन डी का लेवल कम आता है, उन्हें खुद से हाई डोज विटामिन सप्लीमेंट्स नहीं लेने चाहिए। डॉक्टर रिपोर्ट, लक्षण, डाइट और हेल्थ कंडीशन देखकर ही सप्लीमेंट की मात्रा तय करते हैं। ऐसे में सिर्फ ज्यादा धूप लेना ही काफी नहीं होता।”
निष्कर्ष
विटामिन D की जरूरत उम्र के हिसाब से बदल सकती है, लेकिन ब्लड रिपोर्ट का नॉर्मल लेवल सिर्फ उम्र देखकर तय नहीं किया जा सकता है। लोगों को रिपोर्ट देखकर खुद ही विटामिन डी सप्लीमेंट्स या डोज नहीं लेने चाहिए। इसके बजाय डॉक्टर की सलाह पर दवा या सप्लीमेंट्स लेना बहुत महत्वपूर्ण है।
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FAQ
बहुत ज्यादा विटामिन D लेने से क्या नुकसान हो सकता है?
बहुत ज्यादा विटामिन D से खून में कैल्शियम बढ़ जाता है, जिससे किडनी स्टोन, जी मिचलाना और किडनी को नुकसान हो सकता है।क्या केवल भोजन से रोजाना की विटामिन D की जरूरत पूरी हो सकती है?
शाकाहारी भोजन में प्राकृतिक रूप से बहुत कम विटामिन D होता है। हालांकि, फोर्टिफाइड दूध, मशरूम, अंडे की जर्दी और फैटी फिश में यह पाया जाता है, लेकिन रोजाना की जरूरत पूरी करने के लिए धूप या सप्लीमेंट्स ही सबसे मुख्य स्रोत हैं।
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Oct 09, 2026 16:07 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Srikanth Madikattu
