प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज होना एक आम, लेकिन ध्यान देने वाली स्थिति होती हैं। यह समस्या आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दूसरे या तीसरे महीने में सामने आती है। जेस्टेशनल डायबिटीज की समस्या तब होती है, जब शरीर गर्भधारण के दौरान हार्मोनल बदलावों के चलते पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है या उसे सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। हालांकि, Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant- Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida कहती हैं कि सही लाइफस्टाइल और खान-पान की मदद से जेस्टेशनल डायबिटीज की समस्या से बचाव संभव है
प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज से कैसे बचाव करें?
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव के लिए आप इन बातों का ध्यान रखें-
1. सही और संतुलित आहार अपनाएं
प्रेग्नेंसी में खाने का मतलब यह नहीं है कि आप दो लोगों के बराबर खाना शुरू कर दें, बल्कि इसका मतलब है कि आप जो भी खाएं वह पोषण से भरपूर हो। प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव के लिए आप अपने खाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स से भरपूर भोजन जैसे साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल शामिल करें। ये चीजें खून में शुगर के लेवल को अचानक बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं।
इसके साथ ही सफेद चीनी, मैदा, पैकेट बंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाइयां और तली-भुनी चीजें इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं, जिससे पूरी तरह परहेज करना चाहिए। एक बार में बहुत सारा खाना खाने के बजाय आप दिनभर में 4 से 5 बार छोटे-छोटे मील्स लें। इससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है।
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2. शारीरिक रूप से एक्टिव रहें
अगर आपके डॉक्टर ने आपकी प्रेग्नेंसी को नॉर्मल बताई है और किसी तरह का बेड रेस्ट नहीं कहा है तो हल्की शारीरिक गतिविधियां करना बहुत जरूरी है। सुबह या शाम के समय 30 मिनट की हल्की वॉक करने से मांसपेशियों द्वारा इंसुलिन के इस्तेमाल को बेहतर बना सकती हैं। ध्यान रहे हमेशा किसी एक्सपर्ट की देखरेख में ही योगासन या प्राणायाम करें।
3. वजन और हाइड्रेशन का ध्यान रखें
प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव के लिए महिलाओं को अपने वजन को कंट्रोल रखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही हाइड्रेशन का भी खास ध्यान रखने के लिए कहा जाता है। प्रेग्नेंसी में वजन का बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन वजन अचानक बहुत तेजी से नहीं बढ़ना चाहिए। साथ ही, दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। कई बार डिहाइड्रेशन भी शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। हाइड्रेटेड रहने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं।
Tips-to-prevent-gestational-diabetes
Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, प्रेग्नेंट होने से पहले, आप लाइफस्टाइल में बदलाव करके जेस्टेशनल डायबिटीज को रोक सकती हैं। इसमें अगर आपका वज़न ज़्यादा है तो वजन कम करना, हेल्दी डाइट लेना और रेगुलर एक्सरसाइज करना शामिल है।
4. समय पर जांच और स्क्रीनिंग करवाएं
प्रेग्नेंसी के दौरान समय-समय पर जांच करना और स्क्रीनिंग करना बहुत जरूरी है। इसलिए, डॉक्टर द्वारा बताए गए ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट या ब्लड शुगर की जांच समय पर जरूर करवाएं। शुरुआती स्टेज में ही शुगर का पता चल जाने से इसे मैनेज करना बहुत आसान हो जाता है।
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डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?
प्रेग्नेंसी का समय महिलाओं के जीवन की सबसे खूबसूरत और सेंसिटिव पलों में से एक होता है। जेस्टेशनल डायबिटीज से डरने के बजाय थोड़ी सी सावधानी और सही खान-पान से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। अगर कभी डाइट या एक्सरसाइज को लेकर कोई कंफ्यूजन हो तो अपनी मर्जी से कुछ करने के बजाय अपने गाइनेकोलॉजिस्ट या डाइटीशियन से कंसल्ट करें।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में जेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन, नियमित रूप से हल्की शारीरिक गतिविधि या योग करने से जेस्टेशनल डायबिटीज से बचाव हो सकता है। इसके साथ ही समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाना और नियमित रूप से अपनी दवाइयां लेनी चाहिए।
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FAQ
प्रेग्नेंट लेडी का शुगर लेवल कितना होना चाहिए?
प्रेग्नेंटी महिलाओं का शुगर लेवल आमतौर पर खाली पेट 95 mg/dL से कम और खाने के 1 घंटे बाद 140 mg/dL से कम होना चाहिए।प्रेग्नेंसी में डायबिटीज हो जाए तो क्या करें?
प्रेग्नेंसी में डायबिटीज होने पर डॉक्टर और डायटीशियन से कंसल्ट करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर ब्लड शुगर लेवल मॉनिटर करें और उनकी दी गई गाइडलाइन्स के अनुसार खान-पान और इंसुलिन या दवा का पालन करें।
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Nov 04, 2026 17:09 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani
