अहोई अष्टमी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, लेकिन जब बात गर्भवती महिलाओं की आती है तो मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। क्या प्रेग्नेंसी में अहोई अष्टमी का व्रत रखना सुरक्षित है? क्या प्रेग्नेंट महिलाएं निर्जला व्रत रख सकती हैं? प्रेग्नेंसी में अहोई अष्टमी का व्रत कैसे करें? अगर कोई महिला प्रेग्नेंसी में व्रत रख रही है तो उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? आइए इस लेख में आयुर्वेदा की डायरेक्टर, स्त्री रोग विशेषज्ञ और आयुर्वेदिक डॉ. चंचल शर्मा (Ayurvedic Dr. Chanchal Sharma, Director and Gynecologist, Asha Ayurveda) से जानते हैं।
क्या प्रेग्नेंसी के दौरान अहोई अष्टमी का व्रत रख सकते हैं?
डॉ. चंचल शर्मा बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिला और गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत सबसे ज्यादा जरूरी होती है। इसलिए, इस समय महिलाओं का निर्जला रहना या पूरे दिन भूखे रहकर व्रत रखने की सलाह नहीं दी जाती है। प्रेग्नेंसी में शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा पोषक तत्वों, पानी और एनर्जी की जरूरत होती है। लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से कमजोरी, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और ब्लड शुगर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, प्रेग्नेंट महिलाओं को अपनी सेहत का खास ध्यान रखते हुए व्रत के नियमों में थोड़ा बदलाव करना चाहिए।
साल 2021 में Journal Of Nutritional Science जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान सही हाइड्रेशन एम्नियोटिक द्रव के संतुलन को बनाए रखने के लिए जरूरी है। पानी का सेवन कम होने से एम्नियोटिक द्रव की कमी हो सकती है, जो भ्रूण की स्थिति और विकास को प्रभावित करती है।
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अहोई अष्टमी का व्रत रखते समय इन बातों का रखें ध्यान
डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत रखते समय प्रेग्नेंट महिलाओं को अपना खास ध्यान रखना चाहिए।
1. प्रेग्नेंसी में निर्जला व्रत रखने से बचें
अहोई अष्टमी का व्रत ज्यादातर महिलाएं निर्जला रखती हैं। इस दौरान वे सूर्योदय से लेकर शाम को तारें देखने के बाद ही पानी पीती हैं, लेकिन प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है। प्रेग्नेंसी में शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत होती है। पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, प्रेग्नेंसी में निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए।
2. व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें
प्रेग्नेंसी में हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है। कुछ महिलाओं की प्रेग्नेंसी नॉर्मल होती है, जबकि कुछ को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एनीमिया या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। खासकर अगर आपकी प्रेग्नेंसी हाई रिस्क है या कोई कॉम्प्लीकेशन हो।
3. व्रत के दौरान फल और पौष्टिक आहार लें
अगर डॉक्टर ने आपको व्रत रखने की परमिशन दी है तो पूरे दिन भूखे रहने के बजाय फलाहार करें। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व और एनर्जी मिलती है। आप अपने व्रत के दौरान ताजे फल, दूध, दही, मखाने, नारियल पानी आदि का सेवन कर सकते हैं। ध्यान रखें कि भोजन की मात्रा आपकी सेहत, प्रेग्नेंसी के स्टेज और डॉक्टर की सलाह के अनुसार होना चाहिए।
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4. ज्यादा देर तक भूखे न रहें
प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक खाली पेट रहने से ब्लड शुगर का लेवल कम हो सकता है। इसलिए, व्रत के दौरान थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाती रहें। अगर आपको डॉक्टर ने नियमित अंतर पर भोजन करने या दवाइयां लेने की सलाह दी है तो उसका पालन जरूर करें।
5. ज्यादा मेहनत और भागदौड़ करने से बचें
अहोई अष्टमी के दिन घरों में पूजा की तैयारियां की जाती हैं। महिलाएं घर की सफाई, पूजा की व्यवस्था और अन्य कामों में व्यस्त रहती हैं। हालांकि, प्रेग्नेंसी में महिलाएं इस दिन ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचने की कोशिश करें। लंबे समय तक खड़े रहें और भारी सामान उठाने से बचें।
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इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉ. चंचल शर्मा का कहना है कि व्रत के दौरान अगर आपको चक्कर आना, बहुत ज्यादा कमजोरी, सिरदर्द, धड़कन तेज होना, बेहोशी जैसा महसूस होना या लगातार उल्टी होने जैसी परेशानी हों तो व्रत तुरंत तोड़ दें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से कंसल्ट करें। इसके अलावा, अगर गर्भ में शिशु की हलचल महसूस होने लगी है और उसकी गतिविधियों में कमी हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
निष्कर्ष
प्रेग्नेंसी में अहोई अष्टमी का व्रत रखना है या नहीं, इसका फैसला हमेशा अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। प्रेग्नेंसी में निर्जला व्रत या लंबे समय तक भूखे रहना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए अपनी आस्था बनाए रखते हुए फलाहार करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और सही तरह से शरीर को आराम दें।
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FAQ
क्या गर्भवती महिलाओं को निर्जला उपवास रखना चाहिए?
नहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान निर्जला व्रत रखना मां और गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इससे डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और ब्लड प्रेशर लो होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।व्रत के दौरान गर्भवती महिलाएं फलाहार में क्या-क्या खा सकती हैं?
व्रत के दौरान शरीर में एनर्जी बनाए रखने के लिए आप फलाहार में फल, दूध, दही, मखाने, बादाम-अखरोट आदि चीजों का सेवन कर सकते हैं। लंबे समय तक भूखा रहने के बजाय हर 2 से 3 घंटे में थोड़ा-थोड़ा कुछ न कुछ खाते रहें।
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Oct 30, 2026 16:33 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Chanchal Sharma
