Fri Sep 11, 2026 | 05:59 PM IST

Medically Reviewed by Edwina Raj , Nutritionist & Dietician

सरसों तेल में खाना बनाना असल में कितना सेहतमंद है? एक्सपर्ट से जानें

सरसों का तेल हमेशा से शुद्ध माना गया है और कई भारतीय घरों में पूरी तरह से इसी का इस्तेमाल किया जाता है हालांकि, आज हम जानेंगे क्या रोजाना सरसों के तेल में ही खाना बनाना सेहत के लिए फायदेमंद है?

रोजाना खाना पकाने के लिए सरसों का तेल एक अच्छा विकल्प हो सकता है, बशर्ते इसे सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जाए। ऐसा इसलिए कि इस तेल में मिलने वाले फैट के कण कुछ हद तक तो सेहत के लिए फायदेमंद हैं लेकिन रेगुलर इस्तेमाल के कुछ नुकसान हो सकते हैं। इस बारे में हमने विस्तार से Ms. Edwina Raj, Head of Services - Clinical Nutrition & Dietetics, Aster CMI Hospital, Bangalore से बात की जिन्होंने बताया कि क्या रोजाना खाना पकाने के लिए सरसों का तेल अच्छा है?

सरसों तेल में खाना बनाना असल में कितना सेहतमंद है?

एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि हमारे घरों में सरसों के तेल तो सबसे शुद्ध तेल माना जाता है। दरअसल, आमतौर पर भारत में सरसों की अच्छी खेती होती है और लोग सरसों को पीसकर इसका तेल ही इस्तेमाल करते हैं। चूंकि, ये घर में बना तेल है तो इसे सेहत के लिए सुरक्षित भी माना जाता है। इसमें मुख्य रूप से सरसों का तेल अनसैचुरेटेड फैट्स से भरपूर होता है। इनमें कुछ मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं।

साल 2023 में International Journal of Multidisciplinary Research and Development में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, मोनोअन्सेचुरेटेड फैट खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL), ब्लड प्रेशर और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं जो कि न्यूरल हेल्थ के लिए फायदेमंद है।

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एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है सरसों का तेल

सरसों का तेल एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है जो कि जोड़ों के दर्द को कम करने के साथ हड्डियों को आराम दिलाने में मददगार है। इस तेल से जोड़ों की नमी बढ़ती है और जोड़ों में दर्द की समस्या कम हो जाती है। साथ ही, इसका तेज स्वाद भारतीय व्यंजनों का मजा बढ़ा देता है। यह पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों में नसों को डैमेज होने से बचाने (neuroprotective) का काम कर सकता है।

खाने से पहले सरसों के तेल से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान

एक जरूरी बात यह है कि सरसों के तेल में 'इरूसिक एसिड' (erucic acid) होता है। यह एक तरह का फैटी एसिड है, जिसके ज्यादा सेवन से सेहत को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। जैसे

  • ज्यादा मात्रा में सरसों तेल का सेवन करने से दिल की मांसपेशियों के रेशों में फैट जमा हो सकता है, जिससे दिल की पंप करने की ताकत कम हो सकती है। इससे धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो जाता है। इससे हाई बीपी की समस्या बढ़ सकती है।
  • सरसों का तेल लिवर के लिए भी काफी नुकसानदेह है। NIH में प्रकाशित शोध के अनुसार जानवरों पर हुई स्टडीज से पता चलता है कि ज्यादा मात्रा में 'इरूसिक एसिड' (erucic acid) के सेवन से फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। इससे लिवर के वजन और एंजाइम के लेवल में बदलाव आ सकता है।

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हालांकि, भारत में खाना पकाने के लिए पारंपरिक सरसों का तेल बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है और खाने वाले तेलों में इरूसिक एसिड की मात्रा पर नियम लागू हैं। इसलिए, ग्राहकों को लेबल देखकर ही ऐसे उत्पाद खरीदने चाहिए जो खाने के लिए मंजूर हों, न कि वे तेल जो सिर्फ़ मालिश या खाने के अलावा दूसरे कामों के लिए बेचे जाते हैं।

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कुकिंग में इन कामों के लिए इस्तेमाल करें सरसों का तेल?

एक्सपर्ट एडविना कहती हैं कि सरसों के तेल का 'स्मोक पॉइंट' काफी ज्यादा होता है, जिससे यह आम खाना पकाने के तरीकों जैसे कि

  • सॉटे करने
  • तलने के लिए 
  • तड़का लगाने के लिए

हालाकिं, तेल से बहुत ज्यादा धुआं नहीं निकलने देना चाहिए, क्योंकि ज्यादा गर्म करने से फैट खराब हो सकते हैं और ऐसे तत्व बन सकते हैं जो सेहत के लिए अच्छे नहीं होते। कुल मिलाकर, रोजाना खाना पकाने के लिए, खासकर पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में, सरसों के तेल को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन इसे ऐसा "हेल्दी ऑयल" नहीं माना जाना चाहिए जो खराब खान-पान की कमियों को पूरा कर सके।

सबसे जरूरी बात ये है कि सही मात्रा में तेल का इस्तेमाल करें और बार-बार गर्म किए गए तेल से बचें। हेल्दी लोगों के लिए ये तेल ठीक है लेकिन जिन लोगों को कोई खास बीमारी है या जिनकी खान-पान की जरूरतें अलग हैं, उन्हें खाना पकाने के तेल के चुनाव के बारे में डॉक्टर या रजिस्टर्ड डायटीशियन से सलाह लेनी चाहिए। साथ ही, सरसों के तेल के साथ-साथ मूंगफली, राइस ब्रान, तिल, सूरजमुखी या जैतून के तेल जैसे दूसरे सही तेलों का इस्तेमाल करने से फैटी-एसिड के सेवन में विविधता आती है और संतुलित आहार बनाए रखने में मदद मिलती है।

निष्कर्ष:

हालांकि, तेल का प्रकार और गुणवत्ता मायने रखती है इसलिए लोगों को किसी भरोसेमंद ब्रांड का 'फूड-ग्रेड' सरसों का तेल चुनना चाहिए। एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए और हर खाने के लिए सिर्फ एक ही तेल पर निर्भर रहने के बजाय समय-समय पर अलग-अलग तरह के हेल्दी कुकिंग ऑयल्स का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि सभी कुकिंग ऑयल्स में कैलोरी ज्यादा होती है और इनके ज्यादा सेवन से वजन बढ़ सकता है।

FAQ

  • सरसों का तेल लगाना कितना फायदेमंद है? 

    सरसों का तेल लगाना इसलिए फायदेमंद है क्योंकि ये एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है जो कि सूजन को कम करने में मददगार है। इसके अलावा ये एंटी बैक्टीरियल गुणों से जो कि स्किन इंफेक्शन से बचाव में मददगार है।
  • सरसों का तेल ठंडा होता है या गर्म?

    सरसों का तेल गर्म होता है और इसलिए ये इम्यूनिटी बूस्टर है जिसका सेवन आपको सर्दी-जुकाम से बचाव में मददगार है।

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Pallavi Kumari

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चीफ सब-एडिटर

पल्लवी,  हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में करीब 8 साल का अनुभव रखती हैं। शुरुआती कई सालों तक All India Radio में सक्रिय रहीं, फिर विभिन्न वेब पोर्ट्ल्स जैसे TheHealthsite, Indiatv और Jansatta के लिए हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म, स्त्री विमर्श और साहित्य से जुड़े विषयों पर खूब लिखा और संपादन किया। फिलहाल ओनलीमायहेल्थ में चीफ सब एडिटर के पद पर रहते हुए ये हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े गंभीर विषयों को आमजन की सरल-सहज भाषा में परोसने का काम कर रही हैं। इन लेखों को विश्वसनीय और तथ्यपरक बनाने के लिए ये न सिर्फ विषयों पर गहन शोध करती हैं बल्कि, एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स से बात भी करती हैं। Editorial Policy: पल्लवी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Sep 10, 2026 15:19 IST

    Published By : Pallavi Kumari
    Reviewed By : Edwina Raj

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