Sun Oct 4, 2026 | 12:01 AM IST

Medically Reviewed by Dr Anupama N K , Consultant – Medical Gastroenterology

गट आपकी नींद पर कैसे असर डालता है? डॉक्टर से जानें

गट हेल्थ और नींद के बीच गहरा संबंध है, जहां पाचन तंत्र और दिमाग का गट-ब्रेन एक्सिस हमारी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। खराब गट माइक्रोबायोम नींद में बाधा डाल सकता है और नींद की कमी पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है, जिसके लिए नियमित दिनचर्या और फाइबर युक्त डाइट जरूरी हैं।
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कई बार स्ट्रेस और बेचैनी के कारण लोगों को पेट से जुड़ी परेशानियां होती हैं और कभी-कभी पाचन और आंतों से जुड़ी समस्याएं होती हैं, जो नींद पर भी बुरा असर डाल सकती है, लेकिन कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या वाकई में गट के स्वास्थ्य के कारण नींद पर बुरा असर हो सकता है? आइए इस बारे में Dr. Shivakumar Varakanahalli, Consultant - Medical Gastroenterology, Aster Whitefield Hospital और Dr. Anupama N K, Senior Consultant - Medical Gastroenterology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानें।

गट का नींद पर असर

डॉ. शिवकुमार के अनुसार, "नींद और गट हेल्थ (पेट की सेहत) के बीच जितना लोग सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा गहरा संबंध है और यह संबंध दोनों तरफ से काम करता है। गट, न्यूरल, हार्मोनल, इम्यून और मेटाबोलिक रास्तों के जरिए दिमाग से संपर्क करता है, जबकि नींद और शरीर की सर्केडियन रिदम गट माइक्रोबायोम और उसके कामकाज पर असर डाल सकती है।"

डॉ. शिवकुमार आगे कहते हैं, "हाल की रिसर्च से पता चलता है कि नींद की कमी, खराब नींद और सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी का संबंध गट माइक्रोबियल बनावट और कामकाज में बदलाव से है, हालांकि इसके सटीक कारण और असर के संबंध पर अभी भी रिसर्च चल रही है।"

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गट-ब्रेन एक्सिस: पाचन तंत्र और ब्रेन का कनेक्शन

डॉ. अनुपमा के अनुसार, हमारे शरीर का 'गट-ब्रेन एक्सिस' (Gut-Brain Axis) यानी आंत और दिमाग के बीच का एक गहरा और सीधा कनेक्शन है। हमारा पेट सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करता है, बल्कि यह हमारे मूड, स्ट्रेस और सबसे बढ़कर, हमारी नींद की गुणवत्ता को भी गहराई से नियंत्रित करता है।

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क्या कहती है स्टडी?

साल 2018 में Frontiers in Psychiatry में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, आंतों का माइक्रोबायोटा (गट बैक्टीरिया) हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी (Circadian Rhythm) के साथ मिलकर काम करता है। हमारे खाने-पीने का समय, नींद की कमी और शिफ्ट में काम करने जैसी आदतें इस बायोलॉजिकल क्लॉक और बैक्टीरिया के बैलेंस को बिगाड़ सकती हैं। इसके बिगड़ने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम और डिप्रेशन (अवसाद) जैसी समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि आंतों के बैक्टीरिया और शरीर की घड़ी आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

नींद खराब होने के कारण हो सकती हैं गट से जुड़ी समस्याएं

डॉ. शिवकुमार बताते हैं, जब नींद लगातार कम होती है या उसमें रुकावट आती है, तो शरीर की नॉर्मल बायोलॉजिकल रिदम (जैविक लय) बिगड़ सकती है। इससे भूख कंट्रोल करने की क्षमता, खाना खाने का समय, स्ट्रेस हार्मोन और मेटाबोलिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, जिससे पाचन भी प्रभावित हो सकता है।

जो लोग ठीक से नहीं सोते, वे देर रात खाना खा सकते हैं, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर हो सकते हैं, ज्यादा कैफीन ले सकते हैं या उनके खाने का समय अनियमित हो सकता है। इन सभी चीजों से ब्लोटिंग (पेट फूलना), रिफ्लक्स या मल त्यागने की आदतों में बदलाव हो सकता है।

गट से जुड़ी समस्या के कारण नींद से जुड़ी समस्याएं

डॉ. शिवकुमार का कहना है, "यह संबंध दूसरी तरफ से भी काम करता है। पाचन संबंधी परेशानी, रिफ्लक्स, पेट दर्द, ब्लोटिंग या मल त्यागने की आदतों में बदलाव के कारण नींद आने या नींद बनाए रखने में परेशानी हो सकती है।"

डॉ. शिवकुमार आगे कहते हैं, "नई रिसर्च से पता चलता है कि गट माइक्रोबियल मेटाबोलाइट्स, जिनमें शॉर्ट-चेन फैटी एसिड और ट्रिप्टोफैन से जुड़े मेटाबोलाइट्स शामिल हैं, नींद को कंट्रोल करने, सूजन और स्ट्रेस के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इन प्रक्रियाओं को इस बात का सबूत नहीं माना जाना चाहिए कि सिर्फ माइक्रोबायोम में बदलाव करने से ही अनिद्रा (insomnia) ठीक हो जाएगी।"

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बेहतर नींद और हेल्दी गट के लिए क्या करें?

डॉ. शिवकुमार का कहना है, बेहतर गट और नींद की सेहत के लिए, निरंतरता (consistency) पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए कुछ अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी है।

  • खाना खाने और सोने का समय नियमित रखें।
  • सोने से ठीक पहले बहुत भारी खाना न खाएं।
  • दिन के बाद के समय में ज्यादा कैफीन न लें।
  • शारीरिक रूप से एक्टिव रहें।
  • अपनी डाइट में पर्याप्त फाइबर और तरह-तरह के प्लांट-बेस्ड फूड शामिल करें।

डॉक्टर से कब मिलें?

लगातार रिफ्लक्स, पेट दर्द, दस्त, कब्ज या नींद की समस्याओं को सिर्फ 'खराब गट हेल्थ' का नतीजा नहीं मानना चाहिए। इनके असली कारण का पता लगाने के लिए जांच की जरूरत होती है।

निष्कर्ष

नींद और आंतों की सेहत (गट हेल्थ) के बीच बेहद गहरा संबंध है। आंत और दिमाग का 'गट-ब्रेन एक्सिस' (Gut-Brain Axis) हमारे मूड, स्ट्रेस और नींद की गुणवत्ता को नियंत्रित करता है। कम नींद या सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी से गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे एसिडिटी या ब्लोटिंग हो सकती है।

वहीं, पेट दर्द या एसिड रिफ्लक्स जैसी पाचन से जुड़ी गड़बड़ियां भी नींद में रुकावट डालती हैं। बेहतर नींद और हेल्दी गट के लिए सोने-जागने का समय नियमित रखना, फाइबर युक्त आहार लेना और सोने से ठीक पहले हैवी फूड से बचना फायदेमंद होता है।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • नींद न आने की समस्या क्यों होती है?

    अधिक स्ट्रेस में रहने, चिंता, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, खान-पान से जुड़ी आदतें, शारीरिक स्वास्थ्य, देर रात कैफीन की सेवन करने और अनियमित लाइफस्टाइल के कारण नींद पर बुरा असर होता है।
  • गट से जुड़ी समस्याओं के क्या लक्षण हैं?

    गट से जुड़ी समस्या होने पर व्यक्ति को ब्लोटिंग, गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, मल त्याग से जुड़ी परेशानियां, दस्त, पेट दर्द, ऐंठन, वजन में बदलाव, थकान और स्किन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

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Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 03, 2026 22:10 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Anupama N K