खिचड़ी बहुत ही सादा भोजना है, क्योंकि इसमें मसाले कम होते हैं और सब्जियां डालने से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर हो जाती है। मैं खुद करीब पिछले पांच साल से तकरीबन रोजाना रात को खिचड़ी खा रही हूं। पहले मुझे पाचन और नींद से जुड़ी समस्याएं हो रही थीं। जब मैंने डिनर में खिचड़ी खाना शुरू किया है, तब से मुझे पाचन से जुड़ी समस्याओं से काफी राहत मिली है। पाचन सही होने से नींद से जुड़ी समस्याओं में भी फर्क महसूस हुआ है। इसलिए रात में खिचड़ी खाना मेरे लिए काफी फायदेमंद रहा है, लेकिन क्या वाकई रोजाना खिचड़ी खआना फायदेमंद है? यह जानने के लिए हमने नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत से बात की।
रोज खिचड़ी खाने के 5 फायदे
डायटिशियन वंदना राजपूत कहती हैं, “खिचड़ी एक ऐसा फूड है, जिसमें अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से कई तरह की मौसमी सब्जियां डालकर इसे पौष्टिक बनाया जा सकता है। हालांकि, खिचड़ी के फायदे इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि उसमें क्या-क्या डाला गया है और उसे किस मात्रा में खाया जा रहा है।”
1. कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत
वंदना राजपूत ने बताया कि खिचड़ी में चावल और दाल मिक्स होते हैं। चावल में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो शरीर को एनर्जी देते हैं। वहीं दाल के जरिए शरीर को प्रोटीन मिलते हैं, जो मांसपेशियों और शरीर के दूसरे जरूरी कामों के लिए जरूरी होता है। चावल और दाल में अलग-अलग तरह के अमीनो एसिड होते हैं। इस वजह से इन दोनों को एक साथ खाने से प्रोटीन की क्वालिटी बेहतर होती है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को रोजाना खिचड़ी खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
2.वजन को मैनेज करने में मददगार
वंदना राजपूत का कहना है, “जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वे लोग अपनी डाइट में खिचड़ी शामिल कर सकते हैं। इसमें अलग-अलग तरह की दालें और सब्जियां मिलाकर फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, वजन पर असर पूरे दिन के खाने, उसकी मात्रा और फिजिकल एक्टिविटी से पड़ता है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें खिचड़ी में घी या तेल की मात्रा कम रखनी चाहिए।”
3. ग्लूटेन से एलर्जी
डायटिशियन वंदना राजपूत के अनुसार, चावल और दाल से बनी सादी खिचड़ी स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-फ्री होती है। इसलिए यह उन लोगों के भोजन का हिस्सा हो सकती है जिन्हें ग्लूटेन से बचना होता है। हालांकि, अगर किसी को सीलिएक बीमारी है, तो इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री और खाना बनाने के दौरान क्रॉस-कंटैमिनेशन का ध्यान रखना जरूरी है। पैक्ड मसालों या दूसरी तैयार सामग्री में ग्लूटेन होने की संभावना हो सकती है, इसलिए मसालों को इस्तेमाल करने से पहले लेबल जरूर चेक करें।
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4. खाने में हल्का होना
वंदना राजपूत कहती हैं, “खिचड़ी को अच्छी तरह पकाने से चावल और दाल नरम हो जाते हैं। इस वजह से इसे चबाना और खाना आसान हो सकता है। सादी, कम तेल-मसाले वाली खिचड़ी कई लोगों को भारी खाने के मुकाबले ज्यादा आरामदायक लगती है। अगर किसी को पाचन से जुड़ी समस्या है, तो रात में खिचड़ी खाना फायदेमंद हो सकता है। अगर परेशानी लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।”
5. सूजन कम करने में फायदेमंद
MDPI के अनुसार, दाल में पॉलीफेनॉल्स, सेपोनिन, फ्लेवन-3-ऑल और फाइटोस्टेरॉल जैसे कई बायोएक्टिव कम्पाउंड से भरपूर है। ये एंटी-डायबिटिक और कार्डियोप्रोटेक्टिव होते हैं। ये सूजन कम करने में मदद करते हैं। इसलिए खिचड़ी में दाल डालने से सूजन जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं। खाने को पौष्टिक रखने के लिए अनाज, दाल और सब्जियों का मेल इसे और भी ज्यादा पौष्टिक बना देता है।
खिचड़ी को ज्यादा पौष्टिक बनाने के तरीके
वंदना राजपूत सलाह देती हैं कि खिचड़ी को अपनी पसंद के मुताबिक तैयार किया जा सकता है। कुछ आसान बदलाव इसे ज्यादा संतुलित भोजन बनाने में मदद कर सकते हैं।
- प्रोटीन बढ़ाने के लिए दाल की मात्रा बढ़ा सकते हैं या साथ में दही लिया जा सकता है। जरूरत के अनुसार पनीर भी शामिल किया जा सकता है।
- फाइबर बढ़ाने के लिए खिचड़ी में गाजर, बीन्स, पालक, मटर या दूसरी पसंदीदा सब्जियां मिलाई जा सकती हैं।
- चावल के अलावा, ब्राउन राइस, बाजरा या मिलेट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- स्वाद के लिए जीरा, अदरक और हल्दी जैसे मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में देसी घी इस्तेमाल किया जा सकता है।
खिचड़ी बनाने की हेल्दी रेसिपी
डायटिशियन वंदना राजपूत ने हेल्दी खिचड़ी बनाने का तरीका बताया है।
सामग्री
- मूंग दाल - ½ कप
- फॉक्सटेल मिलेट या ब्राउन राइस - ½ कप
- सब्जियां - 1 कप (गाजर, बीन्स, मटर)
- जीरा - ½ छोटा चम्मच
- कद्दूकस किया हुआ अदरक - 1 छोटा चम्मच
- घी - 2 छोटे चम्मच
- हल्दी - ¼ छोटा चम्मच
- नमक - स्वादानुसार
- पानी - जरूरत के अनुसार
बनाने का तरीका
- मूंग दाल और मिलेट या ब्राउन राइस को अच्छी तरह धोकर लगभग 30 मिनट के लिए भिगो दें।
- कुकर में घी गर्म करें और उसमें जीरा व अदरक डालें।
- अब सब्जियां, हल्दी और नमक डालकर हल्का चलाएं।
- भीगी हुई दाल और अनाज डालें। फिर पानी मिलाकर कुकर बंद करें।
- अच्छी तरह पकने तक प्रेशर कुक करें। पकाने का समय इस्तेमाल किए गए अनाज और कुकर के अनुसार बदल सकता है।
- खिचड़ी तैयार होने पर गर्मागर्म परोसें। चाहें तो साथ में दही या रायता ले सकते हैं।
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निष्कर्ष
खिचड़ी को सिर्फ बीमारी के समय खाना जरूरी नहीं है। इसमें विभिन्न प्रकार की दालें और सब्जियां मिलाकर खाने से यह ज्यादा पौष्टिक हो सकती है। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, उन्हें चावल या दूसरे अनाज में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स को चेक करके ही लेना चाहिए। रोजाना खिचड़ी खाने के साथ-साथ डाइट में अनाज, फल, सब्जियां और प्रोटीन को भी शामिल करें।
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FAQ
क्या रात के खाने में खिचड़ी खाना दोपहर के भोजन से ज्यादा फायदेमंद है?
रात के समय पाचन अग्नि धीमी पड़ जाती है। डिनर में हल्की खिचड़ी खाने से पाचन पर दबाव नहीं पड़ता, आंतों को आराम मिलता है और रात में भारीपन या एसिडिटी के बिना अच्छी नींद आती है।छिलके वाली मूंग दाल या धुली मूंग दाल, खिचड़ी के लिए कौन-सी ज्यादा बेहतर है?
छिलके वाली मूंग दाल ज्यादा पौष्टिक होती है क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में डाइट्री फाइबर होता है जो आंतों को साफ रखता है। हालांकि, बीमारी या पेट खराब होने की स्थिति में धुली पीली मूंग दाल का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि वह तुरंत पच जाती है।
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Sep 18, 2026 18:48 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Vandana Rajput
