Mon Oct 19, 2026 | 05:47 PM IST

6 महीने तक के शिशुओं के फूड में नहीं मिलाई जा सकेगी चीनी, FSSAI रोक लगाने की तैयारी में

6 महीने से छोटे शिशुओं को दूध या उनके फूड प्रोडक्ट्स में अतिरिक्त चीनी मिलाना अब बैन हो सकता है। हाल ही में FSSAI ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें शिशुओं के खाने में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक लग सकती है।
6 महीने तक के शिशुओं के फूड में नहीं मिलाई जा सकेगी चीनी, FSSAI रोक लगाने की तैयारी में6 महीने तक के शिशुओं के फूड में नहीं मिलाई जा सकेगी चीनी, FSSAI रोक लगाने की तैयारी में

6 महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले फूड प्रोडक्ट्स में अब अतिरिक्त चीनी मिलाने पर रोक लग सकती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस दिशा में नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत शिशुओं के लिए बने फूड प्रोडक्ट्स में सुक्रोज (Sucrose) और फ्रुक्टोज (Fructose) मिलाने की अनुमति नहीं देने की बात कही गई है।

FSSAI के ड्राफ्ट में क्या कहा गया है?

FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, छह महीने तक के बच्चों के लिए बने फूड प्रोडक्ट्स में सुक्रोज और फ्रुक्टोज नहीं मिलाए जाने चाहिए। ये दोनों शुगर के प्रकार हैं, जिनका इस्तेमाल फूड प्रोडक्ट्स में मिठास बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। फिलहाल मौजूदा Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020, के तहत शिशु आहार में कार्बोहाइड्रेट के लिए लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। कुछ खास कंडीशंस में तय सीमा में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने की भी अनुमति है।

अब Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Amendment Regulations, 2026 के ड्राफ्ट में 6 महीने तक के शिशुओं के प्रोडक्ट्स में दोनों शुगर मिलाने पर स्पष्ट रोक लगाने का फैसला किया है। हालांकि, अभी यह ड्राफ्ट फाइनल नहीं हुआ है। इस पर लोगों और संबंधित लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं।

 

 

 

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बच्चों के शुरुआती 6 महीने क्यों महत्वपूर्ण है?

शिशु के जन्म के बाद पहले 6 महीने उसकी ग्रोथ काफी तेजी से होती है। इस दौरान शिशु को सही पोषण मिलना जरूरी है। ड्राफ्ट के अनुसार, कम उम्र में अतिरिक्त शुगर लेने से शिशु की खाने-पीने की पसंद और आगे चलकर उनकी खानपान की आदतों पर असर पड़ने की आशंका है। शुरुआती महीनों में चीनी लेने से बच्चों को मोटापे और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का रिस्क बढ़ सकता है। शिशुओं के शुरुआती महीनों में उनकी फीडिंग को लेकर सरकार ने सतर्कता बरतते हुए इस ड्राफ्ट को तैयार किया है।

पहले 6 महीने ब्रेस्टफीडिंग देना जरूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पेरेंट्स को पहले 6 महीने शिशुओं को सिर्फ ब्रेस्टफीड कराने की सलाह दी है। इस दौरान स्तनपान से शिशु को कई जरूरी पोषक तत्व पूरे हो सकते हैं। अगर मां का दूध पूरा नहीं आ रहा, तो शिशुओं को फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है, लेकिन शिशु को फॉर्मूला मिल्क देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

जन्म के शुरुआती महीने शिशुओं के पोषण के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इसलिए ऐसे समय में उन्हें सुक्रोज और फ्रुक्टोज जैसे मिठास से भरपूर फूड देना हेल्थ के लिए सही नहीं है। हालांकि, FSSAI ने इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले लोगों से सुझाव मांगे हैं, जो अधिसूचना होने के 60 दिन के भीतर भेजे जा सकते हैं।

Main Image Credit: Magnific

FAQ

  • 6 महीने के बाद जब बच्चे को ठोस आहार देना शुरू करें, तो मिठास के लिए क्या इस्तेमाल करें?

    प्रोसेस्ड चीनी, गुड़ या शहद के बजाय नेचुरल मिठास वाले फूड्स का इस्तेमाल करें। इसके लिए उबला और मैश किया हुआ सेब, पका हुआ केला, मैश किया हुआ चीकू या पपीता सबसे सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प हैं।
  • पेरेंट्स बाजार से बेबी फूड खरीदते समय पैकेट पर क्या जांचें?

    पैकेट के पीछे सामग्री सूची जरूर पढ़ें। यदि इंग्रीडिएंट्स में सुक्रोज, फ्रु्क्टोज, क्रॉर्न सिरप, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप या फ्रूट जूस लिखा हो, तो समझ लें कि इसमें एडेड शुगर है और ऐसे प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से बचें।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 19, 2026 16:09 IST

    Published By : Aneesh Rawat