Thu Nov 5, 2026 | 05:20 PM IST

Medically Reviewed by Dr Sunil Kumar K , Pulmonology

पटाखों के धुएं से फेफड़ों को होने वाले नुकसान के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? खुद बताया डॉक्टर ने

पटाखों के धुएं से फेफड़ों को कई तरह के गंभीर नुकसान हो सकते हैं। यहां तक कि जिन्हें पहले से ही लंग्स से जुड़ी परेशानी है, उनकी कंडीशन भी बिगड़ सकती है। इन लक्षणों के बारे में जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।
पटाखों के धुएं से फेफड़ों को होने वाले नुकसान के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? खुद बताया डॉक्टर नेपटाखों के धुएं से फेफड़ों को होने वाले नुकसान के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? खुद बताया डॉक्टर ने

एक-दो दिन में दिवाली है। अभी से कई लोगों ने पटाखे जलाना शुरू कर दिया है। देर शाम कई पटाखे फूटने की आवाजें आती हैं। हालांकि, इसका अपना आनंद है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है। अक्सर लोगों को पटाखों के धुएं से फेफड़ों को होने वाले नुकसानों के शुरुआती लक्षणों की जानकारी नहीं होती है। इस लेख में हम उन्हीं का जिक्र कर रहे हैं। इस बारे में जानने के लिए हमने Dr. Sunil Kumar K, Lead Consultant - Interventional Pulmonology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से बात की।

पटाखों के धुएं से फेफड़ों को होने वाले नुकसान के लक्षण

Early Warning Signs Of Lung Damage Due To Firecracker SmokeEarly Warning Signs Of Lung Damage Due To Firecracker Smoke

Lung India में प्रकाशित रिव्यू आर्टिकल के अनुसार, पटाखों के जलने से हवा में पार्टिकुलेट मैटर PM2.5 के स्तर में भारी उछाल आता है। यह धुआं फेफड़ों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा करता है। इसके कारण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस फूलने/घरघराहट (wheezing) के मामलों में 30% से 40% तक की बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं-

गले में खराश

Dr. Sunil Kumar K के मुताबिक, "यह एक सामान्य सी लगने वाली समस्या है। अगर आप नोटिस करें कि दिवाली के पटाखे जलाने के बाद से ही आपको गले में खराश शुरू हो गई है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह फेफड़ों से संबंधित समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसके अलावा, आप महसूस करें कि बार-बार नाक बहना और छींकने जैसी अन्य परेशानियां भी होने लगती हैं।"

इसे भी पढ़ें: दिवाली से पहले ही Delhi की हवा हुई जहरीली, 24 घंटे इस हवा में सांस लेने से सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं?

बार-बार खांसी

Dr. Sunil Kumar K कहते हैं, "अगर आपको अचानक दिवाली के बाद सूखी खांसी शुरू हो जाए, तो यह भी सही संकेत नहीं है। हालांकि, बदलते मौसम में ऐसी समस्याएं हो जाती हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि दिवाली में जलाए गए पटाखे और खराब एक्यूआई के कारण हवा में पीएम2.5 फाइन पार्टिकल्स घुल जाते हैं। सांस लेने के जरिए ये फाइन पार्टिकल्स लंग्स और फिर ब्लड स्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में बार-बार खांसी होने की समस्या हो सकती है।"

सीने में दर्द और भारीपन

Early Warning Signs Of Lung Damage Due To Firecracker Smoke InhalationEarly Warning Signs Of Lung Damage Due To Firecracker Smoke Inhalation

Dr. Sunil Kumar K कक मानें, दिवाली के बाद से अगर आपको सीने में दर्द, जकड़न और भारीपन महसूस हो, तो समझ जाएं कि एयरवेज में सूजन आ गई है। ऐसा प्रदूषित हवा में सांस लेने के कारण हो सकता है। यह भी इस बात का संकेत है कि फेफड़ों से संबंधित समस्या हो रही है और लापरवाही न बरतें।

सांस लेने में तकलीफ

यह अपने आप में एक गंभीर समस्या है। अगर किसी को पहले से ही सांस की समस्या है, तो उन्हें इस दिवाली पर सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं, अगर दिवाली के बाद आपको सांस संबंधी समस्या महसूस होने लगे, तो भी जरूरी है कि आप एलर्ट हो जाएं। कई बार दिवाली के बाद बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों में बेचैनी, उलझन और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। ये सब चीजें फेफड़ों से जुड़ी परेशानी की ओर इशारा करती हैं।

होठों का नीला या स्लेटी पड़ना

Dr. Sunil Kumar K आगे बताते हैं, "दिवाली के बाद आप नोटिस करें कि क्या आपके होठों के रंग में बदलाव आ रहा है? विशेष रूप से उनका नीला या स्लेटी दिखना। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। ऐसा तब भी होता है, जब लंग्स सही तरह से काम नहीं करते हैं। इसके अलावा, किसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अचानक मानसिक भ्रम या उलझन की स्थिति भी हो सकती है। ध्यान रखें कि यह लक्षण गले या सांस की नली में होने वाली किसी मामूली जलन या खराश के सामान्य संकेत नहीं हैं। ऐसा होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।"

इसे भी पढ़ें: खराब AQI में सुबह की सैर करना कितना सुरक्षित? डॉक्टर से जानें कब करें मॉर्निंग वॉक

अस्थमा या COPD के गंभीर लक्षण

ये दोनों लंग्स से जुड़ी बीमारियां हैं। विशेषकर, दिवाली के बाद ये समस्याएं अधिक ट्रिगर हो जाती हैं। ऐसे में मरीज में अस्थमा के एपिसोड बढ़ जाते हैं और COPD के कारण सांस लेने में गंभीर समस्या आने लगती है। यही नहीं, इन बीमारियों के मरीज जो सामान्य दिनों में अपने लक्षणों को सही तरह से मैनेज कर पाते हैं, उन्हें अक्सर दिवाली के बाद इसे मैनेज करने में दिक्कत आने लगती है।

आवाज बैठना

आवाज बैठने का सीधा-सीधा संबंध सर्दी-जुकाम या बुखार से है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम में आई समस्याओं की वजह से भी आवाज बैठ सकती है। इसके अलावा, वोकल काॅर्ड में आई सूजन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। आवाज बैठ जाए, तो इसे भी सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें।

कब जाएं तुरंत डॉक्टर के पास?


  • अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत महसूस हो।
  • होंठों, उंगलियों के पोरों (टिप्स) और चेहरे के नीला पड़ने पर।
  • मानसिक रूप से उलझन, कंफ्यूजन होने पर।
  • किसी को गंभीर रूप से अस्थमा या COPD होने पर।

निष्कर्ष

दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए दिवाली के बाद का समय और भी ज्यादा क्रिटिकल हो जाता है। इसके बाद अक्सर लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, खांसी बढ़ जाती है, सीने में दर्द और जकड़न महसूस होने लगती है। ये तमाम समस्याएं इस बात का संकेत है कि बढ़ते प्रदूषण के कारण आपके फेफड़े प्रभावित हो रहे हैं इसलिए समय पर डॉक्टर के पास जाकर अपना इलाज करवाएं।

All Image Credit: Magnific

FAQ

  • पटाखों के धुएं के संपर्क में आने के बाद आंखों और फेफड़ों को डिटॉक्स करने के लिए क्या करें?

    सबसे पहले चेहरे व आंखों को ठंडे पानी से धोएं, गुनगुने नमकीन पानी से गरारे करें और 5 मिनट बाद सादे पानी की भाप (स्टीम) लें।
  • क्या दिवाली की रात को धुएं के तुरंत बाद दूध में घी या शहद मिलाकर पीना फेफड़ों के लिए सुरक्षित है?

    एक्यूट केमिकल एक्सपोजर या सांस फूलने के दौरान भारी घी वाला दूध पीने से बलगम गाढ़ा हो सकता है; इसके बजाय हल्का गुनगुना पानी, तुलसी-अदरक का हल्का काढ़ा या ग्रीन टी पीना अधिक फायदेमंद है।

Read Next

→ दिवाली पर पटाखों का धुआं हार्ट के मरीजों के लिए क्यों बन सकता है जानलेवा? मानें डॉक्टर की सलाह

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Nov 05, 2026 16:59 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Sunil Kumar K