Sat Nov 7, 2026 | 06:24 PM IST

Medically Reviewed by Dr Major Rajesh Bhardwaj , ENT Specialist & Head and Neck Surgeon

दिवाली के बाद कान में दर्द या कम सुनाई देने की हो रही है समस्या? जानें डॉक्टर से कब मिलना है जरूरी

दिवाली में पटाखों की तेज आवाज से कानों को नुकसान हो सकता है, जिससे दर्द, कम सुनाई देना या टिनिटस जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अचानक सुनाई कम देने या लगातार परेशानी होने पर तुरंत ईएनटी एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है।
दिवाली के बाद कान में दर्द या कम सुनाई देने की हो रही है समस्या? जानें डॉक्टर से कब मिलना है जरूरीदिवाली के बाद कान में दर्द या कम सुनाई देने की हो रही है समस्या? जानें डॉक्टर से कब मिलना है जरूरी

दिवाली में पटाखों की तेज आवाजों का असर कानों पर पड़ता है, लेकिन कई बार यह असर इतना ज्यादा होता है कि व्यक्ति को कान में दर्द, सीटी या घंटी जैसी आवाज (Tinnitus), कान बंद होने का एहसास या सुनने में परेशानी होने लगती है। कई लोग इन लक्षणों को नॉर्मल मानकर कुछ दिनों तक इंतजार करते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सही है? आइए इस बारे में Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, Consultant, MedFirst ENT Centre, New Delhi से जानें।

दिवाली के पटाखों की तेज आवाज से कानों को कैसे नुकसान होता है?

Dr. Rajesh Bhardwaj के अनुसार, हमारे कान का अंदरूनी हिस्सा बहुत सेंसिटिव होता है। तेज आवाज की वेव कान के पर्दे से होते हुए अंदरूनी कान तक पहुंचती हैं, जहां मौजूद बेहद छोटे हेयर सेल्स (Hair Cells) सुनने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। बहुत तेज या अचानक होने वाली आवाज इन सेंसिटिव सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है। इसे Noise-Induced Hearing Damage कहा जाता है।

पटाखों की तेज आवाज के कारण कुछ लोगों को अस्थायी रूप से सुनाई कम दे सकता है, जबकि अधिक गंभीर स्थिति में सुनने की क्षमता को स्थायी नुकसान भी हो सकता है। ध्यान रहे कि जरूरी नहीं कि नुकसान तभी हो जब पटाखा आपके बिल्कुल पास फटे। लगातार तेज आवाज वाले वातावरण में रहना भी कानों पर बुरा असर डाल सकता है।

क्या कहती है स्टडी?

साल 2018 में Audiology & Neurootology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पटाखों की तेज आवाज से कान के अंदरूनी हिस्से और सुनने की ताकत को बहुत गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। ज्यादातर पटाखे 6 मीटर की दूरी से भी 110 डेसिबल से ज्यादा शोर पैदा करते हैं, जिससे मुख्य रूप से तीखी या ऊंची आवाजें सुनने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा, यह धमाका कान के अंदरूनी हिस्सों, जैसे सुनने और संतुलन बनाने वाले अंगों (कोचलीया, सैक्यूल और यूट्रिकल) को भी बुरी तरह डैमेज कर सकता है।

इसे भी पढ़ें: पटाखों की आवाज से कान में घंटी बजना: क्या यह नर्व डैमेज का संकेत है?

ear pain hearing loss after diwali when to see doctor 2ear pain hearing loss after diwali when to see doctor 2

दिवाली के बाद कान में कौन-से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

Dr. Rajesh का कहना है, पटाखों की तेज आवाज के संपर्क में आने के बाद कुछ आम लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जैसे।

  • कान में दर्द: कान में हल्का या तेज दर्द महसूस होना।
  • सुनाई कम देना: बातचीत या आसपास की आवाजें पहले की तुलना में धीमी सुनाई देना।
  • कान में सीटी या घंटी बजना: बिना किसी बाहरी आवाज के कान में लगातार या रुक-रुककर आवाज सुनाई देना।
  • कान बंद होने का एहसास: ऐसा महसूस होना जैसे कान में कुछ भरा हुआ है।
  • चक्कर आना: कुछ मामलों में बैलेंस बिगड़ना या चक्कर महसूस होना।
  • कान से खून या डिस्चार्ज होना: पटाखों की तेज आवाज या चोट के बाद ऐसा होना कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने का संकेत हो सकता है।

इन लक्षणों का कारण सिर्फ पटाखों की आवाज नहीं होती है। कान में इंफेक्शन, वैक्स जमा होना या कान के पर्दे में चोट भी इसकी वजह हो सकती है। इसलिए सही कारण जानने के लिए जांच कराना जरूरी है।

कब ENT डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

Dr. Rajesh का कहना है, हर स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं होती है, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिनमें देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।

1. अचानक सुनाई देना कम हो जाए

अगर दिवाली के बाद एक या दोनों कानों से अचानक सुनाई कम देने लगे, तो इसे नॉर्मल थकान या कान में वैक्स की समस्या समझकर इंतजार न करें। अचानक होने वाली सुनने की कमी (Sudden Hearing Loss) एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत ENT एक्सपर्ट या इमरजेंसी विभाग में जांच कराएं, खासकर 24 घंटे के अंदर।

इसे भी पढ़ें: कान के दर्द में लहसुन के तेल का प्रयोग कितना सुरक्षित है?

2. कान में लगातार सीटी या घंटी बजना

पटाखे फोड़ने के बाद अगर आपके कानों में लगातार सीटी जैसी आवाज, घंटी बजने या भिनभिनाहट की आवाज आए, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसके साथ ही, अगर कम सुनाई दे या चक्कर आने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

3. कान में तेज दर्द या खून आना

अगर कान में तेज दर्द हो, कान से खून या तरल पदार्थ यानी डिस्चार्ज निकल रहा हो, तो जल्द से जल्द जांच कराएं। यह कान के पर्दे में चोट या इंफेक्शन का संकेत हो सकता है।

4. चक्कर आना या बैलेंस बिगड़ना

अगर कान की परेशानी के साथ तेज चक्कर, चलने में असंतुलन या उल्टी जैसा महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। अचानक सुनाई कम देने के साथ चेहरे पर कमजोरी, सुन्नपन या बोलने में परेशानी हो तो तुरंत इमरजेंसी मदद लें।

दिवाली के बाद कानों की सुरक्षा कैसे करें?

Dr. Rajesh बताते हैं, कानों को सेफ रखने के लिए पटाखों के बहुत पास खड़े होने से बचें। पटाखों की तेज आवाज वाली जगहों से दूरी बनाए रखें और बच्चों को पटाखे जलाते समय सुरक्षित रखें। तेज आवाज वाले कार्यक्रमों में जरूरत के अनुसार सही हियरिंग प्रोटेक्शन (Hearing Protection) का इस्तेमाल करें। अगर किसी को कान में परेशानी महसूस हो, तो उसे दोबारा तेज आवाज के संपर्क में आने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष

दिवाली के बाद कान में दर्द, सीटी बजना या सुनाई कम देना कभी-कभी तेज आवाज के संपर्क में आने के कारण हो सकता है। कुछ लक्षण अपने आप कम हो सकते हैं, लेकिन अचानक सुनने की क्षमता में कमी को कभी भी आम लक्षण मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कान से जुड़ी किसी भी नई या लगातार बनी रहने वाली परेशानी में समय पर जांच कराएं, ताकि किसी भी परेशानी की समय पर पहचान हो सके और सही इलाज से सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • कान दर्द होने के क्या कारण है?

    कान में इंफेक्शन, कान में मैल जमा होने, सर्दी-जुकाम, गले या दांतों से जुड़ी समस्या, हवा में बदलाव, कान में पानी जमा होने, कान के पर्दे के फटने या इसमें चोट लगने जैसी समस्याओं के कारण लोगों को कान में दर्द की समस्या हो सकती है।
  • कान से जुड़ी समस्या के लक्षण क्या हैं?

    कान में परेशानी होने पर व्यक्ति को कान दर्द, सुनाई कम देने, भारीपन, कान से रिसाव, कान से आवाजें आना, खुजली, रेडनेस, चक्कर आने, बैलेंस बिगड़ने, बुखार या सिरदर्द होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

Read Next

→ पटाखों की आवाज से कान में घंटी बजना: क्या यह नर्व डैमेज का संकेत है?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Priyanka Sharma

Health & Lifestyle Journalist

प्रियंका शर्मा पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 2 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर हैं। वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, प्रेगनेंसी, स्किनकेयर, हेयरकेयर, आयुर्वेद, योग और हार्ट हेल्थ जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखती हैं और जटिल स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञों की राय और भरोसेमंद मेडिकल स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह Grehlakshmi (महिला केंद्रित हिंदी पत्रिका) और Noida Khabar के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: प्रियंका द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Nov 07, 2026 17:15 IST

    Published By : Priyanka Sharma
    Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj